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आईआईआईएम जम्मू को बैंगनी क्रांति के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार
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जम्मू। सीएसआईआर के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटिग्रेटिव मेडिसिन जम्मू (आईआईआईएम) को अरोमा मिशन के तहत बैंगनी क्रांति के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। सीएसआईआर ने पूरे भारत और विशेष रूप से कश्मीर में हजारों किसानों के जीवन में बदलाव किया है। कश्मीर में लैवेंडर की एक बेहतर किस्म की शुरुआत की और आज कश्मीर में एक बैंगनी क्रांति चल रही है। सीएसआईआर ने पहली बार भारत में हींग की खेती शुरू की है और मेन्थॉल वाली पुदीने की प्रजाति के क्षेत्र में अपने प्रसिद्ध योगदान के अलावा गैर-पारंपरिक क्षेत्रों में केसर की शुरुआत की है।
रविवार को नई दिल्ली में सीएसआईआर के 80वें स्थापना दिवस समारोह में उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) को उच्चतम क्रम के विज्ञान का अनुसरण करते हुए खुद को फि र से खोजने और भविष्यवादी बनने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि सीएसआईआर प्रयोगशालाएं और संस्थान उन चुनौतियों का समाधान करें जिनके लिए दीर्घकालिक वैज्ञानिक और तकनीकी समाधान की आवश्यकता होती है। विशेष रूप से सीएसआईआर कृषि अनुसंधान पर अधिक ध्यान दे और किसानों के सामने आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए नए नवाचारों, तकनीकों और समाधानों के साथ आए। उन्होंने जलवायु परिवर्तन, औषधि में प्रतिरोधक बाधाएं, प्रदूषण, महामारी और महामारी के प्रकोप का हवाला देते हुए कहा कि इन चुनौतियों पर वैज्ञानिक समुदाय को ध्यान देने की आवश्यकता है।
केंद्रीय राज्य मंत्री डा. जितेंद्र सिंह ने सीएसआईआर और सभी विज्ञान विभागों को भारत को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए अगले दस वर्षो में आवश्यक वैज्ञानिक और प्रौद्योगिक नवाचारों का पता लगाने के लिए कहा। हमें अपनी महत्वाकांक्षा को भारत में सर्वश्रेष्ठ होने तक सीमित नहीं रखना चाहिए बल्कि दुनिया में सर्वश्रेष्ठ होना चाहिए क्योंकि भारत युवाओं के जनसांख्यिकीय लाभांश से समृद्ध है और वे सही प्रशिक्षण और प्रेरणा के साथ किसी भी चुनौती का सामना कर सकते हैं। उन्होंने सीएसआईआर से देश भर में उद्यमिता और महिला सशक्तिकरण की सफ लता की कहानियों को दोहराने का आग्रह किया। भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के विजय राघवन, सीएसआईआर के महानिदेशक शेखर सी मांडे और सीएसआईआर के मानव संसाधन विकास समूह प्रमुख अंजन रे भी उपस्थित थे।
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रविवार को नई दिल्ली में सीएसआईआर के 80वें स्थापना दिवस समारोह में उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) को उच्चतम क्रम के विज्ञान का अनुसरण करते हुए खुद को फि र से खोजने और भविष्यवादी बनने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि सीएसआईआर प्रयोगशालाएं और संस्थान उन चुनौतियों का समाधान करें जिनके लिए दीर्घकालिक वैज्ञानिक और तकनीकी समाधान की आवश्यकता होती है। विशेष रूप से सीएसआईआर कृषि अनुसंधान पर अधिक ध्यान दे और किसानों के सामने आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए नए नवाचारों, तकनीकों और समाधानों के साथ आए। उन्होंने जलवायु परिवर्तन, औषधि में प्रतिरोधक बाधाएं, प्रदूषण, महामारी और महामारी के प्रकोप का हवाला देते हुए कहा कि इन चुनौतियों पर वैज्ञानिक समुदाय को ध्यान देने की आवश्यकता है।
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केंद्रीय राज्य मंत्री डा. जितेंद्र सिंह ने सीएसआईआर और सभी विज्ञान विभागों को भारत को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए अगले दस वर्षो में आवश्यक वैज्ञानिक और प्रौद्योगिक नवाचारों का पता लगाने के लिए कहा। हमें अपनी महत्वाकांक्षा को भारत में सर्वश्रेष्ठ होने तक सीमित नहीं रखना चाहिए बल्कि दुनिया में सर्वश्रेष्ठ होना चाहिए क्योंकि भारत युवाओं के जनसांख्यिकीय लाभांश से समृद्ध है और वे सही प्रशिक्षण और प्रेरणा के साथ किसी भी चुनौती का सामना कर सकते हैं। उन्होंने सीएसआईआर से देश भर में उद्यमिता और महिला सशक्तिकरण की सफ लता की कहानियों को दोहराने का आग्रह किया। भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के विजय राघवन, सीएसआईआर के महानिदेशक शेखर सी मांडे और सीएसआईआर के मानव संसाधन विकास समूह प्रमुख अंजन रे भी उपस्थित थे।
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