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स्कूल-कॉलेजों में स्थापित होंगे हार्वेस्टिंग प्लांट, प्राचीन जल स्त्रोतों का संरक्षण होगा
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जम्मू। प्रदेश में आगामी चार वर्षों में भूजल संकट गहरा सकता है। इससे निपटने के लिए पांच बिदुंओ पर काम किया जाएगा। इनमें घरों और स्कूल-कॉलेजों में हार्वेस्टिंग प्लांट स्थापित किए जाएंगे ताकि बारिश के पानी को सहेजा जा सके। इसके अलावा पेड़ लगाने होंगे, प्राचीन जल स्त्रोतों के संरक्षण के साथ बंद कुएं खोलने होंगे। व्यर्थ बह रहे पानी को स्टोर करना होगा। यह बातें कन्वेशन सेंटर में जलशक्ति अभियान 2021 के शुभारंभ पर उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कही।
उन्होंने कहा कि रेन हार्वेस्टिंग सिस्टम के माध्यम से बारिश के पानी को स्टोर किया जाएगा। इससे जमीन में नमी बनी रहेगी। मौजूदा समय में सांबा, जम्मू और कठुआ इलाकों में भूजल का स्तर गिरा है। इसी तरह प्रदेश के अन्य जिलों में भी हाल ऐसा ही है। प्रदेश में लगे पंप स्टेशनों में भी भूजल की कमी का कारण पानी का स्तर गिरना है। पानी के संरक्षण के लिए ग्राम स्तर पर समितियां गठित की जाएंगी। ये समितियां भी पानी के संरक्षण पर अधिकारियों को राय देंगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में दिसंबर 2022 तक हर घर में नल सुविधा मिल जाएगी। इस पर काम तेज गति से चल रहा है। उप-मेयर पूर्णिमा शर्मा ने भी लोगों को पानी का सदुपयोग करने का आह्वान किया। इस मौके पर मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रह्मण्यम, डिवकॉम राहुल लंगर, डीसी अंशुल गर्ग और अन्य मौजूद रहे।
दस पेयजल और सिंचाई परियोजनाओं का ई-शुभारंभ और 10 का शिलान्यास
सिंचाई की सुविधा मिलेगी, पेयजल किल्लत का समाधान होगा
जम्मू। उपराज्यपाल ने कन्वेंशन सेंटर में दस पेयजल और सिंचाई परियोजनाओं का ई-शुभारंभ किया। इन पर 48.54 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। वहीं, दस परियोजनाओं का शिलान्यास भी किया। इन पर 68.95 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसमें बाढ़ नियंत्रण प्रोजेक्ट भी शामिल हैं। इन परियोजनाओं का काम पूरा होने के बाद लोगों को जहां सिंचाई की सुविधा मिलेगी। वहीं, पेयजल किल्लत का समाधान भी होगा।
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ये परियोजनाएं हुईं शुरू
1. राजोरी में चिकला सिद्दीमेंग कुलह
2. वाटर सप्लाई स्कीम हेवन कालोनी बांदीपोरा
3. उधमपुर में गोरड़ी जगीर पेयजल योजना
4. मीर मोहल्ला बोनपोरा बडगाम फिल्टरेशन प्लांट
5. कठुआ बसंतपुर पंपिंग स्टेशन
6. वाटर सप्लाई स्कीम गखरन गुंथल पुंछ
7. कंजी कूहल निर्माण कार्य बडगाम
8. कुलीगाम कूहल कुपवाड़ा
9. जिंदर कुहल बांदीपोरा
10. खुरहामा कूलह कुपवाड़ा
इनका हुआ शिलान्यास
1. ग्रिमटो कनाल कुलगाम का आधुनिकीकरण
2. शलपथरी देविबल मंदिर खानपोरा में फ्लड प्रोटेक्शन वर्क
3. वाटर स्पलाई स्कीम समोथा सांबा
4. वाटर लिफ्टिंग परियोजना सरगल सांबा
5. वाटर स्पलाई स्कीम बरख
6. सूल परियोजना रियासी
7. श्रीनगर में फिल्टरेशन टैंक का काम
8. नीरू नाला में सुरक्षा दीवार
9. नाज और भीनी रिवर परियोजना
10. सोरा से सैदपोरा श्रीनगर परियोजना
भू जल बढ़ाने के लिए पुरानी तकनीक का होगा प्रयोग
जम्मू। उपराज्यपाल ने कहा कि भूजल स्तर बढ़ाने के लिए पुरानी तकनीक का प्रयोग किया जाएगा। प्राचीन काल में नल और पानी के स्रोत नहीं थे। इस दौरान भी लोग बारिश के पानी पर ही निर्भर थे। इस दौरान लोग छाया के लिए ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाते थे। इस कारण भी भूजल स्तर बराबर बना रहता था। वहीं, पानी को स्टोर करने के लिए भी गहरे कुएं खोदे जाते थे। यहां भी पानी एकत्रित कर इसे प्रयोग में लाया जाता था।
उपराज्यपाल ने कहा कि मौजूदा समय में अंधाधुंध पेड़ कट रहे हैं। इस कारण भी समय पर बारिश न होने से पानी की कमी है। गर्मी के मौसम में पानी की डिमांड बढ़ती है मगर पानी जरूरत के हिसाब से नहीं मिल पाता है। इस कारण सिंचाई के लिए भी पानी नहीं मिल पाता है। भूजल की समस्या के हल के लिए अधिकारी भी अपने स्तर पर योजनाएं बनाएंगे। पर्यावरण संतुलन बनाने के लिए प्रदेशभर में हर व्यक्ति को बरसात में पौधा लगाना चाहिए।
कंडी इलाकों में बारिश न होने से कम हो रही पैदावार
