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Jammu News: हाईकोर्ट ने आरक्षण में संशोधन को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर मांगा जवाब
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट ने 2005 के संशोधित आरक्षण नियमों की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर छह मार्च तक प्रदेश प्रशासन को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि 2005 के संशोधित आरक्षण नियमों के तहत की गई नियुक्तियां परिणाम के अधीन होंगी। न्यायमूर्ति राजनेश ओसवाल और न्यायमूर्ति मोहम्मद यूसुफ वानी की खंडपीठ ने कुछ याचिकाओं को मंजूरी दी। इनमें एक याचिका पहाड़ी समूह से आई थी, जिसने पक्षकारों के रूप में जुड़ने की अनुमति मांगी थी।
ये याचिकाएं जहीर अहमद भट, इश्रत नबी, इशफाक अहमद डार, शाहिद बशीर वानी और अमीर हमीद लोन की ओर से दायर की गई हैं। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया है कि 2005 के आरक्षण नियमों में किए गए संशोधनों के कारण प्रदेश सरकार की भर्ती पदों और शैक्षिक संस्थानों में खुले मेरिट के लिए सीटों का प्रतिशत 57 से घटकर 33 फीसदी हो गया है। आरबीए के लिए यह 20 से घटकर 10 फीसदी हो गया है। अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण 10 से बढ़कर 20 फीसदी कर दिया गया है। आरोप लगाया कि संशोधन में नए श्रेणियां भी जोड़ी गई हैं, जैसे रक्षा कर्मियों के बच्चों के लिए तीन फीसदी आरक्षण, पुलिस कर्मियों के बच्चों के लिए एक फीसदी और खेल प्रदर्शन में उत्कृष्टता प्राप्त उम्मीदवारों के लिए दो फीसदी आरक्षण दिया गया है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से यह निर्देश देने की भी मांग की है कि आरक्षण नियमों 2005 (संशोधित नहीं) के अनुरूप नई भर्ती अधिसूचनाएं जारी की जाएं। एक आयोग गठित करने की मांग की है।
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ये याचिकाएं जहीर अहमद भट, इश्रत नबी, इशफाक अहमद डार, शाहिद बशीर वानी और अमीर हमीद लोन की ओर से दायर की गई हैं। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया है कि 2005 के आरक्षण नियमों में किए गए संशोधनों के कारण प्रदेश सरकार की भर्ती पदों और शैक्षिक संस्थानों में खुले मेरिट के लिए सीटों का प्रतिशत 57 से घटकर 33 फीसदी हो गया है। आरबीए के लिए यह 20 से घटकर 10 फीसदी हो गया है। अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण 10 से बढ़कर 20 फीसदी कर दिया गया है। आरोप लगाया कि संशोधन में नए श्रेणियां भी जोड़ी गई हैं, जैसे रक्षा कर्मियों के बच्चों के लिए तीन फीसदी आरक्षण, पुलिस कर्मियों के बच्चों के लिए एक फीसदी और खेल प्रदर्शन में उत्कृष्टता प्राप्त उम्मीदवारों के लिए दो फीसदी आरक्षण दिया गया है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से यह निर्देश देने की भी मांग की है कि आरक्षण नियमों 2005 (संशोधित नहीं) के अनुरूप नई भर्ती अधिसूचनाएं जारी की जाएं। एक आयोग गठित करने की मांग की है।
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