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जम्मू कश्मीर: कई बदलाव लेकर आया लोकसभा चुनाव, शून्य वोटिंग न बहिष्कार, आतंकी परिवारों ने भी लिया भाग

Wed, 29 May 2024 05:16 PM IST
kumar गुलशन कुमार डॉ. बृजेश कुमार सिंह, जम्मू
डॉ. बृजेश कुमार सिंह, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Wed, 29 May 2024 05:16 PM IST
सार

सबसे अधिक बदलाव अनंतनाग-राजोरी सीट पर देखने को मिला। यहां तीन दशक बाद प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी के सदस्यों को मुख्यधारा में शामिल करते हुए मतदान करते देखा गया।

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Jammu Kashmir : Lok Sabha election brought many changes no boycott call terrorist families also participate
जम्मू कश्मीर में लोकसभा चुनाव 2024 - फोटो : एजेंसी

विस्तार

2024 का लोकसभा चुनाव जम्मू-कश्मीर के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा। अनुच्छेद 370 हटने के बाद पहली बार हुए चुनाव में कई बदलाव सामने आए। मतदान प्रतिशत ने रिकॉर्ड बनाया तो आम तौर पर चुनावी प्रक्रिया से दूर रहने वाले आतंकी परिवारों, अलगाववादियों और प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी के सदस्यों ने भी मतदान में हिस्सा लिया। शांतिपूर्ण चुनाव हुए। कहीं भी शून्य वोटिंग नहीं हुई। इतना ही नहीं आतंकी परिवार के सदस्य ने चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा भी लिया।

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सबसे अधिक बदलाव अनंतनाग-राजोरी सीट पर देखने को मिला। यहां तीन दशक बाद प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी के सदस्यों को मुख्यधारा में शामिल करते हुए मतदान करते देखा गया। कुलगाम में जमात से जुड़े फलाह-ए-आम ट्रस्ट के सहायक निदेशक सहायक अहमद रेशी ने मतदान किया। अलगाववादी मुख्तार वाजा, आतंकी जुनैद रेशी के पिता मुश्ताक अहमद रेशी ने भी मत डालकर लोकतंत्र के प्रति आस्था जताई। दक्षिण कश्मीर के जिलों में अलगाववादी विचारधारा के अधिक पोषक रहे हैं।

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बारामुला से तो अलगाववादी नईम खान के भाई नजीर खान ने मुख्यधारा में शामिल होकर चुनाव लड़ा। बारामुला लोकसभा सीट पर लश्कर ए ताइबा के सक्रिय आतंकी उमर के भाई रउफ अहमद और टीआरएफ के कमांडर बिलाल के परिवार ने मतदान किया। उमर के भाई ने अपने भाई से मुख्यधारा में लौटने की अपील भी की थी। श्रीनगर सीट पर आने वाले जिले पुलवामा में जमात ए इस्लामी के अमीर गुलाम कादिर ने मतदान किया। उन्होंने दावा किया कि जमात से जुड़े ज्यादातर सदस्यों ने मतदान का इस्तेमाल किया है। यह उनका हक है।

कश्मीर की सभी लोकसभा सीटों पर इस बार न अलगाववाद का असर दिखा और न ही आतंकी धमकियों का। बहिष्कार का नारा लगाने वाले खुद मतदान केंद्रों तक पहुंचे। हर ओर लोकतंत्र का जश्न दिखा। किसी के भी चेहरे पर खौफ नहीं दिखा। पाकिस्तान पोषित अलगाववादियों ने भी खुद को मतदान से जोड़ा। सभी चरणों में मतदान करने के लिए लोगों में जबर्दस्त उत्साह देखा गया। जानकारों का कहना है कि कश्मीर में मतदान ने पिछले कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। श्रीनगर, बारामुला और अनंतनाग में मतदान का प्रतिशत बढ़ना यह दर्शाता है कि घाटी के माहौल में बदलाव आया है। अब लोगों की लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति भागीदारी बढ़ी है।

मतदान बढ़ना लोकतंत्र के लिए सुखद

घाटी की तीन सीटों पर 50.86 फीसदी मत पड़े हैं। यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए सुखद है। चुनाव में सभी वर्ग ने बढ़ चढ़कर हिस्सेदारी की। कश्मीर की तीनों सीटों पर रिकॉर्ड मतदान यह दर्शाता है कि लोगों की लोकतंत्र में आस्था बढ़ी है। - पीके पोले, मुख्य निर्वाचन अधिकारी।

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