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जम्मू कश्मीर :  ये जाबांज खोदेगे आतंकवाद की कब्र... विशेष प्रशिक्षण प्राप्त 860 कांस्टेबल तैनात

Thu, 04 Jul 2024 11:48 AM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू कश्मीर
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू कश्मीर Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Thu, 04 Jul 2024 11:48 AM IST
सार

डीजीपी आरआर स्वैन ने कहा कि इसमें कोई दोराय नहीं कि राजोरी, पुंछ, डोडा, किश्तवाड़, रियासी व रामबन में आतंकियों की मौजूदगी है। लेकिन पुलिस भी इन पर कार्रवाई करने में सफल हो रही है। 

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Jammu Kashmir 860 specially trained constables deployed to crack to anti terrorist operation
जम्मू कश्मीर पुलिस - फोटो : संवाद

विस्तार

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने आतंकवाद से निपटने के लिए एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। महकमे के 860 पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण देकर सीमावर्ती और आतंकवाद ग्रस्त क्षेत्रों में भेजा गया है। खास बात यह है कि कर्मियों को उन्हीं क्षेत्रों में भेजा गया है, जहां के ये रहने वाले हैं, ताकि ये लोग अपने क्षेत्र में रहकर आतंकवाद से जुड़ी हर गतिविधि पर नजर रख सकें। 

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आम नागरिकों से तालमेल बढ़ाकर रखें। ऐसा पुलिस ने 1990 के दशक में भी किया था। तब पुलिस ने अपना नेटवर्क इसी तरह खड़ा किया था। राजोरी-पुंछ में पुलिस ने लोगों के साथ मिलकर ऐसा नेटवर्क खड़ा किया कि आतंकवाद का सफाया कर दिया गया। ठीक वही तकनीक फिर अपनाई गई है।

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डीजीपी आरआर स्वैन ने कहा कि इसमें कोई दोराय नहीं कि राजोरी, पुंछ, डोडा, किश्तवाड़, रियासी व रामबन में आतंकियों की मौजूदगी है। लेकिन पुलिस भी इन पर कार्रवाई करने में सफल हो रही है। 

इन इलाकों में आतंकवाद से निपटने के लिए 860 पुलिस कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया है। इनमें 544 जम्मू और 316 कश्मीर के लिए भेजे गए हैं। ये जवान पुंछ, राजोरी, जम्मू, रियासी, उधमपुर, कठुआ, डोडा, किश्तवाड़, रामबन और कश्मीर के अलग-अलग हिस्सों में तैनात रहेंगे।

विदेशी आतंकी अधिक, जल्द करेंगे खात्मा- आरआर स्वैन

डीजीपी आरआर स्वैन ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद में शामिल होने युवाओं की गिनती कम हुई है। आतंकियों की भर्ती कम हुई है। लेकिन विदेशी आतंकियों की मौजूदगी है। जिनका जल्द ही खात्मा किया जाएगा। आतंकवाद के दौर से लेकर अब तक रियासी मे 400 से अधिक आतंकी मारे जा चुके हैं।  इतने ही राजोरी में भी। यह भी कहा कि राजोरी-पुंछ में सक्रिय आतंकियों के पास भी खास प्रशिक्षण है। इसलिए ये पकड़ में नहीं आ रहे। ये लोग सीमित जरूरतों के साथ रह रहे हैं, इसलिए इन तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है।

  • -भय का स्तर पांच साल पहले की तुलना में कम
  • - विदेशी आतंकवादी घुसपैठ करने में कामयाब हो गए 
  • - पाकिस्तान आतंकियों की घुसपैठ के लिए नए तरीके खोज रहा
  • - आतंकियों का समर्थन करने वाले एक बड़ी चुनौती, इनसे योजनाबद्ध तरीके से निपटा जा रहा
  • - देशद्रोही समर्थकों से कानून के तहत निपटा जा रहा
  • - अलगाववाद की वकालत करने वाली, आतंकवाद को वैध बनाने, महिमामंडित करने या बढ़ावा देने वाली विचारधारा को अपराध माना जाएगा और उससे सख्ती से निपटा जाएगा
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