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J&K High Court: सीधी भर्ती के पद विशेष समूह के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित नहीं हो सकते
Fri, 05 Jan 2024 03:38 PM IST
kumar गुलशन कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Fri, 05 Jan 2024 03:38 PM IST
सार
खंडपीठ ने कहा कि सीधी भर्ती के पद किसी विशेष समूह के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित नहीं रखे जा सकते हैं। ये उन सभी लोगों के लिए खुली रहेगी जो पद विज्ञापित होने पर पात्र हों।
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न्यायालय
- फोटो : file photo
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विस्तार
भर्ती प्रक्रिया शुरू या पूरी होने तक किसी भी व्यक्ति को विशेष विज्ञापित पद के लिए विचार किए जाने का अधिकार नहीं है। ये टिप्पणी जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एन कोटिश्वर सिंह और न्यायमूर्ति राजेश सेखरी की खंडपीठ ने नायब तहसीलदार के विज्ञापित पद के एक मामले की सुनवाई करते हुए की।
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खंडपीठ ने माना कि सीधी भर्ती के पद किसी विशेष समूह के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित नहीं रखे जा सकते हैं। ये उन सभी लोगों के लिए खुली रहेगी जो पद विज्ञापित होने पर पात्र हों। इस प्रकार वे सभी उम्मीदवार जिन्होंने 2008 में जारी विज्ञापन के तहत आवेदन किया था और नायब तहसीलदार के पदों के लिए पात्र थे, वे 2002 और 2005 में पहले विज्ञापित सभी पदों के लिए विचार किए जाने के हकदार हैं।
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खंडपीठ ने आगे पाया कि वर्तमान मामले में प्रासंगिक सेवा नियमों में ऐसा कोई उल्लेख नहीं है कि सीधी भर्ती कोटा के तहत किसी विशेष वर्ष में होने वाली भर्ती को उस अवधि के योग्य उम्मीदवारों में से भरा जाना है। खंडपीठ का मानना है कि 2002, 2005 और 2008 में जारी विज्ञापनों के संदर्भ में तैयार की गई वरिष्ठता सूची कानून के तहत अस्वीकार्य और जम्मू-कश्मीर सिविल सेवा के नियम 24 के प्रावधानों का भी उल्लंघन है।
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खंडपीठ ने कहा कि कोर्ट में यह प्रस्तुत किया गया है कि इस बीच कई नायब तहसीलदार को तहसीलदार के पद पर पदोन्नत किया है। वर्तमान मामले में केवल चार अपीलकर्ता हैं। यदि इन चार में से कोई भी उन पदोन्नत तहसीलदारों से वरिष्ठ पाया जाता है तो एक समीक्षा विभागीय पदोन्नति समिति अपीलकर्ताओं को उपयुक्त पाने पर तहसीलदार के पद पर पदोन्नत करे।
यहां ये स्पष्ट किया कि अगर किसी को अपीलकर्ताओं से पहले तहसीलदार के रूप में पदोन्नत किया गया हो, उन्हें पदावनत न कर अपीलकर्ताओं के नीचे तहसीलदार के रूप में बने रहने की अनुमति दी जाएगी। खंडपीठ ने आदेश दिया कि उपरोक्त अभ्यास सुनवाई के दिन से एक महीने की अवधि के भीतर पूरा किया जाए।