Jammu Kashmir: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पीएसए के सहारे गिरफ्तारी और हिरासत अपवाद होनी चाहिए
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत गिरफ्तारी और हिरासत केवल अपवाद के रूप में होनी चाहिए और इसके उल्लंघन पर अवैध हिरासत के परिणाम होंगे।
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जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा, सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) जैसे कानूनों के तहत अधिकार क्षेत्र का प्रयोग गिरफ्तारी व हिरासत के सामान्य कानूनों का अपवाद होना चाहिए। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन व मो. यूसुफ वानी की खंडपीठ ने बडगाम के इमरान रशीद राथर द्वारा इस साल 21 मई को अदालत की एकल पीठ के फैसले के खिलाफ दायर अपील को स्वीकार करते हुए कहा, पीएसए के प्रावधानों के तहत किसी व्यक्ति को हिरासत में लेना कार्यकारी विवेक का प्रयोग है जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्ति के अधिकार का गंभीर उल्लंघन है।
राथर ने 22 नवंबर 2022 को मध्य कश्मीर के जिला मजिस्ट्रेट के हिरासत के फैसले को चुनौती दी थी। खंडपीठ ने कहा, हालांकि सांविधानिक और वैधानिक रूप से वैध है, निवारक निरोध के कानूनों के तहत अधिकार क्षेत्र का प्रयोग गिरफ्तारी और हिरासत के सामान्य कानूनों का अपवाद होना चाहिए। खंडपीठ ने कहा, यदि हिरासत की अवधि समाप्त हो गई है, तो अपीलकर्ता (राथर) को उस तारीख से स्वतंत्र कर दिया जाएगा जिस दिन यह आदेश खुली अदालत में सुनाया गया है और उसके बाद एक दिन के लिए भी अपीलकर्ता को लगातार कैद में रखना अवैध हिरासत माना जाएगा, जिसके लिए प्रतिवादियों (प्राधिकारियों) को परिणाम भुगतने होंगे।