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जम्मू कश्मीर: प्रदेश में 1.82 लाख राशन कार्ड धारक ले रहे थे दो जगह अनाज, सरकार को लगा करोड़ों का चुना
Wed, 21 Dec 2022 03:05 PM IST
kumar गुलशन कुमार
सतीश वालिया, जम्मू
सतीश वालिया, जम्मू
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Wed, 21 Dec 2022 03:05 PM IST
सार
प्रदेश में कई परिवारों ने दो-दो राशन कार्ड बनवा लिए थे। ऐसे में उपभोक्ता को एक ही नाम पर दो जगहों से राशन जारी हो रहा था।
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राशन
- फोटो : istock
विस्तार
केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में औसतन हर आठवां राशन कार्ड डुप्लीकेट पाया गया है। कुछ परिवारों के दो-दो कार्ड बने हुए थे। वे सरकारी डिपो से दोगुना राशन ले रहे थे। अब ऐसे डुप्लीकेट कार्डों को सरकारी रिकॉर्ड से हटा दिया गया है। पहले 27 लाख के करीब उपभोक्ता थे। अब 25 लाख 18 हजार ही रह गए हैं। डुप्लीकेट राशन कार्ड की संख्या 1.82 लाख है। इससे हर माह राशन जारी होने के नाम पर सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लग रहा था। रिकॉर्ड से राशन कार्ड हटने के बाद अब सरकारी राशि बच रही है।
प्रदेश में कई परिवारों ने दो-दो राशन कार्ड बनवा लिए थे। ऐसे में उपभोक्ता को एक ही नाम पर दो जगहों से राशन जारी हो रहा था। जैसे ही 2021 में रिकॉर्ड ऑनलाइन होने की प्रक्रिया शुरू हुई और राशन पीओएस के माध्यम से मिलने लगा तो दोहरे राशन कार्ड उपभोक्ताओं के नाम सार्वजनिक होने लगे। सितंबर 2021 में लाखों उपभोक्ताओं के नाम सार्वजनिक हुए। इनमें 92 हजार उपभोक्ता कश्मीर घाटी जबकि 90 हजार उपभोक्ता जम्मू संभाग में मिले। विभागीय कार्रवाई के दौरान चौंकाने वाला सच यह सामने आया कि औसतन आठवां राशन कार्ड डुप्लीकेट पाया गया। अब नई व्यवस्था के हिसाब से उपभोक्ताओं को पीओएस में अंगूठा लगाने के बाद राशन दिया जा रहा है। साथ ही सरकारी रिकॉर्ड में पंजीकृत उपभोक्ताओं के लिए ही राशन खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के स्टोरों से मिल रहा है।
इस तरह बने थे डुप्लीकेट राशन कार्ड
प्रदेश में सरकारी और निजी नौकरी करने वाले उपभोक्ता गृह जिले से दूसरे जिले में सेवारत थे। ऐसे में डिपो होल्डरों के माध्यम से राशन कार्ड बनवाए गए। राशन कार्ड बनाने के लिए औपचारिकताएं सरल थीं। ऐसे में लाखों लोगों ने डुप्लीकेट राशन कार्ड बनवा लिए थे।
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एक करोड़ उपभोक्ता ले रहे राशन
प्रदेश में मौजूदा समय में 25 लाख के करीब राशन कार्ड हैं। इसमें एक करोड़ से ज्यादा लोग राशन प्रति माह डिपो से ले रहे हैं। प्रदेश में 66 सौ के करीब डिपो हैं।
डुप्लीकेट राशन कार्डों को रद्द किया जा रहा है। इस पर प्रक्रिया चल रही है। अभी तक हजारों राशन कार्ड बंद कर दिए गए हैं और सरकारी रिकॉर्ड से ऐसे राशन कार्ड उपभोक्ताओं को हटा दिया गया है। औसतन आठवां राशन कार्ड डुप्लीकेट पाया गया है। -डॉ. अब्दुल सलम मीर, निदेशक, खाद्य, आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग कश्मीर घाटी।
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प्रदेश में कई परिवारों ने दो-दो राशन कार्ड बनवा लिए थे। ऐसे में उपभोक्ता को एक ही नाम पर दो जगहों से राशन जारी हो रहा था। जैसे ही 2021 में रिकॉर्ड ऑनलाइन होने की प्रक्रिया शुरू हुई और राशन पीओएस के माध्यम से मिलने लगा तो दोहरे राशन कार्ड उपभोक्ताओं के नाम सार्वजनिक होने लगे। सितंबर 2021 में लाखों उपभोक्ताओं के नाम सार्वजनिक हुए। इनमें 92 हजार उपभोक्ता कश्मीर घाटी जबकि 90 हजार उपभोक्ता जम्मू संभाग में मिले। विभागीय कार्रवाई के दौरान चौंकाने वाला सच यह सामने आया कि औसतन आठवां राशन कार्ड डुप्लीकेट पाया गया। अब नई व्यवस्था के हिसाब से उपभोक्ताओं को पीओएस में अंगूठा लगाने के बाद राशन दिया जा रहा है। साथ ही सरकारी रिकॉर्ड में पंजीकृत उपभोक्ताओं के लिए ही राशन खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के स्टोरों से मिल रहा है।
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इस तरह बने थे डुप्लीकेट राशन कार्ड
प्रदेश में सरकारी और निजी नौकरी करने वाले उपभोक्ता गृह जिले से दूसरे जिले में सेवारत थे। ऐसे में डिपो होल्डरों के माध्यम से राशन कार्ड बनवाए गए। राशन कार्ड बनाने के लिए औपचारिकताएं सरल थीं। ऐसे में लाखों लोगों ने डुप्लीकेट राशन कार्ड बनवा लिए थे।
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एक करोड़ उपभोक्ता ले रहे राशन
प्रदेश में मौजूदा समय में 25 लाख के करीब राशन कार्ड हैं। इसमें एक करोड़ से ज्यादा लोग राशन प्रति माह डिपो से ले रहे हैं। प्रदेश में 66 सौ के करीब डिपो हैं।
डुप्लीकेट राशन कार्डों को रद्द किया जा रहा है। इस पर प्रक्रिया चल रही है। अभी तक हजारों राशन कार्ड बंद कर दिए गए हैं और सरकारी रिकॉर्ड से ऐसे राशन कार्ड उपभोक्ताओं को हटा दिया गया है। औसतन आठवां राशन कार्ड डुप्लीकेट पाया गया है। -डॉ. अब्दुल सलम मीर, निदेशक, खाद्य, आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग कश्मीर घाटी।