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J&K: अमशीपोरा फर्जी मुठभेड़ में सेना के कैप्टन को उम्रकैद, जुलाई 2020 में शोपियां में मारे गए थे तीन युवक

Mon, 06 Mar 2023 01:36 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Mon, 06 Mar 2023 01:36 PM IST
सार

अधिकारियों ने बताया कि कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी में पाया गया कि कैप्टन सिंह ने सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम (अफ्स्पा) के तहत निहित अधिकारों का दुरुपयोग किया।

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jammu kashmir Army Captain gets life term in Amshipora fake encounter shopian
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : file photo

विस्तार

दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले के अमशीपोरा में 18 जुलाई 2020 में फर्जी मुठभेड़ में तीन युवकों की हत्या के मामले में सेना के एक कैप्टन को उम्रकैद की सजा की सिफारिश की गई है। सेना की अदालत ने एक साल से भी कम अवधि में कोर्ट मार्शल की कार्यवाही में कैप्टन भूपेंद्र सिंह को यह सजा सुनाई है। सेना के उच्चाधिकारियों की मंजूरी के बाद सजा पर अमल होगा।

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अधिकारियों ने बताया कि कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी में पाया गया कि कैप्टन सिंह ने सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम (अफ्स्पा) के तहत निहित अधिकारों का दुरुपयोग किया। सेना के सूत्रों ने यह कहते हुए इस पर टिप्पणी करने से इन्कार कर दिया कि ऐसे मामलों में शामिल प्रक्रिया अभी जारी है।
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कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी के बाद साक्ष्य का सारांश दिया गया, जो दिसंबर 2020 के अंतिम सप्ताह में पूरा हुआ। उस समय सेना ने एक बयान जारी कर कहा था कि सबूत के सारांश को दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसमें आगे बढ़ने के लिए कानूनी सलाहकारों के परामर्श से संबंधित अफसरों द्वारा इसकी जांच की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि सेना ने राजोरी से अबरार अहमद के पिता मोहम्मद यूसुफ को कोर्ट मार्शल की कार्यवाही में पेश होने के लिए भी बुलाया था, साथ ही सुनवाई के दौरान उन्हें अपने बेटे के लापता होने की रिपोर्ट देने के लिए कहा गया था।
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सोशल मीडिया पर उठी आवाज तो हुई जांच

जम्मू संभाग के राजोरी जिले के रहने वाले इम्तियाज अहमद, अबरार अहमद और मोहम्मद इबरार को आतंकवादी बताकर शोपियां जिले के एक गांव में 18 जुलाई, 2020 को मुठभेड़ में मार गिराया गया था। सोशल मीडिया पर इस मुठभेड़ के विरोध में आवाज उठने पर सेना ने कोर्ट ऑफ इंक्वायरी का गठन किया था। जिसमें प्रथम दृष्टया इस बात के सुबूत पाए गए कि सैनिकों ने अफस्पा के तहत प्राप्त शक्तियों का दुरुपयोग किया। कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी में कैप्टन को दोषी पाया गया।

एसआईटी की चार्जशीट में था नाम
जम्मू -कश्मीर पुलिस ने एक विशेष जांच दल का भी गठन किया था जिसने फर्जी मुठभेड़ के लिए कप्तान सिंह सहित तीन लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। इस चार्जशीट में दो अन्य नागरिकों ताबिश नजीर और बिलाल अहमद लोन का भी नाम है।


एलजी ने दिलाया था उचित कार्रवाई का भरोसा
जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 2020 में राजोरी में परिवारों का दौरा किया था और उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश से अवगत कराया था कि सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है और सरकार की ओर से सभी सहायता के साथ उनकी देखभाल की जाएगी। बाद में डीएनए टेस्ट के जरिए तीनों युवकों की पहचान की पुष्टि की गई। अक्टूबर 2020 में शवों को उनके परिवारों को बारामुला में सौंप दिया गया और राजोरी में उनके पैतृक गांव में दफन कर दिया गया।

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