भगवा खेमे का मिशन कश्मीर, दिल्ली चुनाव बाद
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रियासत में पहली बार कमल खिलाने के लिए प्रतिबद्ध दिख रहा भगवा खेमा दिल्ली चुनाव के बाद मिशन कश्मीर शुरू करेगा।
त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में नंबर गेम में पीडीपी से मामूली पीछे रही भाजपा राज्य में मुख्यमंत्री पद के अपने दावे को किसी भी सूरत में छोड़ना नहीं चाहती है।
इसके लिए उसने पीडीपी और नेकां दोनों से लगातार बातचीत जारी रखी है। गठबंधन की स्थिति में विशेष दर्जा प्राप्त इस राज्य में उसे कई मुद्दों पर समझौता करना पड़ सकता है।
सत्ता के लिए किए समझौते का खामियाजा दिल्ली चुनाव में भुगतने के भाजपा थिंक टैंक की सलाह के बाद पार्टी ने फिलहाल गठजोड़ के मुद्दे को ठंडे बस्ते में ही रखने का फैसला किया है।
पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि दिल्ली चुनाव मोदी तथा भाजपा की प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ है। लिहाजा, कोई जोखिम नहीं उठाना चाहिए।
परवान नहीं चढ़ सकी भाजपा की योजना
मिशन 44 प्लस का नारा लेकर मैदान में उतरी भाजपा को विधानसभा चुनाव में 25 सीटें मिलीं। 87 सदस्यीय विधानसभा में पीडीपी 28 सीटों के साथ पहले स्थान पर रही। नेकां को 15, कांग्रेस को 12, पीपुल्स कांफ्रेंस को दो, सीपीआई एम को एक, पीडीएफ को एक तथा निर्दलीयों को तीन सीटें मिलीं।
त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में सत्ता की सौदेबाजी शुरू हो गई। दिल्ली में सबसे पहले उमर की मुलाकात भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से हुई। सूत्रों के अनुसार समर्थन की दशा में नेकां को उप मुख्यमंत्री, कुछ मंत्री पद तथा केंद्र में भी प्रतिनिधित्व का ऑफर दिया गया। इस बीच उमर अस्वस्थ पिता का हाल जानने विदेश चले गए।
भाजपा के साथ प्रारंभिक बातचीत फिर परवान नहीं चढ़ सकी। इसके बाद पीडीपी से भाजपा की नजदीकियां बढ़ने लगीं। एक समय ऐसा लग रहा था कि बस दो चार दिनों में दोनों दलों के बीच समझौता पक्का हो जाएगा। सोशल मीडिया में तो 14 जनवरी को शपथ ग्रहण समारोह तक की अफवाहें तैरने लगी थीं।
पार्टी जल्द सरकार बनाएगी: जुगल
मुफ्ती को मुख्यमंत्री और भाजपा के डॉ. निर्मल सिंह को उप मुख्यमंत्री तक घोषित कर दिया गया था। पीडीपी से बढ़ती नजदीकियों के बीच लंदन से उमर ने इस गठबंधन पर जमकर ट्वीट किया।
इधर, पिछले दिनों भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने प्रदेश कोर कमेटी के सदस्यों को तलब कर सरकार गठन पर उनकी राय ली।
सूत्रों का कहना है कि कोर कमेटी ने साफ तौर पर यह कह दिया कि विचारधारा से किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। रियासत में सरकार बनाने के लिए भाजपा को जनादेश मिला है।
इसलिए भाजपा का ही मुख्यमंत्री होना चाहिए। जम्मू, कश्मीर तथा लद्दाख के साथ क्षेत्रीय भेदभाव खत्म हो सके।
राज्य में स्थायी सरकार हो और मोदी के विकास मॉडल को रियासत में भी लागू किया जा सके। पार्टी सूत्रों का कहना है कि कोर कमेटी की राय के बाद भाजपा हाईकमान ने अपने मुख्यमंत्री के लिए प्रयास शुरू कर दिया।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष जुगल किशोर शर्मा का कहना है कि जल्द ही रियासत में स्थायी तथा विकास करने वाली सरकार अस्तित्व में आएगी। पार्टी इस दिशा में प्रयासरत है।