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जम्मू-कश्मीर: काम पसंद न होने के बावजूद मरीजों की दिल से सेवा कर रहीं यह स्वास्थ्य कार्यकर्ता
Tue, 25 May 2021 09:25 PM IST
करिश्मा चिब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: करिश्मा चिब
Updated Tue, 25 May 2021 09:25 PM IST
सार
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा फ्रंटलाइन वर्कर्स के प्रयासों की सराहना में जम्मू से मीना शर्मा जैसी नर्सों का भी उल्लेख किया था जिससे उन्हें काफी प्रोत्साहन मिला।
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coronavirus in jammu kashmir
- फोटो : बासित जरगर
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर में एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता मीना शर्मा जैसे हजारों डॉक्टरों और पैरामेडिक्स को कोरोना से लड़ने के लिए विभिन्न कर्तव्य सौंपे गए थे, जिससे महामारी को नियंत्रण में रखने में मदद मिली। 41 वर्षीय मीना शर्मा को मिला काम उनकी पहली पसंद नहीं था, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने अपना दिल और आत्मा उस सौंपे गए कार्य में लगा दिए। मीना सांबा जिले के विजयपुर के पटली मोड़ गांव की निवासी हैं।
उन्होंने एएमटी गांधी नगर से महिला बहु उद्देश्यीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता कार्यक्रम में अपना प्रशिक्षण लिया और बाद में एफएमपीएचडब्ल्यू के रूप में स्वास्थ्य विभाग में शामिल हो गईं। मीना का कहना है कि सबसे पहले वह संदिग्ध कोरोना संक्रमित रोगियों के साथ काम करने से बहुत डरीं और घबराईं, क्योंकि उनका काम लोगों का कोविड टेस्ट करना था।
उन्होंने कहा कि उनका परिवार उनसे भी ज्यादा डरा हुआ था और इससे तनाव और बढ़ जाता था। लेकिन, समय बीतने के साथ उन्होंने चारों ओर नकारात्मकता के बावजूद खुद को सकारात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ाया। और, धीरे-धीरे उनके परिवार को भी आराम मिला, जिससे उन्हें अपनी नौकरी के साथ आगे बढ़ने का विश्वास मिला। मीना वर्तमान में बॉयज हाई स्कूल गांधी नगर में कोविड परीक्षण के लिए नमूने एकत्र करती हैं।
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यह भी पढ़ें- #ladengecoronase: जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में 45+ के सभी लोगों को लग गई कोरोना वैक्सीन
उनका कहना है कि पोस्टिंग के शुरुआती दिनों के दौरान उन्हें कई अन्य पैरामेडिक्स के साथ कई स्थानों पर आरएटी और आरटी-पीसीआर परीक्षण प्रक्रियाओं के माध्यम से लोगों से नमूने एकत्र करने के लिए तैनात किया गया था। महामारी के नतीजों से अनजान रह कर वह मानवता की भावना के साथ लगी रहीं। उनका मानना है कि इस समय हर कोई इस महामारी के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है। उसी तरह उन्होंने भी अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए लड़ाई शुरू करने के बारें में सोचा।
जब आवाम की आवाज नामक मासिक रेडियो टॉक शो में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा फ्रंटलाइन वर्कर्स के प्रयासों की सराहना की थी और वर्तमान स्वास्थ्य संकट के दौरान अथक प्रयासों के लिए जम्मू से मीना शर्मा जैसी नर्सों का भी उल्लेख किया था तो इससे उन्हें काफी प्रोत्साहन मिला। मीना के घर पर उनकी 10 साल की बेटी भी है, जिसके लिए उन्हें ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत रहती है।
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उन्होंने एएमटी गांधी नगर से महिला बहु उद्देश्यीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता कार्यक्रम में अपना प्रशिक्षण लिया और बाद में एफएमपीएचडब्ल्यू के रूप में स्वास्थ्य विभाग में शामिल हो गईं। मीना का कहना है कि सबसे पहले वह संदिग्ध कोरोना संक्रमित रोगियों के साथ काम करने से बहुत डरीं और घबराईं, क्योंकि उनका काम लोगों का कोविड टेस्ट करना था।
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उन्होंने कहा कि उनका परिवार उनसे भी ज्यादा डरा हुआ था और इससे तनाव और बढ़ जाता था। लेकिन, समय बीतने के साथ उन्होंने चारों ओर नकारात्मकता के बावजूद खुद को सकारात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ाया। और, धीरे-धीरे उनके परिवार को भी आराम मिला, जिससे उन्हें अपनी नौकरी के साथ आगे बढ़ने का विश्वास मिला। मीना वर्तमान में बॉयज हाई स्कूल गांधी नगर में कोविड परीक्षण के लिए नमूने एकत्र करती हैं।
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उनका कहना है कि पोस्टिंग के शुरुआती दिनों के दौरान उन्हें कई अन्य पैरामेडिक्स के साथ कई स्थानों पर आरएटी और आरटी-पीसीआर परीक्षण प्रक्रियाओं के माध्यम से लोगों से नमूने एकत्र करने के लिए तैनात किया गया था। महामारी के नतीजों से अनजान रह कर वह मानवता की भावना के साथ लगी रहीं। उनका मानना है कि इस समय हर कोई इस महामारी के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है। उसी तरह उन्होंने भी अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए लड़ाई शुरू करने के बारें में सोचा।
जब आवाम की आवाज नामक मासिक रेडियो टॉक शो में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा फ्रंटलाइन वर्कर्स के प्रयासों की सराहना की थी और वर्तमान स्वास्थ्य संकट के दौरान अथक प्रयासों के लिए जम्मू से मीना शर्मा जैसी नर्सों का भी उल्लेख किया था तो इससे उन्हें काफी प्रोत्साहन मिला। मीना के घर पर उनकी 10 साल की बेटी भी है, जिसके लिए उन्हें ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत रहती है।