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Jammu News: जिन इलाकों में नहीं हैं संचार सेवाएं, इंटरनेट पहुंचा रह बीएसएनएल
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विश्व दूरसंचार दिवस
-जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के दुर्गम इलाकों में 509 टावर किए जा चुके हैं स्थापित
-आपात स्थिति में कोई देश न उठा ले फायदा, इसलिए पूरी तरह से स्वदेशी तकनीकी का इस्तेमाल
गौरव रावत
जम्मू। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पहाड़ी, सीमावर्ती और दुर्गम इलाकों में अब इंटरनेट की पहुंच एक हकीकत बनती जा रही है। बीएसएनएल ने बीते डेढ़ साल में इन क्षेत्रों के 1,180 चिन्हित स्थलों में से 509 पर मोबाइल टावर स्थापित कर लिए हैं। ये वे इलाके हैं, जहां अभी तक मोबाइल नेटवर्क या 4जी इंटरनेट की सुविधा नहीं पहुंची थी। इन दुर्गम क्षेत्रों में सियाचिन, गलवान और डेमचोक जैसे इलाके भी शामिल हैं, जो सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
बीएसएनएल के जम्मू-कश्मीर सर्किल के प्रधान महाप्रबंधक कुश कुमार ने बताया कि यह कार्य भारत सरकार के 4जी सैचुरेशन प्रोजेक्ट के तहत किया जा रहा है। सरकार ने इसके लिए यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड (अब डिजिटल भारत निधि) के तहत बजट जारी किया है, ताकि किसी निजी कंपनी के भरोसे न रहना पड़े। जम्मू-कश्मीर के कई इलाके मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण देश के बाकी हिस्सों से कट जाते हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में मजबूत नेटवर्क और तेज इंटरनेट न केवल प्रशासनिक कार्यों के लिए जरूरी है, बल्कि आम जनता के लिए भी जीवनरेखा की तरह काम करता है। बीएसएनएल की यह पहल आपदा प्रबंधन, राहत कार्य और स्वास्थ्य सेवाओं तक त्वरित पहुंच में अहम साबित हो रही है।
स्वदेशी तकनीक पर रखी आत्मनिर्भरता की नींव
बीएसएनएल की यह संचार परियोजना पूरी तरह से देश में विकसित तकनीक पर आधारित है। इसमें टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), तेजस नेटवर्क्स और सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (सी-डॉट) जैसी भारतीय कंपनियों की साझेदारी है। इसका उद्देश्य न केवल संचार को मजबूत करना है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि कोई बाहरी देश तकनीकी रूप से हस्तक्षेप न कर सके। इससे देश की साइबर सुरक्षा को भी मजबूती मिली है। बीएसएनएल ने कई सीमावर्ती इलाकों में टावर स्थापित किए हैं, जहां अभी तक संचार सुविधा नहीं थी।
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जून 2025 तक सभी टावर 4जी और फिर 5जी की तैयारी
बीएसएनएल की योजना है कि जून 2025 तक प्रदेश के सभी टावर 4जी कनेक्टिविटी की सुविधाओं से लैस हो जाएं। बीएसएनएल ने अपने पुराने 995 टावरों में से करीब 90 फीसदी को 4जी तकनीक से अपग्रेड कर दिया है। उसके बाद 5जी तकनीक पर काम शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही बीते छह महीने में बीएसएनएल ने माता वैष्णोदेवी यात्रा मार्ग में छह नए टावर भी स्थापित किए हैं।
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-जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के दुर्गम इलाकों में 509 टावर किए जा चुके हैं स्थापित
-आपात स्थिति में कोई देश न उठा ले फायदा, इसलिए पूरी तरह से स्वदेशी तकनीकी का इस्तेमाल
गौरव रावत
जम्मू। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पहाड़ी, सीमावर्ती और दुर्गम इलाकों में अब इंटरनेट की पहुंच एक हकीकत बनती जा रही है। बीएसएनएल ने बीते डेढ़ साल में इन क्षेत्रों के 1,180 चिन्हित स्थलों में से 509 पर मोबाइल टावर स्थापित कर लिए हैं। ये वे इलाके हैं, जहां अभी तक मोबाइल नेटवर्क या 4जी इंटरनेट की सुविधा नहीं पहुंची थी। इन दुर्गम क्षेत्रों में सियाचिन, गलवान और डेमचोक जैसे इलाके भी शामिल हैं, जो सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
बीएसएनएल के जम्मू-कश्मीर सर्किल के प्रधान महाप्रबंधक कुश कुमार ने बताया कि यह कार्य भारत सरकार के 4जी सैचुरेशन प्रोजेक्ट के तहत किया जा रहा है। सरकार ने इसके लिए यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड (अब डिजिटल भारत निधि) के तहत बजट जारी किया है, ताकि किसी निजी कंपनी के भरोसे न रहना पड़े। जम्मू-कश्मीर के कई इलाके मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण देश के बाकी हिस्सों से कट जाते हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में मजबूत नेटवर्क और तेज इंटरनेट न केवल प्रशासनिक कार्यों के लिए जरूरी है, बल्कि आम जनता के लिए भी जीवनरेखा की तरह काम करता है। बीएसएनएल की यह पहल आपदा प्रबंधन, राहत कार्य और स्वास्थ्य सेवाओं तक त्वरित पहुंच में अहम साबित हो रही है।
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स्वदेशी तकनीक पर रखी आत्मनिर्भरता की नींव
बीएसएनएल की यह संचार परियोजना पूरी तरह से देश में विकसित तकनीक पर आधारित है। इसमें टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), तेजस नेटवर्क्स और सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (सी-डॉट) जैसी भारतीय कंपनियों की साझेदारी है। इसका उद्देश्य न केवल संचार को मजबूत करना है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि कोई बाहरी देश तकनीकी रूप से हस्तक्षेप न कर सके। इससे देश की साइबर सुरक्षा को भी मजबूती मिली है। बीएसएनएल ने कई सीमावर्ती इलाकों में टावर स्थापित किए हैं, जहां अभी तक संचार सुविधा नहीं थी।
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जून 2025 तक सभी टावर 4जी और फिर 5जी की तैयारी
बीएसएनएल की योजना है कि जून 2025 तक प्रदेश के सभी टावर 4जी कनेक्टिविटी की सुविधाओं से लैस हो जाएं। बीएसएनएल ने अपने पुराने 995 टावरों में से करीब 90 फीसदी को 4जी तकनीक से अपग्रेड कर दिया है। उसके बाद 5जी तकनीक पर काम शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही बीते छह महीने में बीएसएनएल ने माता वैष्णोदेवी यात्रा मार्ग में छह नए टावर भी स्थापित किए हैं।