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जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट: दुष्कर्म पीड़ित नाबालिग के गर्भपात पर फैसला लें, प्रदेश सरकार को नोटिस

Thu, 23 Dec 2021 02:56 AM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर Published by: विमल शर्मा Updated Thu, 23 Dec 2021 02:56 AM IST
सार

हाईकोर्ट ने 14 वर्षीय दुष्कर्म पीड़ित गर्भवती के पिता की याचिका पर लिया संज्ञान। सरकार से चार सप्ताह में जबाव देने के साथ डॉक्टरों के बोर्ड से राय लेकर निर्णय लेने को कहा। 

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Jammu Kashmir High Court should decide on abortion of rape victim minor, notice to state government
highcourt srinagar - फोटो : फाइल

विस्तार

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने दुष्कर्म पीड़ित नाबालिग गर्भवती के गर्भपात के लिए नीति बनाने संबंधी प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर चार हफ्तों में जवाब मांगा है। कोर्ट ने डॉक्टरों का बोर्ड बनाकर दुष्कर्म पीड़ित नाबालिग का गर्भपात करवाने को लेकर फैसला लेने को कहा है। इस मामले में पीड़ित 14 वर्षीय है, जिसके साथ दुष्कर्म किया गया था।

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दुष्कर्म का पता चलने तक नाबालिग गर्भवती हो चुकी थी। पीड़ित के पिता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 12 माह का गर्भ गिराने की अनुमति मांगी। साथ ही नाबालिग से जुड़े मामलों में गर्भपात और जन्मे बच्चों की देखभाल को लेकर सरकार को नीति बनाने के लिए निर्देश जारी करने की मांग की।
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मामले की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश संजीव कुमार ने डॉक्टरों का बोर्ड गठित कर तत्काल नाबालिग की चिकित्सा जांच के आदेश दिए। न्यायाधीश ने कहा कि डॉक्टरों की राय लेने के बाद संबंधित अधिकारी अनचाहे गर्भ को गिराने संबंधी फैसला लें। इस मामले में पुलिस ने 23 नवंबर को एफआईआर दर्ज की थी।
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आईपीसी की धारा 376 और पॉक्सो के तहत मामला दर्ज कर पुलिस जांच कर रही है। न्यायाधीश ने कहा कि यह एक पिता की नाबालिग बेटी की मामला है, जिसका मामला मुख्य चिकित्सा अधिकारी को रेफर तो किया गया लेकिन न तो चिकित्सा जांच हुई और ना ही गर्भपात का फैसला लिया गया। 


नीति बनाने, विशेषज्ञ तैनात करने की है मांग
याचिका में कोर्ट से मांग की गई है कि सरकार को नाबालिग गर्भवती से जुड़े मामलों को लेकर नीति बनाने के निर्देश दिए जाने चाहिए। वहीं सभी जिला अस्पतालों में एक ऐसा विशेषज्ञ तैनात किया जाए जो मुख्य रूप से इस तरह के मामलों को देखे, ताकि पीड़ितों को राहत के लिए विलंब का सामना न करना पड़े। याचिका में ऐसे मामलों को लेकर पीड़ितों के लिए मुआवजा निर्धारित करने की भी मांग की गई है।

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