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जम्मू कश्मीर: तीन CMO सहित 30 डॉक्टरों की नियुक्ति संदेह के घेरे में, पोर्टल पर 533 कर्मियों के दस्तावेज गायब
Fri, 03 Nov 2023 05:21 PM IST
kumar गुलशन कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Fri, 03 Nov 2023 05:21 PM IST
सार
स्वास्थ्य विभाग के 533 कर्मचारियों के नियुक्ति संबंधी दस्तावेज नहीं मिले हैं। इनमें तीन मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) सहित 30 डाॅक्टर भी शामिल हैं। इन डॉक्टरों में आठ डेंटल सर्जन हैं। इसके अलावा पैरा मेडिकल व अन्य कर्मचारी हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (जेकेएचआरएमएस) पोर्टल पर प्रारंभिक नियुक्ति संबंधी जरूरी दस्तावेज जिन कर्मचारियों के उपलब्ध नहीं हैं, उनमें सबसे ज्यादा संख्या स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा विभाग के कर्मचारियों की है।
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विभाग के 533 कर्मचारियों के नियुक्ति संबंधी दस्तावेज नहीं मिले हैं। इनमें तीन मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) सहित 30 डाॅक्टर भी शामिल हैं। इन डॉक्टरों में आठ डेंटल सर्जन हैं। इसके अलावा पैरा मेडिकल व अन्य कर्मचारी हैं।
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सरकार ने प्रारंभिक नियुक्ति संबंधी दस्तावेज न मिलने के मामलों में संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों का वेतन रोकने के आदेश दिए हैं। उक्त पोर्टल पर विभाग के 500 से अधिक डाॅक्टर और कर्मचारी अपनी प्रारंभिक नियुक्ति नहीं दिखा पाए हैं। सूत्रों के अनुसार प्रारंभिक नियुक्ति वाले अधिकांश मामले कश्मीर से हैं और इनमें चतुर्थ श्रेणी कर्मियों से लेकर अन्य वर्गों के कर्मचारी शामिल हैं।
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सरकार की ओर से दी गई जानकारी के तहत स्वास्थ्य विभाग में जिन कर्मचारियों के प्रारंभिक नियुक्ति संबंधी दस्तावेज नहीं मिले हैं, इनमें जूनियर ग्रेड नर्सों की संख्या सर्वाधिक है। इसके अलावा लैब तकनीशियन, नर्सिंग अर्दली (एनओ), डायलिसिस तकनीशियन, ईसीजी तकनीशियन, एक्सरे सहायक, थियेटर सहायक, एमआरटी तकनीशियन, सीनियर आर थैरेपी तकनीशियन, एनेस्थीसिया सहायक, जूनियर रेडियोथैरेपी तकनीशियन, अटेंडेंट, थियेटर ब्वाय, एफएमपीएचडब्ल्यू, अटेंडेंट जनरल कैडर, पलंबर, फार्मासिस्ट, मल्टीटास्किंग स्टाफ, कुक, रजिस्ट्रार, एएनएम, दाई, फिजियोथैरेपिस्ट, जमादार, सफाई वाला, जूनियर डेंटल तकनीशियन, कंप्यूटर प्रोग्रामर आदि शामिल हैं।
पिछले दरवाजे से भर्ती की आशंका
जिन कर्मचारियों के नियुक्ति से संबंधित प्रारंभिक दस्तावेज नहीं मिले हैं उनमें बड़ी संख्या में बैकडोर एंट्री नियुक्ति के मामले हो सकते हैं। ऐसी आशंका है कि ये कर्मचारी किसी भर्ती प्रक्रिया से नहीं निकले होंगे और सीधे मिलीभगत से विभाग में दाखिल हुए होंगे। जिसके बाद पदोन्नति व अन्य साधनों के साथ आगे बढ़ते गए। दस्तावेज न मिलने वाले मामलों में ऐसे कर्मचारियों पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। सरकार लंबे समय से ऐसे कर्मचारियों के दस्तावेजों का सत्यापन करवा रही है।