Kathua Terror Attack: घायल सैनिकों ने डट कर किया मुकाबला, 6 हजार राउंड किए फायर आतंकी भागने को हुए मजबूर
पहाड़ी क्षेत्र बदनोता में घायल सेना के जवानों ने आतंकियों का डटकर मुकाबला किया था। घायल जवानों को बचाने के लिए सुरक्षा बलों ने आतंकियों पर करीब छह हजार राउंड फायर किए। इससे आतंकी भागने पर मजबूर हो गए।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
जिला कठुआ के पहाड़ी क्षेत्र बदनोता में घायल सेना के जवानों ने आतंकियों का डटकर मुकाबला किया था। घायल जवानों को बचाने के लिए सुरक्षा बलों ने आतंकियों पर करीब छह हजार राउंड फायर किए। इससे आतंकी भागने पर मजबूर हो गए।
एक अधिकारी ने बताया कि उनकी टीम घटनास्थल पर मौजूद साक्ष्यों, खून से सने हेलमेट, गोलियों के खोखे तथा टूटी विंडस्क्रीन और पंचर टायर वाले वाहनों की जांच कर रही है। अभी तक की पड़ताल से पता चलता है कि आतंकवादी तीन-तीन व्यक्ति के समूह में थे। उन्होंने दो अलग-अलग स्थानों से हमले को अंजाम दिया।
भारतीय सेना ने अपने पांच साथियों के बलिदान का बदला लेने के लिए जिला कठुआ के बिलावर के बदनोता में तलाशी अभियान तेजी से जारी है। गुरुवार को जिला पुलिस लाइन कठुआ में जम्मू कश्मीर डीजीपी आरआर स्वैन, पंजाब के डीजीपी सहित सेना और खुफिया एजेंसियों के आला अधिकारी बैठक करने के लिए पहुंचे हैं।
सूत्रों का कहना है कि एजेंसियां आपस में समन्वय मजबूत करने के लिए यह बैठक कर रही हैं। आतंकी हमलों को रोकने और अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा पर आज कठुआ में मंथन होगा। इस बैठक के बाद एक रिपोर्ट गृह और रक्षा मंत्रालय को भेजी जाएगी।
इससे पहले बुधवार को पश्चिमी कमान के लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार खटयार भी मछेड़ी पहुंचे और घटना स्थल व अभियान का जायजा लिया। सुरक्षा बलों ने आतंकियों के सफाये के लिए बुधवार को तीसरे दिन भी बड़े स्तर पर तलाशी अभियान चलाया। खराब मौसम और भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद सुरक्षाबल जुटे रहे।
वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार कठुआ के साथ ही उधमपुर और डोडा जिले की सीमा से लगते जंगलों को भी खंगाला जा रहा है। सेना के वरिष्ठ अधिकारी लगातार निगरानी बनाए हुए हैं। सूत्रों के अनुसार बुधवार को उस ट्रैक्टर-ट्रॉली चालक से भी पूछताछ की गई, जो हमले के वक्त सैन्य काफिले के ठीक आगे चल रहा था।
बता दें कि बदनोता में आतंकियों की ओर से ग्रेनेड से किए गए हमले के बाद अंधाधुंध गोलियां बरसाई गई थीं जिसमें सेना के पांच जवान शहीद हो गए थे। इसके साथ ही डोडा में भी मुठभेड़ के बाद घने जंगलों को दूसरे दिन भी खंगाला गया।