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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Jammu Kashmir High Court: 50 thousand fine on the petitioner side in wrong question case

जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट: परीक्षा में गलत प्रश्न मामले में याची पक्ष पर 50 हजार जुर्माना, अक्तूबर 2021 में हुई संयुक्त थी प्रतियोगी परीक्षा 

Tue, 05 Apr 2022 01:44 AM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: विमल शर्मा Updated Tue, 05 Apr 2022 01:44 AM IST
सार

कोर्ट ने कहा कि इस मामले में विशेषज्ञों की राय सही है। अदालत उसके विपरीत नहीं जा सकती। संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा (प्रारंभिक) 24 अक्तूबर 2021 को हुई थी।

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Jammu Kashmir High Court: 50 thousand fine on the petitioner side in wrong question case
highcourt srinagar - फोटो : फाइल

विस्तार

जम्मू-कश्मीर लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा (जेकेएएस) में गलत प्रश्न पूछे जाने के मामले में याचिका दायर करने वाले अभ्यर्थियों पर 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। हाईकोर्ट में न्यायाधीश धीरज ठाकुर ने जुर्माना लगाने के साथ कहा कि याची पक्ष ने दावा किया कि वे इस मामले में आयोग के समक्ष मामला उठा चुके हैं, जबकि आयोग के पास जाने वाले अभ्यर्थी याची नहीं बल्कि कोई और हैं।

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कोर्ट ने कहा कि इस मामले में विशेषज्ञों की राय सही है। अदालत उसके विपरीत नहीं जा सकती। संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा (प्रारंभिक) 24 अक्तूबर 2021 को हुई थी। दो अलग-अलग याचिकाओं के माध्यम से कोर्ट में कहा गया कि परीक्षा में गलत प्रश्न पूछे गए थे, जिसके उन्हें उसी अनुपात में अतिरिक्त अंक दिए जाने चाहिएं।
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कोर्ट ने पाया कि इस तरह के मामले में सबसे पहले याचिकाकर्ताओं को आयोग के समक्ष अपनी बात रखनी चाहिए थी। इसके लिए लोक सेवा आयोग ने प्रावधान दिया है। कोर्ट ने कहा कि इस संबंध में कुछ अन्य अभ्यर्थियों की ओर से उठाए गए मामले पर आयोग ने अपना निर्णय दिया है।
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विशेषज्ञों ने इस पर अपनी राय व्यक्त की है, अदालत उसके विरुद्ध नहीं जा सकती। कोर्ट ने कहा कि जिन पांच प्रश्नों की बात हो रही है, उसकी आंसर की को दुरुस्त कर दिया गया था। इससे नतीजे प्रभावित नहीं होते। लिहाजा चुनौती याचिका आधार नहीं रखती। 
 
आप विनम्र पृष्ठभूमि से हैं, इसलिए कठोर कार्रवाई नहीं
कोर्ट ने कहा कि आयोग के समक्ष मामला उठाने का दावा जांच के दौरान गलत पाया गया है। यह अदालत को गुमराह करना है। याचिकाकर्ता अभ्यर्थी चूंकि दूरदराज इलाकों से हैं और उनकी पृष्ठभूमि भी विनम्र है। यह देखते हुए ऐसी कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जा रही। 

जिससे उनके भविष्य पर बुरा असर पड़ता हो। कोर्ट में गलत जानकारी देने के लिए उन पर सिर्फ 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाता है। जुर्माने में से 25 हजार रुपये अधिवक्ता कल्याण कोष में जमा करवाना होगा और शेष राशि दो सप्ताह के भीतर जम्मू-कश्मीर लोक सेवा आयोग के खाते में जमा करवानी होगी। जेएनएफ/संवाद

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