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जम्मू-कश्मीर: अयोग्य ही रहेंगे कठुआ नगर परिषद के चार पार्षद, कांग्रेस से जीतकर भाजपा में हो गए थे शामिल

Sat, 01 Apr 2023 04:44 PM IST
विमल शर्मा जेएनएफ, जम्मू
जेएनएफ, जम्मू Published by: विमल शर्मा Updated Sat, 01 Apr 2023 04:44 PM IST
सार

चारों पार्षद कांग्रेस की टिकट से चुनाव लड़े थे। चुनाव जीतने के बाद भाजपा में शामिल हो गए।जम्मू और कश्मीर नगरपालिका अधिनियम के तहत दलबदल के दलबदल के प्रावधानों में आता है। इसलिए चारों को अयोग्य करार दिया गया। 

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Jammu Kashmir: Four councilors of Kathua Municipal Council will remain disqualified, joined BJP after winning
Kathua Municipal Council - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कठुआ नगर परिषद के चार भाजपा पार्षदों को अयोग्य करार देने का फैसला बरकरार रहेगा। वर्ष 2019 में जम्मू-कश्मीर मुख्य चुनाव अधिकारी ने चारों को जम्मू-कश्मीर म्यूनिसिपल एक्ट 2000 के एंटी डिफेक्शन कानून की धारा का उल्लंघन करने पर अयोग्य करार दिया था।

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इस फैसले को चारों ने विशेष न्यायाधीकरण के पास चुनौती दी थी। इस मामले पर विशेष न्यायाधीकरण के सदस्य राजीव गुप्ता ने सुनवाई की। दलीलें सुनने के बाद गुप्ता ने इनकी योग्यता को अयोग्य ही बरकरार रखा।
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बता दें कि मुख्य चुनाव अधिकारी ने कठुआ नगर परिषद की पार्षद पुष्पा देवी (वार्ड 16) और वार्ड नंबर 21 के पार्षद बलजीत सिंह द्वारा दायर की गई याचिका पर वार्ड नंबर 9 के पार्षद नरेश शर्मा (नगर परिषद अध्यक्ष), वार्ड 6 की पार्षद रेखा कुमारी, वार्ड 10 के पार्षद अजय कुमार और वार्ड 12 की पार्षद रेणु बाला को अयोग्य करार दिया था।
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यह सभी पार्षद कांग्रेस की टिकट से पार्षद का चुनाव लड़े थे, जबकि चुनाव जीतने के बाद भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा ने नगर परिषद का अध्यक्ष नरेश शर्मा को बनाया था। अपीलकर्ताओं ने याचिका में कहा था कि कांग्रेस के पांच विजेता पार्षदों में से चार ने भाजपा ज्वाइन कर ली।

दूसरे दल में जाने से पहले तमाम कानून, नियमों को भी अपनाया नहीं गया। चूंकि यह जम्मू और कश्मीर नगरपालिका अधिनियम 2000 की धारा 18 ए (1)(ए) के तहत दलबदल के प्रावधानों में आता है। इन दलीलों को सुनने के बाद मुख्य चुनाव अधिकारी ने सभी चार पार्षदों को अयोग्य करार दे दिया।


विशेष न्यायाधीकरण के न्यायिक सदस्य राजीव गुप्ता ने पाया कि सचेतक की अवहेलना के दूसरे पहलू पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी, जम्मू-कश्मीर की जांच भी तथ्यात्मक और कानूनी पहलुओं पर आधारित है, जिसे नीचे दिए गए प्राधिकरण द्वारा उचित रूप से सराहा गया है।

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