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Jammu Kashmir Election: वकीलों की उम्मीदें, नई सरकार से प्रशासनिक सुधार, भत्ते और सुरक्षा की मांग
Fri, 06 Sep 2024 04:32 PM IST
निकिता गुप्ता
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: निकिता गुप्ता
Updated Fri, 06 Sep 2024 04:32 PM IST
सार
वकील समुदाय आगामी विधानसभा चुनाव में चुनी हुई सरकार से प्रशासनिक सुधार और युवा वकीलों के लिए भत्ते, महिला वकीलों के लिए सुरक्षा और डे केयर सुविधालऔर अदालतों में बेहतर ढांचा की मांग कर रहा है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
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विस्तार
विधानसभा चुनावों के नजदीक आते ही जम्मू-कश्मीर के वकील समुदाय ने चुनी हुई सरकार से कई महत्वपूर्ण अपेक्षाएं जताई हैं। वे अनुच्छेद 370 के हटने को अपनी विजय मानते हैं। लेकिन अब राज्य का दर्जा घटाकर यूटी बनाए जाने के बाद उन्हें कई नई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। युवा वकील, महिलाएं और सामान्य अधिवक्ता सभी ने अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर सरकार से अपील की है।
युवा वकीलों की अपेक्षाएं
युवा वकीलों ने एक से पांच वर्षों तक प्रैक्टिस करने वालों के लिए भत्ता देने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रारंभिक वर्षों में वकालत सीखने और स्थापित होने में समय लगता है। और इस दौरान वित्तीय सहायता महत्वपूर्ण होगी। वे सरकार से 15 से 20 हजार रुपये प्रति माह के भत्ते की मांग कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त अदालतों में निशुल्क इंटरनेट सेवा की भी मांग की जा रही है। ताकि वकील आसानी से ऑनलाइन रिसोर्सेज का उपयोग कर सकें।
युवा वकीलों की अपेक्षाएं
युवा वकीलों ने एक से पांच वर्षों तक प्रैक्टिस करने वालों के लिए भत्ता देने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रारंभिक वर्षों में वकालत सीखने और स्थापित होने में समय लगता है, और इस दौरान वित्तीय सहायता महत्वपूर्ण होगी। वे सरकार से 15 से 20 हजार रुपये प्रति माह के भत्ते की मांग कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, अदालतों में निशुल्क इंटरनेट सेवा की भी मांग की जा रही है, ताकि वकील आसानी से ऑनलाइन रिसोर्सेज का उपयोग कर सकें।
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महिला वकीलों की सुरक्षा और सुविधाएं
महिला वकीलों ने सुरक्षा, मातृत्व लाभ और बच्चों की देखभाल के लिए अदालतों में डे केयर की व्यवस्था की मांग की है। वरिष्ठ महिला अधिवक्ता सनिग्धा शेखर ने कहा कि सरकारी महिलाओं को प्रसव के दौरान मिलने वाले लाभों की तरह ही महिला वकीलों को भी ऐसे लाभ मिलने चाहिए। इसके साथ ही, उपासना ठाकुर ने कर्नाटक की तर्ज पर वकीलों के लिए सुरक्षा एक्ट लागू करने की मांग की है ताकि अदालतों के भीतर और बाहर वकीलों को धमकियों और हमलों से बचाया जा सके।
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युवा वकीलों की अपेक्षाएं
युवा वकीलों ने एक से पांच वर्षों तक प्रैक्टिस करने वालों के लिए भत्ता देने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रारंभिक वर्षों में वकालत सीखने और स्थापित होने में समय लगता है। और इस दौरान वित्तीय सहायता महत्वपूर्ण होगी। वे सरकार से 15 से 20 हजार रुपये प्रति माह के भत्ते की मांग कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त अदालतों में निशुल्क इंटरनेट सेवा की भी मांग की जा रही है। ताकि वकील आसानी से ऑनलाइन रिसोर्सेज का उपयोग कर सकें।
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युवा वकीलों की अपेक्षाएं
युवा वकीलों ने एक से पांच वर्षों तक प्रैक्टिस करने वालों के लिए भत्ता देने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रारंभिक वर्षों में वकालत सीखने और स्थापित होने में समय लगता है, और इस दौरान वित्तीय सहायता महत्वपूर्ण होगी। वे सरकार से 15 से 20 हजार रुपये प्रति माह के भत्ते की मांग कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, अदालतों में निशुल्क इंटरनेट सेवा की भी मांग की जा रही है, ताकि वकील आसानी से ऑनलाइन रिसोर्सेज का उपयोग कर सकें।
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महिला वकीलों की सुरक्षा और सुविधाएं
