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Jammu Kashmir Elections : पीर पंजाल में भाजपा ने खेला पहाड़ी-गुज्जर कार्ड, पहली बार एसटी को राजनीतिक आरक्षण
Wed, 28 Aug 2024 05:35 AM IST
दुष्यंत शर्मा
डॉ. बृजेश कुमार सिंह, जम्मू
डॉ. बृजेश कुमार सिंह, जम्मू
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 28 Aug 2024 05:35 AM IST
सार
राजोरी व पुंछ जिले की आठ में घोषित छह सीटें इन्हीं दो समुदायों के नेताओं को दी गई हैं। पहाड़ी समुदाय को एसटी का दर्जा देने और उन्हें 10 फीसदी आरक्षण देने के बाद भाजपा को उम्मीद है कि इस समुदाय के मतदाताओं का स्वभाविक रुझान पार्टी की ओर हो सकता है।
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पहाड़ी गुज्जर समुदाय पर भाजपा की नजर...
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अनुच्छेद 370 हटने के बाद पहली निर्वाचित सरकार बनाने की कवायद के तहत भाजपा ने पीर पंजाल के लिए पहाड़ी व गुज्जर कार्ड चला है। राजोरी व पुंछ जिले की आठ में घोषित छह सीटें इन्हीं दो समुदायों के नेताओं को दी गई हैं। पहाड़ी समुदाय को एसटी का दर्जा देने और उन्हें 10 फीसदी आरक्षण देने के बाद भाजपा को उम्मीद है कि इस समुदाय के मतदाताओं का स्वभाविक रुझान पार्टी की ओर हो सकता है।
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पार्टी की ओर से घोषित छह सीटों में चार पहाड़ी व दो गुज्जर समुदाय को दिया गया है। पहाड़ियों के लिए कालाकोट-सुंदरबनी से ठाकुर रणधीर सिंह, थन्नामंडी से मोहम्मद इकबाल मलिक, सुरनकोट से सैय्यद मुश्ताक अहमद बुखारी व मेंढर से मुर्तजा खान और गुज्जर समुदाय के लिए बुद्धल से चौधरी जुल्फकार अली, पुंछ हवेली से चौधरी अब्दुल गनी को प्रत्याशी बनाया गया है।
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कालाकोट व पुंछ की सीट सामान्य संवर्ग के लिए है, जबकि अन्य चार सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। पहली बार अनुसूचित जनजाति को राजनीतिक आरक्षण देते हुए उनके लिए नौ सीटें आरक्षित की गई हैं। इन दो जिलों में पहाड़ी व गुज्जर समुदाय के मतदाता अधिक हैं। इस वजह से पार्टी ने ध्रुवीकरण के लिए सामान्य सीटों पर एक-एक सीट पर पहाड़ी व गुज्जर समुदाय को प्रतिनिधित्व दिया है।
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जम्मू विश्वविद्यालय के शिक्षक व पहाड़ी नेता डॉ. नितन शर्मा का मानना है कि इन दो जिलों में पहाड़ी व गुज्जर मतदाताओं की संख्या अधिक है जो स्वाभाविक रूप से चुनाव को प्रभावित करते हैं। इस बार खास बात यह है कि पहाड़ियों को एसटी का दर्जा मिला है। पहली बार ही राजनीतिक आरक्षण भी मिला है और पूरे प्रदेश में नौ सीटें आरक्षित की गई हैं। पहाड़ियों को आरक्षण मिलने से गुज्जर समुदाय के आरक्षण प्रतिशत में किसी प्रकार की कटौती नहीं हुई है।
ऐसा माना जा रहा है कि पहाड़ी अपनी नुमाइंदगी के लिए बढ़ चढ़कर भागीदारी करेगा। पहाड़ी समुदाय के ही भाजपा नेता विबोध गुप्ता का कहना है कि पहली बार पहाड़ियों को अपनी नुमाइंदगी का मौका मिला है। सकारात्मक नतीजे आने की उम्मीद है। पिछले 50 साल के संघर्ष को पाकर राजनीतिक रूप से सशक्त होने के लिए पहाड़ी समुदाय वोट के जरिये अपनी आवाज बुलंद करेगा।
नौशेरा व राजोरी की सीटों पर प्रत्याशी नहीं
पार्टी की ओर से फिलहाल नौशेरा व राजोरी सीट पर प्रत्याशी की घोषणा नहीं की गई है। नौशेरा सीट से 2014 में प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र रैना विधायक रहे थे। राजोरी की सीट पर पार्टी के महासचिव विबोध गुप्ता दावेदार बताए जा रहे हैं। इन दोनों सीटों पर दावेदारी को लेकर पेच फंसा हुआ है। इस वजह से अब तक टिकट की घोषणा नहीं हो सकी है।
एक नजर...
- 08 सीटें पीर पंजाल में
- 05 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित
- 03 सीटें राजोरी में बुद्धल, थन्नामंडी व राजोरी
- 02 सीटें पुंछ में सुरनकोट व मेंढर
- 03 सीटें अनारक्षित कालाकोट-सुंदरबनी, नौशेरा व पुंछ हवेली