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Jammu Election: सबसे अच्छी केसर, मगर बेरोजगारी का दंश, पांपोर में दहशतगर्दी में बच्चे गए; कीमत चुका रहे परिवार

Tue, 17 Sep 2024 03:26 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 17 Sep 2024 03:26 PM IST
सार

देश भर में केसर का 90 फीसदी हिस्सा पांपोर में होता है। सबसे अच्छी क्वालिटी का केसर यहीं मिलता है। लेकिन, यहां आतंकवाद और बेरोजगारी का दंश सबसे बड़ी चुनौती है। 

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Jammu Kashmir Election 2024 Pampore Assembly Constituency Best Saffron Children Lost to Terrorism in Pampore
कश्मीरी केसर - फोटो : बासित जरगर

विस्तार

श्रीनगर से 20 किमी चलने पर एनएच के अगल-बगल खेतों को तैयार करते लोग नजर आने लगते हैं। बगल में गुजर रहे राहगीर ने बताया कि केसर की खेती की तैयारी हो रही है। देश भर में केसर का 90 फीसदी हिस्सा यहीं होता है। सबसे अच्छी क्वालिटी का केसर यहीं मिलता है। लेकिन, आतंकवाद और बेरोजगारी का दंश सबसे बड़ी चुनौती है। 
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गलती भटके हुए जाहिल बच्चों ने की, खामियाजा मां-बाप और परिवार के लोग उठा रहे हैं। साफगोई से बात कहने वाला यह राहगीर चुनाव का जिक्र छेड़ते ही मुंह मोड़कर आगे बढ़ जाता है। आगे बढ़ने पर पांपोर का रास्ता नजर आने लगता है। गालंदर मोड़ पर लोग भाजपा प्रत्याशी शौकत गयूर अंद्राबी के बयान पर चर्चा कर रहे हैं।
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अंद्राबी ने वोटिंग से दो दिन पहले भाजपा नेतृत्व से जेल में बंद युवाओं को माफी देने की मांग कर दी है। लोगों का तर्क है कि अमन का माहौल बना है। काम भी हो रहा है। दोनों जगह एक जैसी हुकूमत रहेगी, तो तरक्की तेज होगी। जबकि, कई अन्य का तर्क है कि भाजपा ने 370 छीना है, ऐसी पार्टी नहीं चाहिए।
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पांपोर से तीन बार के विधायक और पूर्व मंत्री जहूर अहमद मीर पीडीपी से मैदान में हैं। एनसी ने सांसद रह चुके हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज हसनैन मसूदी को उतारा है। पिछली बार एनसी के यावर अली अब्बास मसूदी मैदान में थे। इन्हें पीडीपी के मीर ने 3,498 वोट से हराया था। 

कांग्रेस के मो. अनवार भट को 4,063 और भाजपा के तत्कालीन प्रत्याशी अली मो. वागे को 2019 वोट मिले थे। इस बार कांग्रेस और एनसी का गठबंधन है, लिहाजा मसूदी मुख्य प्रतिद्वंद्वी माने जा रहे हैं।

निर्दल मो. मकबूल शाह का नाम भी खूब चर्चा में है। कहा जा रहा है कि एनसी और पीडीपी से नाराज कारोबारियों का मकबूल को समर्थन हासिल है। जेल में बंद युवाओं की आवाज उठाने से भाजपा के अंद्राबी को लेकर मतदाताओं में खुसर-फुसर हो रही है।

 

...तो कश्मीर देश में नंबर एक हो जाए
आतंक के गढ़ रहे पांपोर में केसर के काश्तकार मो. फारूक की 50 कनाल की खेती है। कहते हैं, आतंकवाद न हो तो हिंदुस्तान में कश्मीर नंबर-वन हो जाए। पीछे सालों में बहुत गलत हुआ है। लोग अब शांति चाहते हैं। इसी पर वोट पड़ेगा। वह कहते हैं, आतंकी वारदातों के बाद सीमेंट प्लांट बंद हो गया। 

दस हजार लोगों की नौकरी छिन गई। लकड़ी का कारखाना बंद हो गया। खांदी भंडार बंद पड़ा है। अब रोजी-रोटी केसर पर टिकी है। फारुक कहते हैं, बेरोजगारी बड़ा मुद्दा है। दोनों बच्चों को एमबीए कराया, लेकिन नौकरी नहीं है, इसलिए अपना काम शुरू किया है।

 

खौफ अब भी...लोग खुलकर बात नहीं करते..लेकिन उम्मीदें जिंदा
ग्रामीण इलाके शैमपुरा के मो. बशीर केसर के बड़े किसान व कारोबारी हैं। कहते हैं, 1987 तक खूब इंडस्ट्री आईं। 89 से गन कल्चर शुरू हो गया। जिन्होंने उद्योगों के लिए कर्ज लिए थे, उनका पैसा फंस गया। 99 के बाद छोटे उद्योग जरूर आए, लेकिन बड़ा अवसर देने वाले नहीं आए। 

वह कहते हैं कि लोग खुलकर बोलना नहीं चाहते। वजह, आतंकी न जाने आपकी किस बात को दिमाग में बसा लें और फिर मौका पाकर मार दें। वह कहते हैं कि अनपढ़ और गरीब परिवार के बच्चे आतंकियों के जाल में फंस जाते हैं। अब लोगों ने बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया है। यह बड़ी उम्मीद की किरण है।

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