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जम्मू कश्मीर: गठन के दो साल बाद भी अस्तित्व में नहीं आया ACB का आर्थिक विंग
Thu, 16 Mar 2023 02:23 PM IST
kumar गुलशन कुमार
अजय मीनिया, जम्मू
अजय मीनिया, जम्मू
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Thu, 16 Mar 2023 02:23 PM IST
सार
एसीबी का आर्थिक विंग दो साल बाद भी अस्तित्व में नहीं आ सका। मार्च 2020 को इसका गठन तो कर दिया गया, लेकिन इसके जरूरी स्टाफ नियुक्त नहीं किया गया।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
आर्थिक अपराध पर काबू पाने के लिए बनाया गया एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) का आर्थिक विंग दो साल बाद भी अस्तित्व में नहीं आ सका। मार्च 2020 को इसका गठन तो कर दिया गया, लेकिन इसके जरूरी स्टाफ नियुक्त नहीं किया गया। न ही इसके लिए नियम बनाए गए।
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आलम यह है कि आर्थिक अपराध से संबंधित मामलों की जांच ब्यूरो के अन्य लोग ही कर रहे हैं। ब्यूरो के पास हर वर्ष करीब 4500 शिकायतें आती हैं, जिनमें 1500 से अधिक आर्थिक अपराध से जुड़ी हुई होती हैं। दो साल पहले इसके गठन के साथ 56 पद सृजित किए गए थे, जिनमें से एक एसपी को छोड़कर किसी भी पद पर तैनाती नहीं हो पाई है।
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सृजित किए गए पदों में एक एसपी, एक सीनियर पीओ, तीन डीएसपी, तीन पीओ, 10 इंस्पेक्टर, 10 सब इंस्पेक्टर, पांच जूनियर स्केल स्टेनोग्राफर, 20 कांस्टेबल, तीन अर्दली शामिल हैं। लेकिन दो साल हो जाने के बाद भी अब तक इन 56 पदों में से सिर्फ एसपी स्तर के अधिकारी को ही तैनात किया गया है। जबकि बाकी के स्टाफ को पूरा नहीं किया गया है।
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यहां तक कि भर्ती करने के लिए अधिसूचना तक जारी नहीं की गई है। बता दें कि यह स्टाफ जीएडी विभाग को तैनात करना है। क्योंकि इसका प्रशासनिक नियंत्रण जीएडी के पास है।
बनाया जाना था अलग थाना
सूत्रों के अनुसार आर्थिक अपराध के बहुत से मामले लंबित पड़े हैं। लेकिन इस विंग के अब तक शुरू न होने से उनकी जांच पूरी नहीं हो पा रही है। अभी तक इसके लिए नियम तय नहीं हो पाए और न ही इसमें पूरा स्टाफ नियुक्त किया गया है।
इसकी वजह से आर्थिक अपराध के मामले अब भी एंटी करप्शन ब्यूरो में दर्ज हो रहे हैं। आर्थिक विंग के अमल में आने पर इसका अपना थाना होगा। बता दें कि क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी, वित्तीय घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे आर्थिक अपराध गंभीर होते हैं। इस तरह के मामलों की जांच के लिए उक्त विंग को बनाया गया, लेकिन अभी तक यह अस्तित्व में नहीं आ पाया है।