भूजल स्तर गिरने के कारण प्रदेश के कंडी इलाकों में आज भी बारिश के पानी पर ही फसल की बिजाई होती है। बारिश समय पर हो जाए तो बिजाई हो जाती है, नहीं तो रुक जाती है। इससे पैदावार में भी गिरावट आती है। समतल इलाकों में भू जल गिरने के कारण पंपिंग स्टेशनों का जल स्तर गिर जाता है।
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उन्होंने कहा कि रेन हार्वेस्टिंग सिस्टम के माध्यम से बारिश के पानी को स्टोर किया जाएगा। इससे जमीन में नमी बनी रहेगी। मौजूदा समय में सांबा, जम्मू और कठुआ इलाकों में भूजल का स्तर गिरा है। इसी तरह प्रदेश के अन्य जिलों में भी हाल ऐसा ही है। प्रदेश में लगे पंप स्टेशनों में भी भूजल की कमी का कारण पानी का स्तर गिरना है। पानी के संरक्षण के लिए ग्राम स्तर पर समितियां गठित की जाएंगी। ये समितियां भी पानी के संरक्षण पर अधिकारियों को राय देंगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में दिसंबर 2022 तक हर घर में नल सुविधा मिल जाएगी। इस पर काम तेज गति से चल रहा है। उप-मेयर पूर्णिमा शर्मा ने भी लोगों को पानी का सदुपयोग करने का आह्वान किया। इस मौके पर मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रह्मण्यम, डिवकॉम राहुल लंगर, डीसी अंशुल गर्ग और अन्य मौजूद रहे।
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दस पेयजल और सिंचाई परियोजनाओं का ई-शुभारंभ और 10 का शिलान्यास
सिंचाई की सुविधा मिलेगी, पेयजल किल्लत का समाधान होगा
जम्मू। उपराज्यपाल ने कन्वेंशन सेंटर में दस पेयजल और सिंचाई परियोजनाओं का ई-शुभारंभ किया। इन पर 48.54 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। वहीं, दस परियोजनाओं का शिलान्यास भी किया। इन पर 68.95 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसमें बाढ़ नियंत्रण प्रोजेक्ट भी शामिल हैं। इन परियोजनाओं का काम पूरा होने के बाद लोगों को जहां सिंचाई की सुविधा मिलेगी। वहीं, पेयजल किल्लत का समाधान भी होगा।
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ये परियोजनाएं हुईं शुरू
1. राजोरी में चिकला सिद्दीमेंग कुलह
2. वाटर सप्लाई स्कीम हेवन कालोनी बांदीपोरा
3. उधमपुर में गोरड़ी जगीर पेयजल योजना
4. मीर मोहल्ला बोनपोरा बडगाम फिल्टरेशन प्लांट
5. कठुआ बसंतपुर पंपिंग स्टेशन
6. वाटर सप्लाई स्कीम गखरन गुंथल पुंछ
7. कंजी कूहल निर्माण कार्य बडगाम
8. कुलीगाम कूहल कुपवाड़ा
9. जिंदर कुहल बांदीपोरा
10. खुरहामा कूलह कुपवाड़ा
इनका हुआ शिलान्यास
1. ग्रिमटो कनाल कुलगाम का आधुनिकीकरण
2. शलपथरी देविबल मंदिर खानपोरा में फ्लड प्रोटेक्शन वर्क
3. वाटर स्पलाई स्कीम समोथा सांबा
4. वाटर लिफ्टिंग परियोजना सरगल सांबा
5. वाटर स्पलाई स्कीम बरख
6. सूल परियोजना रियासी
7. श्रीनगर में फिल्टरेशन टैंक का काम
8. नीरू नाला में सुरक्षा दीवार
9. नाज और भीनी रिवर परियोजना
10. सोरा से सैदपोरा श्रीनगर परियोजना
भू जल बढ़ाने के लिए पुरानी तकनीक का होगा प्रयोग
जम्मू। उपराज्यपाल ने कहा कि भूजल स्तर बढ़ाने के लिए पुरानी तकनीक का प्रयोग किया जाएगा। प्राचीन काल में नल और पानी के स्रोत नहीं थे। इस दौरान भी लोग बारिश के पानी पर ही निर्भर थे। इस दौरान लोग छाया के लिए ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाते थे। इस कारण भी भूजल स्तर बराबर बना रहता था। वहीं, पानी को स्टोर करने के लिए भी गहरे कुएं खोदे जाते थे। यहां भी पानी एकत्रित कर इसे प्रयोग में लाया जाता था।
उपराज्यपाल ने कहा कि मौजूदा समय में अंधाधुंध पेड़ कट रहे हैं। इस कारण भी समय पर बारिश न होने से पानी की कमी है। गर्मी के मौसम में पानी की डिमांड बढ़ती है मगर पानी जरूरत के हिसाब से नहीं मिल पाता है। इस कारण सिंचाई के लिए भी पानी नहीं मिल पाता है। भूजल की समस्या के हल के लिए अधिकारी भी अपने स्तर पर योजनाएं बनाएंगे। पर्यावरण संतुलन बनाने के लिए प्रदेशभर में हर व्यक्ति को बरसात में पौधा लगाना चाहिए।
कंडी इलाकों में बारिश न होने से कम हो रही पैदावार
भूजल स्तर गिरने के कारण प्रदेश के कंडी इलाकों में आज भी बारिश के पानी पर ही फसल की बिजाई होती है। बारिश समय पर हो जाए तो बिजाई हो जाती है, नहीं तो रुक जाती है। इससे पैदावार में भी गिरावट आती है। समतल इलाकों में भू जल गिरने के कारण पंपिंग स्टेशनों का जल स्तर गिर जाता है।