महिला वकीलों ने सुरक्षा, मातृत्व लाभ और बच्चों की देखभाल के लिए अदालतों में डे केयर की व्यवस्था की मांग की है। वरिष्ठ महिला अधिवक्ता सनिग्धा शेखर ने कहा कि सरकारी महिलाओं को प्रसव के दौरान मिलने वाले लाभों की तरह ही महिला वकीलों को भी ऐसे लाभ मिलने चाहिए। इसके साथ ही, उपासना ठाकुर ने कर्नाटक की तर्ज पर वकीलों के लिए सुरक्षा एक्ट लागू करने की मांग की है ताकि अदालतों के भीतर और बाहर वकीलों को धमकियों और हमलों से बचाया जा सके।
आम वकीलों की समस्याएं
आम वकीलों ने अफसरशाही की मनमानी और उसके गैर-जिम्मेदार रवैये पर नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि अफसरशाही वकीलों और आम जनता की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेती। इसके चलते पुलिस और प्रशासन की गुंडागर्दी में वृद्धि हुई है, जिससे अदालतों में मुकदमों की संख्या बढ़ गई है और न्याय की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। असीम साहनी, पूर्व सरकारी अधिवक्ता ने बताया कि थोक में पीएसए लगाने के आदेश और प्रशासन का गैर-जिम्मेदार रवैया न्यायिक व्यवस्था को दबा रहा है।
आवश्यक संरचनात्मक सुधार
वकीलों ने अदालतों के बुनियादी ढांचे में सुधार की भी मांग की है। हाईकोर्ट और जिला कोर्ट में पार्किंग की कमी, लिफ्ट का आउट ऑफ सर्विस होना और बैठने की असुविधाओं की ओर ध्यान आकर्षित किया गया है। सुरजीत सिंह ने सुझाव दिया कि हाईकोर्ट और अन्य अदालतों को एक मल्टी-स्टोरी इमारत में समेकित किया जाए, जिससे वकीलों और आम जनता को सुविधा हो।
कानूनी सुधारों की आवश्यकता
वकीलों ने बार काउंसिल के गठन की भी मांग की है। ताकि वकीलों को बेहतर प्रतिनिधित्व मिल सके और उनके हितों की रक्षा की जा सके। उन्होंने अदालतों की रजिस्ट्री को फिर से ज्यूडिशियल अधिकारियों के हाथ में सौंपने की भी मांग की है। ताकि कानूनी प्रक्रियाएं सही ढंग से संचालित हो सकें।
इन तमाम मांगों और समस्याओं के बावजूद, वकील समुदाय ने चुनावी परिदृश्य में सुधार की उम्मीद जताई है। उनका कहना है कि चुनी हुई सरकार ही उनकी समस्याओं का समाधान कर सकती है और न्यायिक व्यवस्था को बेहतर बना सकती है। विधानसभा चुनाव की पूर्व संध्या पर वकीलों की ये अपेक्षाएं और मांगें यह दर्शाती हैं कि वे एक न्यायपूर्ण और समर्थ न्यायिक व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्ध हैं और इसके लिए सरकार से ठोस कदम उठाने की उम्मीद कर रहे हैं।
आम वकीलों ने अफसरशाही की मनमानी और उसके गैर-जिम्मेदार रवैये पर नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि अफसरशाही वकीलों और आम जनता की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेती। इसके चलते पुलिस और प्रशासन की गुंडागर्दी में वृद्धि हुई है, जिससे अदालतों में मुकदमों की संख्या बढ़ गई है और न्याय की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। असीम साहनी, पूर्व सरकारी अधिवक्ता ने बताया कि थोक में पीएसए लगाने के आदेश और प्रशासन का गैर-जिम्मेदार रवैया न्यायिक व्यवस्था को दबा रहा है।
आवश्यक संरचनात्मक सुधार
वकीलों ने अदालतों के बुनियादी ढांचे में सुधार की भी मांग की है। हाईकोर्ट और जिला कोर्ट में पार्किंग की कमी, लिफ्ट का आउट ऑफ सर्विस होना और बैठने की असुविधाओं की ओर ध्यान आकर्षित किया गया है। सुरजीत सिंह ने सुझाव दिया कि हाईकोर्ट और अन्य अदालतों को एक मल्टी-स्टोरी इमारत में समेकित किया जाए, जिससे वकीलों और आम जनता को सुविधा हो।
कानूनी सुधारों की आवश्यकता
वकीलों ने बार काउंसिल के गठन की भी मांग की है। ताकि वकीलों को बेहतर प्रतिनिधित्व मिल सके और उनके हितों की रक्षा की जा सके। उन्होंने अदालतों की रजिस्ट्री को फिर से ज्यूडिशियल अधिकारियों के हाथ में सौंपने की भी मांग की है। ताकि कानूनी प्रक्रियाएं सही ढंग से संचालित हो सकें।
इन तमाम मांगों और समस्याओं के बावजूद, वकील समुदाय ने चुनावी परिदृश्य में सुधार की उम्मीद जताई है। उनका कहना है कि चुनी हुई सरकार ही उनकी समस्याओं का समाधान कर सकती है और न्यायिक व्यवस्था को बेहतर बना सकती है। विधानसभा चुनाव की पूर्व संध्या पर वकीलों की ये अपेक्षाएं और मांगें यह दर्शाती हैं कि वे एक न्यायपूर्ण और समर्थ न्यायिक व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्ध हैं और इसके लिए सरकार से ठोस कदम उठाने की उम्मीद कर रहे हैं।