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Jammu Election: मुस्लिम मानते हैं 370 हटने के बाद हुआ विकास, पर BJP में न बना विश्वास; यहां बढ़ी सियासी तपिश

Sun, 15 Sep 2024 02:18 PM IST
शाहरुख खान शशांक मिश्र, अमर उजाला, जम्मू
शशांक मिश्र, अमर उजाला, जम्मू Published by: शाहरुख खान Updated Sun, 15 Sep 2024 02:18 PM IST
सार

जम्मू का मुस्लिम बहुल कस्बा भटिंडी के मुसलमान मानते हैं कि अनुच्छेद 370 के बाद विकास हुआ है। मगर भाजपा से इत्तेफाक  नहीं रखते हैं। मुस्लिम बहुल इलाके में मस्जिद से तकरीर की जा रही है। राजनीतिक तपिश बढ़ा रही है।

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Jammu Kashmir Election 2024 Politics on Article 370 Development BJP Congress News in Hindi
Jammu Election - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जम्मू का मुस्लिम बहुल कस्बा भटिंडी। यहां पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के मुखिया फारूक अब्दुल्ला की कोठी है। इस कोठी का रास्ता मक्का मस्जिद से होकर गुजरता है। कोठी के परकोटे से 100 मीटर पहले स्थित मक्का मस्जिद में जुमा (शुक्रवार) की नमाज से पहले तकरीर गूंज रही है। 
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धार्मिक संदेश से भरी यह आवाज दीनी तालीम से भरी है। पूरे इलाके तक पहुंच रही आवाज सब्र रखो और ऊपर वाले पर भरोसा करो का संदेश दे रही है। करीब 15 हजार आबादी वाले भटिंडी की मस्जिद से की जा रही तकरीर इलाके की सियासी तपिश को भी बढ़ा रही है।
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बड़ी संख्या में जुटे नमाजी एक-एक लफ्ज के मायने भी बारीकी से समझा रहे हैं। इस पूरे माहौल में सियासत खुद ब खुद तैरती दिख रही है। बड़ी-बड़ी कोठियों वाले इस मोहल्ले में शुक्रवार को मक्का मस्जिद के आसपास जरूर चहल पहल दिखी। मगर, बाकी जगहों पर सन्नाटा ही था।
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इलाके में ना किसी दल का झंडा है और बैनर। चुनावी नारे भी यहां नहीं सुनाई देते हैं। मगर, खमोशी से अपने काम में जुटे मुसलमान वोटर मन ही मन अपना मन बना चुके हैं। उन्हें भले भाजपा से कोई शिकायत नहीं है, मगर कोई समर्थन भी नहीं है।

दिल्ली के जामिया विश्वविद्यालय से एमबीए कर लौटे साकिब कहते हैं कि भाजपा ने काम तो किया है, मगर उसे कभी हमने वोट नहीं दिया। 10 वर्ष के बदलाव के सवाल पर कहते हैं कि कश्मीर और जम्मू का माहौल बिल्कुल अलग है।

हम कभी कश्मीर गए नहीं और ना ही वहां की घटनाओं से हमारा वास्ता है। सभी पार्टियों की तरह भाजपा ने भी टिकट बंटवारे में जाति, धर्म और परिवारवाद को बढ़ावा दिया है। युवाओं को मौका ही नहीं दिया। ऐसे में हम तो अपनी परंपरागत पार्टी को ही वोट देंगे।

10 साल बाद हो रहे चुनाव पर करीब 42 वर्षीय नौशाद अहमद कहते हैं कि अनुच्छेद 370 हटने से उम्मीदों का सूरज अपना दायरा बढ़ाता जा रहा है पर वह भाजपा से इत्तेफाक नहीं रखते। उनका कहना है कि कश्मीर और जम्मू का चुनाव एकदम अलग है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद बदलाव तो हुए हैं।

टूरिज्म को बढ़ावा जरूर मिला है, लेकिन टेररिज्म खत्म नहीं हुआ। हमारा भटिंडी कई राजनीतिक हस्तियों का इस्तकबाल कर चुका है। मगर, भाजपा की विचारधारा हमसे नहीं मिलती। 60 वर्षीय एक और शख्स हैं काशिफ रजा।

इंजीनियर राशिद की रिहाई पर वह कुछ साफ नहीं बोलते। मगर, कहते हैं कि यह कश्मीर नहीं है। जम्मू में हिन्दू ज्यादा हैं तो भाजपा की बढ़त है। मगर, इससे हमें क्या, हम अपने ईमान पर कायम रहेंगे।

कश्मीर के मुद्दे पर...जम्मू में नहीं मिलेंगे वोट
मस्जिद की तकरीर सुन रहे दुकानदार नजीब कहते हैं कि हमारे जम्मू में सियासत नहीं है। कश्मीर के नाम पर वोट मांगने वालोें के पक्ष में जम्मू में कैसे मतदान होगा। जम्मू संभाग की ज्यादातर सीटों पर मुसलमानों की आबादी कम है और भाजपा के पक्ष में माहौल है। हमें अपने विरोध से भी संदेश देना है और वह चुनाव में अपने वोट की ताकत से देंगे।
 

रिझाने में जुटे सभी दल
भाजपा 370 हटाकर अधिकार दिलाने, तीन तलाक खत्म कर महिला सम्मान के जरिए मुसलमान मत पाने की कोशिश में
नेकां और कांग्रेस ने बड़ी संख्या में मुस्लिम प्रत्याशी उतारे हैं, वे 370 की बहाली व विशेष राज्य के दर्जे की पैरवी कर रहे हैं
पीडीपी भी खुद को मुसलमानों की हितैषी बताकर मैदान में है। 370 की वापसी का वादा कर रही है।
 

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