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जम्मू-कश्मीर: केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण ने कहा- कुछ अफसरों के लिए नियम तोड़ रही सरकार

Tue, 22 Jun 2021 01:33 AM IST
जेएनएफ, जम्मू Published by: जम्मू और कश्मीर ब्यूरो Updated Tue, 22 Jun 2021 01:33 AM IST
सार

केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण ने मुख्य सचिव को उन सभी मामलों को ध्यान में रखने का निर्देश दिया, जिनमें अन्य संगठनों में केएएस अधिकारियों की पिछली सेवा को जोड़ा गया था। तीन महीने के भीतर यह प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा गया है।

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Central Administrative Tribunal said- Jammu and Kashmir government breaking rules for some officers
केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (सीएटी) ने जम्मू-कश्मीर के उच्च प्रशासन की खिंचाई करते हुए कहा है कि चुनिंदा अधिकारियों के लिए नियम तोड़-मरोड़ कर आदेश जारी किए जाते हैं। इन अफसरों को लाभ दिया जाता है जबकि इसी श्रेणी के अन्य मामलों में भेदभाव किया जाता है। मुख्य सचिव को निर्देश देते हुए कैट ने कहा कि इस तरह के तमाम मामलाें को देखें और नियमों के अनुसार व्यवस्थाएं बनाएं। किसी को अनधिकृत लाभ मिला है तो उसे वापस लें। यदि भेदभाव हुआ है तो उसे फौरन दुरुस्त करें। साथ ही सरकारी आदेशों में एकरूपता और स्पष्टता भी लाई जाए।

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कैट ने सोमवार को जोगिंदर भगत की एक याचिका पर सुनवाई की। याचिकाकर्ता ने कहा कि कि वह रावी-तवी कमांड एरिया फार्मर सर्विस कोऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड में 1976 से 1984 तक बतौर अकाउंटेंट थे। इसके बाद उन्होंने केएएस की 1984 में परीक्षा पास की और 31 मार्च 2010 को रिटायर हो गए। रिटायर होने से पूर्व प्रशासन से अपील की कि अकाउंटेंट पद का सेवाकाल उसकी सर्विस बुक में शामिल किया जाए। सरकार ने इसे खारिज कर दिया।
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इस आदेश को जोगिंदर ने चुनौती दी और कहा कि ठीक इसी तरह के मामले में कुलदीप राज, राम पाल गुप्ता और दो अन्य को लाभ दिया गया, लेकिन उसे मना कर दिया गया। सीएटी ने कहा कि सरकार ने इस मामले में भेदभाव किया है। एक केएएस स्तर के अफसर के साथ सरकार का रवैया असंतुष्ट है।
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नशा तस्करों की जमानत अर्जी खारिज
श्रीनगर के द्वितीय अतिरिक्त जज मोहम्मद अशरफ ने नशा तस्करी के दो आरोपियों की जमानत अर्जी को खरिज कर दिया। अदनान नबी और मोहम्मद शरीफ पर तस्करी का केस चल रहा है। जज ने कहा कि नशा समाज को खोखला कर रहा है। लिहाजा ऐसे आरोपियों को छोड़ने से इसमें संलिप्त लोगों को बढ़ावा मिलता है। इसलिए जमानत अर्जी नामंजूर की जाती है।

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