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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Jammu Kashmir: Gaurinath's name in Modi's 'Mann Ki Baat', Sarangist gets emotional after hearing his name from

Jammu Kashmir: मोदी के 'मन की बात' में गौरीनाथ का नाम, पीएम के मुंह से अपना नाम सुन भावुक हुए सारंगीवादक

Mon, 28 Oct 2024 01:41 PM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: निकिता गुप्ता Updated Mon, 28 Oct 2024 01:41 PM IST
सार

उधमपुर के सारंगी वादक गौरीनाथ के लिए रविवार का दिन खास रहा, जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मन की बात' कार्यक्रम में अपना नाम सुना। इस अनमोल पल ने उन्हें भावुक कर दिया और उन्होंने कहा कि जीवन का संघर्ष सम्मान में बदल गया है।

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Jammu Kashmir: Gaurinath's name in Modi's 'Mann Ki Baat', Sarangist gets emotional after hearing his name from
पीएम मोदी - फोटो : PTI

विस्तार

रविवार का दिन उधमपुर के वार्ड 7 के शक्तिनगर में रहने वाले सारंगी वादक गौरीनाथ के लिए बहुत खास रहा। वह उस वक्त भावुक हो उठे, जब उन्होंने रेडियो पर चल रहे मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुंह से अपना नाम सुना।उन्होंने इस अनमोल पल से जुड़े एहसास को अमर उजाला के साथ साझा किया। कहा कि जीवन का संघर्ष उस वक्त सम्मान में बदल गया, जब पीएम मोदी को अपना नाम लेते सुना।

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उधमपुर निवासी गौरीनाथ ने सारंगी वादन की वर्षों पुरानी डुग्गर कला को आज भी जिंदा रखा है। अपनी सारंगी की तान पर माता रानी और डुग्गर लोक संस्कृति में रचे-बसे गीतों से कुल देवताओं का गुणगान (कारका) कर वह श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करते हैं। घर-घर जाकर अपनी इस कला के माध्यम से अपनी आजीविका चलाते हैं। मात्र 10 साल की आयु में अपने दादा से सीखी इस कला को उन्होंने मुख्य पेशा बनाया। उन्होंने कड़ी आर्थिक चुनौतियों के बावजूद इसे संरक्षित रखा है।
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डोगरी में गाते हैं भजन, तंगहाली में भी नहीं किया कला से समझौता
गौरीनाथ को हिंदी का अधिक ज्ञान नहीं है। वह डोगरी में ही भजन गाते हैं। 76 साल की उम्र में भी उनकी ऊर्जा बरकरार है। करीब दो मरला जमीन में बने कच्चे मकान में जीवन बसर कर रहे हैं। कहते हैं कि जिंदगी आर्थिक तंगी में गुजरी है, लेकिन इस कला ने लोगों के बीच उनको हमेशा सम्मान ही दिलाया है।
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उनकी सारंगी भी काफी पुरानी है और बाजार में भी नहीं मिलती है। यह सारंगी उनके दादा की है और उन्हीं से मात्र दस साल की आयु में इसे बजाना और गाना सीखा। दौर राजा-महाराजाओं का था और हर कोई इसे सुनता था।

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