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धर्म के नाम पर पशुवध पर रोक की याचिका हाईकोर्ट ने की रद्द
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जम्मू। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की धारा 28 हटाने की मांग वाली याचिका को रद्द कर दिया। मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्थल और न्यायाधीश सिंधु शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि धार्मिक आस्था को ध्यान में रखकर किए गए प्रावधान इस तरह से नहीं हटा सकते। इससे संबंधित कोई मुद्दा है तो जिला प्रशासन के समक्ष मामले को उठाया जा सकता है।
टेक चंद नामक शख्स ने जनहित याचिका में कहा कि अंधविश्वास के चलते और धर्म के नाम पर पशुओं पर होने वाली क्रूरता पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। इसके अलावा पशुवध को रोकने के लिए पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा 28 को असंवैधानिक घोषित किया जाना चाहिए। इस धारा में धार्मिक मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए पशुवध की अनुमति दी गई है। खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता जिले के संबंधित प्रशासन से संपर्क करने के लिए स्वतंत्र है, जो मामले पर विचार करेगा और कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करेगा। खंडपीठ ने पाया कि याचिकाकर्ता की याचिका में यह कहा गया है कि वह एक हिंदू मंदिर के जन-हितैषी पुजारी हैं, लेकिन वह इसे साबित करने में विफल रहे हैं कि वह किस तरह के जन-उत्साही व्यक्ति हैं या अतीत में उनके द्वारा किस तरह की गतिविधियां की गई हैं। अधिनियम में किए गए प्रावधान धार्मिक भावनाओं और रीति रिवाजों को ध्यान में रखकर किए गए हैं। इसमें अदालत के हस्तक्षेप की जरूरत महसूस नहीं होती, लिहाजा याचिका खारिज की जाती है। जेएनएफ
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चार पर पीएसए बरकरार, एक से हटाया
जम्मू। पांच अलग-अलग फैसलों में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने चार लोगों पर पीएसए बरकरार रखा, जबकि एक पर पीएसए को हटाया है। न्यायमूर्ति ताशी राबस्तन ने प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-ताइबा (एलईटी) के पूर्व आतंकी मोहम्मद यूसुफ माग्रे, जश-ए-मोहम्मद के जावेद अहमद भट्ट, ओजीडब्लयू टीआरएफ उमर नवाज खान, ओजीडब्लयू मुजम्मिल अहमद डार और टीआरएफ आतंकी संगठन के प्रमोटर पर पीएसए को बरकरार रखा। कोर्ट ने शौकत अहमद डार के पीएसए के तहत नजरबंदी को रद्द कर दिया। जेएनएफ
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टेक चंद नामक शख्स ने जनहित याचिका में कहा कि अंधविश्वास के चलते और धर्म के नाम पर पशुओं पर होने वाली क्रूरता पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। इसके अलावा पशुवध को रोकने के लिए पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा 28 को असंवैधानिक घोषित किया जाना चाहिए। इस धारा में धार्मिक मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए पशुवध की अनुमति दी गई है। खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता जिले के संबंधित प्रशासन से संपर्क करने के लिए स्वतंत्र है, जो मामले पर विचार करेगा और कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करेगा। खंडपीठ ने पाया कि याचिकाकर्ता की याचिका में यह कहा गया है कि वह एक हिंदू मंदिर के जन-हितैषी पुजारी हैं, लेकिन वह इसे साबित करने में विफल रहे हैं कि वह किस तरह के जन-उत्साही व्यक्ति हैं या अतीत में उनके द्वारा किस तरह की गतिविधियां की गई हैं। अधिनियम में किए गए प्रावधान धार्मिक भावनाओं और रीति रिवाजों को ध्यान में रखकर किए गए हैं। इसमें अदालत के हस्तक्षेप की जरूरत महसूस नहीं होती, लिहाजा याचिका खारिज की जाती है। जेएनएफ
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चार पर पीएसए बरकरार, एक से हटाया
जम्मू। पांच अलग-अलग फैसलों में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने चार लोगों पर पीएसए बरकरार रखा, जबकि एक पर पीएसए को हटाया है। न्यायमूर्ति ताशी राबस्तन ने प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-ताइबा (एलईटी) के पूर्व आतंकी मोहम्मद यूसुफ माग्रे, जश-ए-मोहम्मद के जावेद अहमद भट्ट, ओजीडब्लयू टीआरएफ उमर नवाज खान, ओजीडब्लयू मुजम्मिल अहमद डार और टीआरएफ आतंकी संगठन के प्रमोटर पर पीएसए को बरकरार रखा। कोर्ट ने शौकत अहमद डार के पीएसए के तहत नजरबंदी को रद्द कर दिया। जेएनएफ
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