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Jammu Election: ओबीसी समाज सात सीटों पर जीत-हार में निर्णायक, उम्मीदवारी में नहीं हिस्सेदारी; ये जातियां शामिल

Sat, 07 Sep 2024 02:45 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: शाहरुख खान Updated Sat, 07 Sep 2024 02:45 PM IST
सार

जम्मू-कश्मीर में ओबीसी समाज सात सीटों पर जीत-हार में निर्णायक है। लेकिन उम्मीदवारी में हिस्सेदारी नहीं है। जम्मू-कश्मीर में किसी पार्टी ने  उम्मीदवार नहीं उतारा है। 

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Jammu Kashmir Assembly Election 2024 Caste OBC Seats Vote Percentage Win Loss Seats Secnarios
Jammu Election - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विधानसभा चुनाव में जम्मू संभाग की सात सीटों पर हार-जीत में निर्णायक रहने वाला ओबीसी समाज सत्ता के केंद्र से दूर है। समाज के लोगों का कहना है कि कुल जनसंख्या के 11 फीसदी होने के बावजूद हमारे लोग न तो लोकसभा और न ही विधानसभा में चुने जा रहे हैं। ओबीसी को सभी राजनीतिक दलों ने हाशिये पर रखा है। 
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अगामी विधानसभा चुनाव में किसी भी सीट से समाज का कोई नुमाइंदा पार्टी के टिकट से नहीं है। समाज को उम्मीद है कि राजनीतिक दल उनके महत्व को समझें और उन्हें उचित प्रतिनिधित्व दें। आरक्षण में न्याय नहीं होने से समाज में असंतोष है। प्रदेश में ओबीसी समाज के आरक्षण पर दो बार संशोधन का काम किया जा चुका है। 
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पहली बार इन्हें दो फीसदी आरक्षण मिला। इसके बाद 2022 में इसे चार और फिर 2024 में आठ फीसदी किया गया। जबकि समाज की मांग है कि अन्य प्रदेशों की तरह उन्हें 27 फीसदी आरक्षण दिया जाए। प्रदेश में 1992 में पहली बार दो फीसदी आरक्षण दिया गया। 32 वर्ष में आबीसी में जातियां 27 से 42 हो गई लेकिन आरक्षण दो से आठ फीसदी ही पहुंच पाया।
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कश्मीर घाटी की कुलगाम सीट पर सर्वाधिक 70 फीसदी वोट ओबीसी समाज का
कश्मीर की कुलगाम सीट पर सीपीआईएम के नेता मोहम्मद यूसुफ तारिगामी चार बार चुनाव जीत चुके हैं। अब पांचवीं बार मैदान में हैं। इस सीट पर 70 फीसदी वोट ओबीसी समुदाय का है। अन्य छह विस क्षेत्रों में ओबीसी का 25 से 35 फीसदी तक वोट है। किसी भी प्रत्याशी की हार-जीत में समाज महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आजादी से लेकर अब तक किसी भी दल ने कोई भी प्रत्याशी ओबीसी नहीं उतारा है।

इन ग्रामीण जातियों को लाभ, शहर में रहने वालों को नहीं
कुम्हार, धोबी, तेली जातियों को ग्रामीण क्षेत्रों में लाभ दिया गया है। शहर में रहने वाले इन लोगों को आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा है। इसी तरह बोवरिया बिरादरी को राज्य में ओबीसी का लाभ मिल रहा है जबकि केंद्रीय सूची में न होने पर केंद्र का लाभ नहीं मिल रहा।

 

ये जातियां हैं ओबीसी में शामिल
जम्मू कश्मीर में बागे, घिरथ, जाट, सैनी, शोटी, किश्चन, सुनार, तेली, तेरना, बोजरु, गोरखा, गोरखन, वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजी, आचार्य ब्राह्मण नई जातियां शामिल की गईं। इसके अलावा हांजी, मछेरा, मरकवाल, कुम्हार, शकसाज, मोची, भंगी, नाई, धोबी, भगत, निरासी, मदारी, कुलफीकर, डमली फीकर, डोम, सुपरी बातल, सांसी, शिकलीघर, जीवर, घराटी, तेली, लोहार, दरखान, बढ़ई, लुबाणा, शिरगोंजरी, जोगी, वोवरिया शामिल हैं।
 

आरक्षण कुल आबादी के हिसाब से मिलता है। प्रदेश में सरकारों ने सर्वे नहीं करवाया है। ऐसे में तस्वीर साफ नहीं है। सर्वे में 27 प्रतिशत से ज्यादा आबादी आती है, तो आरक्षण 27 फीसदी मिलना जरूरी है। दलों को सर्वे करवाना चाहिए और अधिकार दिलाने चाहिए। -आरसी गांधी, पूर्व मुख्य न्यायाधीश राजस्थान हाईकोर्ट
 

वोट बैंक की हो रही राजनीति
प्रदेश में आठ फीसदी आरक्षण मिल रहा है। अभी तक ओबीसी समुदाय को प्रतिनिधित्व करने का मौका नहीं मिला। लोगों को वोट के लिए ही इस्तेमाल किया जा रहा है।- बंशी लाल, ओबीसी
 

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