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जम्मू कश्मीर: आतंकियों के लिए वरदान बनीं 14 मैसेंजर एप पर रोक, दहशतगर्द और OGW करते थे इस्तेमाल
Tue, 02 May 2023 04:41 PM IST
kumar गुलशन कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू कश्मीर
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू कश्मीर
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Tue, 02 May 2023 04:41 PM IST
सार
कश्मीर और राजोरी-पुंछ के हिस्सों में आतंकी अपने मददगारों से इन एप के जरिये संपर्क कर रहे थे। खुफिया एजेंसियों ने जांच में पाया कि भारत में इनका कोई प्रतिनिधि नहीं है न ही कोई कार्यालय है।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : ANI
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विस्तार
आतंकवाद का जरिया बन रहे कई मोबाइल एप को बंद कर दिया है। इन एप के जरिए ही पाकिस्तान में बैठे आतंकी हैंडलर प्रदेश में रहने वाले आतंकियों के संपर्क में हैं। खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से इन एप के नाम बताकर इन्हें बंद करने की सिफारिश की थी।
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इसके बाद इन्हें बंद कर दिया गया है। जानकारी के अनुसार ऐसी 14 मोबाइल एप हैं, जिनका आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल हो रहा था। इनमें क्रायपवाइजर, एनिग्मा, सेफस्विस, विकरमे, मीडियाफायर, ब्रियर, बीचैट, नंदबॉक्स, कोनियन, आईएमओ, एलिमेंट, सेकेंड लाइन, जंगी, थ्रेमा जैसे एप शामिल हैं।
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सूत्रों का कहना है कि कश्मीर और राजोरी-पुंछ के हिस्सों में आतंकी अपने मददगारों से इन एप के जरिये संपर्क कर रहे थे। खुफिया एजेंसियों ने जांच में पाया कि भारत में इनका कोई प्रतिनिधि नहीं है न ही कोई कार्यालय है। इसलिए जानकारी संबंधी उनसे संपर्क नहीं किया जा सकता था।
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यह भी बताया गया कि इनमें से अधिकतर एप को यूजर्स को सिक्रेसी प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया था, ताकि इसका पता नहीं लगाया जा सके। विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से गृह मंत्रालय ने पाया कि इन मोबाइल एप ने आतंकवादियों और उनके सहयोगियों को गतिविधियों में शामिल होने में मदद की।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद से संबंधित मामलों की जांच के दौरान कई मौकों पर सुरक्षा बलों और जांच एजेंसियों ने ऑपरेशन में मारे गए आतंकवादियों से बरामद मोबाइल फोन में डाउनलोड किए गए इन एप को पाया है। एक जांच के दौरान यह पता चला कि इन एप का इस्तेमाल पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों के एजेंडे को बढ़ाने के लिए किया गया था। साथ ही गिरफ्तार किए गए कई आतंकी मददगारों (ओजीडब्ल्यू) के फोन में इनमें से कम से कम एक एप था।
सर्वर अलग-अलग देशों में
पिछले कुछ वर्षों में आतंकवादियों के संचार नेटवर्क में सरकार सेंध लगाने की कोशिश कर रही है। जिन एप को ब्लॉक किया गया है, उनके सर्वर अलग-अलग देशों में हैं, जिससे उन्हें ट्रेस करना मुश्किल हो जाता है। साथ ही भारी एन्क्रिप्शन के कारण इन एप को इंटरसेप्ट करने का कोई तरीका नहीं है।
इन एप का इस्तेमाल कर रहा था टीआरएफ
एक मामले की जांच में पाया गया कि हिजबुल मुजाहिद्दीन, पीएएफएफ और द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) के सदस्य एक कनाडाई मैसेजिंग एप और एप डेवलपमेंट प्लेटफॉर्म नंदबॉक्स मैसेंजर का प्रयोग कर रहे थे।