इंटरनेट के झरोखे से दिखेगा जम्मू-कश्मीर का इतिहास, डिजिटलीकरण का काम पूरा, कई गोपनीय फाइल भी हैं
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जम्मू-कश्मीर के प्राचीन काल के ऐतिहासिक दस्तावेजों की जानकारी जल्द ही अब एक क्लिक पर मिलेगी। राज्य पुरातत्व, संग्रहालय विभाग ने राज्य इतिहास से जुड़े 70 लाख पेज के दस्तावेजों का डिजिटलीकरण कर लिया है। वर्ष 1724 से 1985 के बीच के 70 लाख के करीब पेज में अफगान, मुगल, सिख और डोगरा शासन के समय का ऐतिहासिक रिकॉर्ड है। वर्तमान में इस रिकॉर्ड का वर्गीकरण किया जा रहा है, जिसके बाद डाटा को पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। इसके बाद डाटा को विभाग की वेबसाइट पर वेब पोर्टल से एक्सेस किया जाएगा।
जम्मू-कश्मीर के पास प्राचीन काल से जुडे़ ऐतिहासिक दस्तावेज मौजूद हैं। इसमें राजा-महाराजा के शासन काल के समय के दस्तावेजों में उस समय भारत व पाकिस्तान के सरकार के साथ किए करार और डोगरा शासन काल के समय हुए ऐतिहासिक फैसलों की जानकारी शामिल है।
राज्य पुरातत्व, संग्रहालय विभाग ने इस रिकॉर्ड को डिजिटल फार्मेट में तबदील किया है। 1742 से 1985 के समय के बीच के दस्तावेजों कई गोपनीय फाइलें हैं, जिनको डिजिटल फॉर्मेट में बदला गया है, अब विभाग इन फाइलों का क्लासिफिकेशन कर रहा है।
कई गोपनीय फाइलें है, फाइलों में है यह रिकॉर्ड
क्लासिफिकेशन में इन गोपनीय फाइलों की छंटनी की जा रही है। इसके बाद अन्य दस्तावेजों को सर्वर में अपलोड किया जाएगा। इसके बाद 1985 से आगे के दस्तावेजों को डिजिटलीकरण किया जाएगा। ऐतिहासिक दस्तावेजों की जानकारी ऑनलाइन मिलने से रिसर्च स्कालर और इतिहासकार इस क्लिक पर डाटा को एक्सेस कर पाएंगे। इन दस्तावेजों को फेज वाइज डिजिटल फार्मेट में तबदील किया गया था। दस्तावेजों के क्लासिफिकेशन में छह माह का समय लेगा।
हमने 70 लाख के करीब दस्तावेजों को डिजिटल फॉर्मेट में तबदील किया है। इन दस्तावेज में कई गोपनीय फाइलें है जिनकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती है। डाटा का क्लासिफिकेशन किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में छह माह के करीब का समय लेगा। इसके बाद डाटा को सर्वर के माध्यम से ऑनलाइन किया जाएगा।
- तरसेंग ताशी, डिप्टी निदेशक पुरातत्व, संग्रहालय विभाग, जम्मू
कई गोपनीय फाइलें है
विभाग द्वारा किए फाइलों के डिजिटलीकरण में कई फाइलें गोपनीय हैं। 1742 से 1985 तक के दस्तावेजों में डोगरा शासकों द्वारा भारत सरकार व पाकिस्तान के साथ किए करार हैं। फाइलों के डिजिटलीकरण के दौरान सभी फाइलों को डिजिटल फॉर्मेट में बदला गया था, अब इन फाइलों की छंटनी की जा रही।
फाइलों में यह रिकॉर्ड है
इन फाइलों में राज्य के इतिहास, भूगोल के साथ राजनीतिक, आर्थिक, गृह, रक्षा, कृषि, आर्थिक, कानून, बिजली विभाग के रिकॉर्ड हैं। फाइलों में 1985 तक की लोक संस्कृति और चित्रकारों के संबंध में भी जानकारी है।
अब क्लासिफिकेशन के हिसाब से होगा डिजिटलीकरण
डिजिटलीकरण के लिए बचे 30 प्रतिशत दस्तावेज को अब क्लासिफिकेशन के हिसाब से डिजिटल फॉर्मेट में बदला जाएगा। इसमें देखा जाएगा कि गोपनीय फाइलों की जानकारी को ऑनलाइन अपलोड नहीं किया जाएगा। बिक्रम चौक में इसमें 28 सौ बसता और 42 हजार फाइलें हैं जिनका डिजिटलीकरण होना है।