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जम्मू-कश्मीर में हर साल दस हजार से ऊपर मिल रहे टीबी के मामले

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jammu kashmir news
जम्मू। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में हर साल दस हजार से अधिक टीबी (ट्यूबर क्लोसीस) के मामले मिल रहे हैं। इनमें ऐसे भी मामले होते हैं जिन्होंने दवाई बीच में छोड़ दी होती है, लेकिन नए सिरे से उन्हें उपचार दिया जाता है, जिसमें ये अधिकांश नए मामले गिने जाते हैं। इनमें जम्मू संभाग से करीब 7500 से 8000 और बाकी कश्मीर से होते हैं। प्रदेश में उचित चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता और जागरूकता बढ़ने के कारण भी नए मामले जल्दी पकड़ में आ रहे हैं। जम्मू कश्मीर को 2025 तक टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
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एनएचएम के आंकड़ों के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में वर्ष 2018-19 में 11345, वर्ष 2019-20 में 12895 और 2020-21 में 11860 टीबी के मामले पहचान में आए। इन मरीजों को उपचार दिया गया। प्रदेश में नए मामलों में जिला जम्मू सबसे आगे हैं। जम्मू संभाग के लगभग जिलों से नए टीबी के मामले मिल रहे हैं। माइको बैक्टीरियम ट्यूबर क्लोसीस नामक बैक्टीरिया मानव को टीबी से पीड़ित करता है। एक टीबी से पीड़ित मरीज आसपास के दस लोगों को संक्रमण दे सकता है। इससे शारीरिक रूप से कमजोर लोग अधिक चपेट में आते हैं। टीबी के मरीजों के लिए डाइट्स (डायरेक्ट आब्जर्व ट्रीटमेंट) योजना वरदान साबित हुई है। इसमें पॉजिटिव मरीजों को निकटतम डाट्स सेंटर या डीटीसी में पंजीकरण करके उन्हें निकटतम केंद्र से दवाई मुहैया करवाई जाती है।
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लक्षण
1. तीन हफ्ते तक लगातार खांसी रहना
2. शाम के समय हल्का बुखार रहना
3. वजन गिरना और सांस फूलना
4. धीरे धीरे भूख कम होना
5. खांसी या बलगम के दौरान खून आना
कारण
1. धूम्रपान, नशीले पदार्थों का सेवन
2. खानपान ठीक से न होना
3. पौष्टिक आहार की कमी रहना
4. टीबी को लेकर जागरूकता का अभाव
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अनंतनाग, कुपवाड़ा और पुलवामा को स्वर्ण
जम्मू। पिछले पांच वर्षों में टीबी के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करने के लिए अनंतनाग, कुपवाड़ा और पुलवामा जिले को स्वर्ण पदक दिया जाएगा। इन जिलों में 60 से 80 प्रतिशत टीबी मामलों में कमी आई है। इसमें वर्ष 2015 की बेसलाइन के आधार पर जिले में 80 फीसदी टीबी मामलों में कमी के लिए स्वर्ण श्रेणी में रखा जाता है। स्वर्ण पदक विजेता जिलों को देश में टीबी की रोकथाम के लिए बेहतर काम करने पर उप राष्ट्रीय प्रमाणपत्र दिया जाता है। इसी तरह बारामुला जिले को टीबी के 20 प्रतिशत मामले कम होने पर कांस्य पदक दिया जाएगा। विश्व टीबी दिवस पर 24 मार्च को नई दिल्ली में हो रहे कार्यक्रम में संबंधित जिलों के उपायुक्त और अन्य विभागीय अधिकारी यह सम्मान हासिल करेंगे। जम्मू कश्मीर में पहली बार एक साथ तीन जिलों को स्वर्ण पदक मिल रहा है।
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