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जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल मलिक बोले, घाटी में संचार ठप होने से कई जानें बचीं हैं
Sun, 25 Aug 2019 09:22 PM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Sun, 25 Aug 2019 09:22 PM IST
सार
- अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद हिंसा में कोई जानी नुकसान नहीं
- बोले, यदि संचार सुविधा ठप होने से लोगों की जान बचती है तो इसमें हर्ज क्या है
- राज्य में दवाइयों, आवश्यक वस्तुओं व बेबी फूड की कोई कमी नहीं
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जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक
- फोटो : ANI
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा है कि जम्मू कश्मीर में संचार बंद होने से कई जानें बची हैं। अनुच्छेद 370 खत्म होने और जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के 20 दिनों में हिंसा के कारण कोई भी जान का नुकसान नहीं हुआ है। यदि संचार सुविधा ठप होने से लोगों की जान बचती है तो इसमें हर्ज क्या है।
उन्होंने कहा कि इससे पहले अगर कश्मीर में कोई भी मुश्किल होती थी तो पहले हफ्ते के भीतर कम से कम 50 लोगों की मौत होती थी। हमारा दृष्टिकोण है कि मानव जीवन का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए। 10 दिन टेलीफोन नहीं होंगे, नहीं होंगे, लेकिन हम बहुत जल्दी सब वापस कर देगें। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में दवाइयों और जरूरी सामान की कमी होने से इनकार किया है।
कश्मीर घाटी में रविवार को केमिस्ट की दुकानें भी खुली रहीं। जम्मूू-कश्मीर प्रशासन के अनुसार रविवार को श्रीनगर की 1666 में से 1165 केमिस्ट की दुकानें खुली रहीं। घाटी में लगभग 65 प्रतिशत दुकानें खुली रहीं। यहां 7630 रिटेल और 4331 होलसेल दुकानें हैं।
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राज्यपाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में कहीं भी किसी चीज की कमी नहीं है। न तो दवाओं की और न ही आवश्यक वस्तुओं की। वस्तुस्थिति यह है कि ईद के मौके पर सब्जियां और मीट लोगों के घर तक पहुंचाए गए हैं। पिछले 20 दिनों में 23.31 करोड़ रुपये की दवाइयां रिटेल दुकानों तक पहुंचाई गई हैं, जो आम दिनों के मुकाबले ज्यादा हैं।
376 अधिसूचित दवाएं सरकारी दुकानों और निजी रिटेलरों के पास उपलब्ध हैं। 62 जरूरी तथा जीवनरक्षक दवाएं भी उपलब्ध हैं। इन दवाइयों का 15-20 दिनों का स्टॉक उपलब्ध है। प्रशासन ने बताया कि जम्मू से दवाओं की आपूर्ति 14-18 घंटे में हो रही है क्योंकि ज्यादातर वितरक वहीं के हैं।
उन्होंने कहा जा रहा था कि दो दिनों तक घाटी में बेबी फूड की कमी रही। लेकिन ऐसा नहीं है। अगले तीन हफ्तों तक का स्टाक उपलब्ध है। कहीं से भी अधिक कीमत लिए जाने की शिकायतें नहीं मिली हैं। इसके लिए 75 स्थानों पर जांच की गई है।
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उन्होंने कहा कि इससे पहले अगर कश्मीर में कोई भी मुश्किल होती थी तो पहले हफ्ते के भीतर कम से कम 50 लोगों की मौत होती थी। हमारा दृष्टिकोण है कि मानव जीवन का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए। 10 दिन टेलीफोन नहीं होंगे, नहीं होंगे, लेकिन हम बहुत जल्दी सब वापस कर देगें। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में दवाइयों और जरूरी सामान की कमी होने से इनकार किया है।
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कश्मीर घाटी में रविवार को केमिस्ट की दुकानें भी खुली रहीं। जम्मूू-कश्मीर प्रशासन के अनुसार रविवार को श्रीनगर की 1666 में से 1165 केमिस्ट की दुकानें खुली रहीं। घाटी में लगभग 65 प्रतिशत दुकानें खुली रहीं। यहां 7630 रिटेल और 4331 होलसेल दुकानें हैं।
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राज्यपाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में कहीं भी किसी चीज की कमी नहीं है। न तो दवाओं की और न ही आवश्यक वस्तुओं की। वस्तुस्थिति यह है कि ईद के मौके पर सब्जियां और मीट लोगों के घर तक पहुंचाए गए हैं। पिछले 20 दिनों में 23.31 करोड़ रुपये की दवाइयां रिटेल दुकानों तक पहुंचाई गई हैं, जो आम दिनों के मुकाबले ज्यादा हैं।
376 अधिसूचित दवाएं सरकारी दुकानों और निजी रिटेलरों के पास उपलब्ध हैं। 62 जरूरी तथा जीवनरक्षक दवाएं भी उपलब्ध हैं। इन दवाइयों का 15-20 दिनों का स्टॉक उपलब्ध है। प्रशासन ने बताया कि जम्मू से दवाओं की आपूर्ति 14-18 घंटे में हो रही है क्योंकि ज्यादातर वितरक वहीं के हैं।
उन्होंने कहा जा रहा था कि दो दिनों तक घाटी में बेबी फूड की कमी रही। लेकिन ऐसा नहीं है। अगले तीन हफ्तों तक का स्टाक उपलब्ध है। कहीं से भी अधिक कीमत लिए जाने की शिकायतें नहीं मिली हैं। इसके लिए 75 स्थानों पर जांच की गई है।