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Jammu Kashmir Elections :  चुनाव में खलल डालने की साजिश... सील रूट से घुसपैठ कर रहे आतंकी, नदी-नालों की आड़

Sun, 29 Sep 2024 06:40 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, कठुआ
अमर उजाला नेटवर्क, कठुआ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 29 Sep 2024 06:40 AM IST
सार

भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से घुसपैठ के पुराने रूट को भले ही सुरक्षाबलों ने सील कर दिया हो, लेकिन आतंकी इस रूट का इस्तेमाल इलाके में मूवमेंट के लिए आज भी कर रहे हैं। खासकर उज्ज दरिया और इसके सहायक नालों के जरिये वे घुसपैठ कर रहे हैं।

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Jammu Kashmir Elections: Conspiracy to disrupt elections, terrorists infiltrating through sealed route
सुरक्षाबल - फोटो : एजेंसी

विस्तार

जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में आतंकी खलल डालने की साजिश कर रहे हैं। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से घुसपैठ के पुराने रूट को भले ही सुरक्षाबलों ने सील कर दिया हो, लेकिन आतंकी इस रूट का इस्तेमाल इलाके में मूवमेंट के लिए आज भी कर रहे हैं। खासकर उज्ज दरिया और इसके सहायक नालों के जरिये वे घुसपैठ कर रहे हैं। सड़क संपर्क से दूर दरिया किनारे आतंकियों की सदरोता से धनु परोल के इलाकों में मूवमेंट होती रही है।

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जखोल और बिलावर के पंजतीर्थी इलाके में पांच दरिया, नालों का संगम होता है। यहीं से उधमपुर और बिलावर के लिए विभिन्न रूट भी जाते हैं। आतंकी घुसपैठ के बाद इन्हीं रूट का इस्तेमाल करते रहे हैं। यह नाले उधमपुर और कठुआ जिले के दूरदराज पहाड़ों को जोड़ते हैं। इन रास्तों से सटे जंगलाें में आतंकियों की मौजूदगी के इनपुट पहले भी मिलते रहे हैं।
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बिलावर मुठभेड़ को लेकर ऐसी आशंका है कि आतंकियों का यह दल पहाड़ी इलाके से नीचे की ओर आ रहा था। मुठभेड़ स्थल से कुछ किलोमीटर की दूरी पर वीवीआईपी दौरा भी था। इसके अलावा कोहग मांडली का यह क्षेत्र धार सड़क से सटा हुआ है। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस सड़क पर सुरक्षाबलों के वाहन को निशाना बनाने की साजिश से भी इन्कार नहीं किया जा सकता है। मतदान को अब 72 घंटे से भी कम समय बचा है। ऐसे में साफ है कि आतंकी इलाके में दहशत फैलाने की मंशा से आगे बढ़ रहे थे। 


पहाड़ों पर तापमान गिरने से निचले इलाकों की ओर कर रहे रुख 
जिले के पहाड़ी इलाकों में बदल रहे मौसम ने भी आतंकियों को निचले इलाकों की ओर रुख करने को मजबूर किया है। इन इलाकों में रात के समय अब ठंड का अहसास हो रहा है। इसके अलावा इन इलाकों में ढोंक में रहने वाले खानाबदोश परिवार भी लौटने लगे हैं। दूरदराज इलाकों में सुरक्षाबलों की मूवमेंट बढ़ने और आतंकियों को खाने-पीने के संकट का भी अंदेशा है। इन सभी वजहों से आतंकी पहाड़ी चोटियों से नीचे की ओर आने लगे हैं। पूर्व की मुठभेड़ में भी सामने आ चुका है कि दूरदराज इलाकों की ढोंक और यहां के लोगों की मदद आतंकी छिपने और खाने आदि के लिए लेते रहे हैं। वहां अब आतंकियों को शरण और मदद दोनों ही नहीं मिलने वाले हैं। 

निगरानी बढ़ाई...
खुफिया सूत्रों का दावा है कि आतंकियों की मूवमेंट को ट्रैक करने के लिए सुरक्षाबलों ने भी निगरानी बढ़ाई हुई है। ऐसे में उनके लिए इन इलाकों से निकलना अब आसान नहीं होने वाला है।


 

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