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Bribery Case: रिश्वतखोरी में फंसे पुलिस अफसर के खिलाफ दोबारा जांच के आदेश, एक महीने में रिपोर्ट सौंपने को कहा
Fri, 02 Sep 2022 01:10 PM IST
kumar गुलशन कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Fri, 02 Sep 2022 01:10 PM IST
सार
गृह विभाग के वित्तीय आयुक्त व अतिरिक्त मुख्य सचिव राजकुमार गोयल की ओर से जारी आदेश के अनुसार रियासी जिले के अरनास इलाके में तैनाती के दौरान डीएसपी जुबैर मिर्जा के खिलाफ रिश्वतखोरी के आरोप लगे थे।
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर सरकार ने एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ रिश्वतखोरी के मामले में दोबारा जांच के आदेश दिए हैं। एडीजीपी (सुरक्षा) डॉ. एसडी सिंह को जांच अधिकारी बनाया गया है। उनसे एक माह में जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। गृह विभाग के वित्तीय आयुक्त व अतिरिक्त मुख्य सचिव राजकुमार गोयल की ओर से जारी आदेश के अनुसार रियासी जिले के अरनास इलाके में तैनाती के दौरान डीएसपी जुबैर मिर्जा के खिलाफ रिश्वतखोरी के आरोप लगे थे। वह रियासी के एसडीपीओ थे।
गृह विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि सामान्य प्रशासन विभाग ने 14 जून 2018 को सतर्कता संगठन (अब एसीबी) को पत्र भेजा कि जुबैर मिर्जा के खिलाफ रिश्वतखोरी और गलत तरीके से जेल भेजने के आरोपों में विभागीय कार्रवाई की जाए। इस आधार पर गृह विभाग ने 11 दिसंबर 2018 को जुबैर को आरोपपत्र जारी किया। 27 दिसंबर को जुबैर ने जो जवाब दिया वह आरोपों से बिल्कुल अलग था।
इसके बाद 23 अप्रैल 2019 को विभागीय जांच के आदेश दिए गए। आईपीएस गरीब दास को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया जिन्होंने नौ फरवरी 2022 को रिपोर्ट दी। जांच रिपोर्ट में किसी प्रकार का आरोप साबित करने जैसी बात नहीं थी जिसके लिए समिति का गठन किया गया था। यह अनुभव किया गया कि जांच अधिकारी ने आरोपों की संतोषजनक तरीके से जांच नहीं की। इस पर यह फैसला किया गया कि अधिकारी पर लगाए गए आरोपों की नए सिरे से जांच कराई जाए।
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गृह विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि सामान्य प्रशासन विभाग ने 14 जून 2018 को सतर्कता संगठन (अब एसीबी) को पत्र भेजा कि जुबैर मिर्जा के खिलाफ रिश्वतखोरी और गलत तरीके से जेल भेजने के आरोपों में विभागीय कार्रवाई की जाए। इस आधार पर गृह विभाग ने 11 दिसंबर 2018 को जुबैर को आरोपपत्र जारी किया। 27 दिसंबर को जुबैर ने जो जवाब दिया वह आरोपों से बिल्कुल अलग था।
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इसके बाद 23 अप्रैल 2019 को विभागीय जांच के आदेश दिए गए। आईपीएस गरीब दास को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया जिन्होंने नौ फरवरी 2022 को रिपोर्ट दी। जांच रिपोर्ट में किसी प्रकार का आरोप साबित करने जैसी बात नहीं थी जिसके लिए समिति का गठन किया गया था। यह अनुभव किया गया कि जांच अधिकारी ने आरोपों की संतोषजनक तरीके से जांच नहीं की। इस पर यह फैसला किया गया कि अधिकारी पर लगाए गए आरोपों की नए सिरे से जांच कराई जाए।
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