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Jammu News: मुद्दा भी, सवाल भी...जानीपुर से रैका शिफ्ट न हो हाईकोर्ट
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प्रत्याशियों को दी जा रहीं 1987 में जम्मू दरबार और 1994 में मुबारक मंडी से हाईकोर्ट शिफ्ट करने के आंदोलन की मिसालें
अजय मीनिया
जम्मू। हाईकोर्ट जानीपुर से रैका शिफ्ट नहीं होना चाहिए। इसके लिए आप लड़ाई लड़ेंगे? हम आपसे यही चाहते हैं। ये मुद्दा और सवाल हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के चुनाव में हर मतदाता की जुबां पर है। जो मतदाता द्वारा उनके पास पहुंचने वाले प्रत्येक प्रत्याशियों के सामने उठाया जा रहा है।
प्रत्याशियों के सामने 1987 में जम्मू से दरबार को हमेशा के लिए शिफ्ट करने और मुबारक मंडी से जिला अदालतों को जानीपुर में शिफ्ट करने वाले मामलों को लेकर चले आंदोलनों की मिसालें दी जा रही हैं, जिन्हें बार एसोसिएशन ने लड़ा और जीता।
इसके अलावा जम्मू में एम्स को लेकर चले आंदोलन के उदाहरण भी दिए जा रहे हैं। प्रत्याशियों को जनरल हाउस में पास किए गए प्रस्ताव से अवगत भी कराया जा रहा है। इसमें जानीपुर से हाईकोर्ट को रैका न शिफ्ट करने का कड़ा विरोध है। यह बार एसोसिएशन चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा है। इसके अलावा बहुमंजिला इमारत बनाने को लेकर भी मतदाता प्रत्याशियों से सवाल कर रहे हैं।
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जब जम्मू दरबार के लिए अड़ गई बार
वर्ष 1987 में नेकां और कांग्रेस सरकार के सीएम फारूक अब्दुल्ला ने एक आदेश दिया कि दरबार सिर्फ श्रीनगर में रहेगा। जम्मू में दरबार मूव नहीं होगा। इस फैसले के विरोध में बार एसोसिएशन जम्मू विरोध में आ गई। तब रही बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डी के खजूरिया कहते हैं कि हमनें इसका विरोध किया। हमारे पीछे जम्मू के चैंबर, ट्रांसपोर्ट संगठन और यहां तक कि राजनीतिक दल भी खड़े हो गए थे। 60 दिन लड़ाई लड़ी। केंद्रीय गृह मंत्री रहे बूटा सिंह ने हस्तक्षेप किया। अंत में हम लड़ाई जीत गए। लिहाजा आने वाली बार इसी तरह से लड़े।
हाईकोर्ट और वकीलों की लड़ाई में वकीलों की जीत
हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एच सी जलमेरिया का कहना है कि हम चाहते हैं कि आने वाली एसोसिएशन बार के इतिहास को बनाए रखे। जरूरत पड़े तो हाईकोर्ट के सामने भी अड़ जाएं। जैसा 1994 में हुआ था। दरअसल, तब मुबारक मंडी में हाईकोर्ट और जिला कोर्ट चलती थी। मुबारक मंडी से हाईकोर्ट को जानीपुर कोर्ट शिफ्ट कर दिया। वकील चाहते थे कि जिला कोर्ट भी जानीपुर कोर्ट शिफ्ट हो। इसे लेकर वकीलों ने लड़ाई लड़ी और जीते। ऐसे ही बार का रवैया होना चाहिए। रैका में किसी कीमत पर जानीपुर से हाईकोर्ट न शिफ्ट होने दिया जाए।
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अजय मीनिया
जम्मू। हाईकोर्ट जानीपुर से रैका शिफ्ट नहीं होना चाहिए। इसके लिए आप लड़ाई लड़ेंगे? हम आपसे यही चाहते हैं। ये मुद्दा और सवाल हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के चुनाव में हर मतदाता की जुबां पर है। जो मतदाता द्वारा उनके पास पहुंचने वाले प्रत्येक प्रत्याशियों के सामने उठाया जा रहा है।
प्रत्याशियों के सामने 1987 में जम्मू से दरबार को हमेशा के लिए शिफ्ट करने और मुबारक मंडी से जिला अदालतों को जानीपुर में शिफ्ट करने वाले मामलों को लेकर चले आंदोलनों की मिसालें दी जा रही हैं, जिन्हें बार एसोसिएशन ने लड़ा और जीता।
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इसके अलावा जम्मू में एम्स को लेकर चले आंदोलन के उदाहरण भी दिए जा रहे हैं। प्रत्याशियों को जनरल हाउस में पास किए गए प्रस्ताव से अवगत भी कराया जा रहा है। इसमें जानीपुर से हाईकोर्ट को रैका न शिफ्ट करने का कड़ा विरोध है। यह बार एसोसिएशन चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा है। इसके अलावा बहुमंजिला इमारत बनाने को लेकर भी मतदाता प्रत्याशियों से सवाल कर रहे हैं।
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जब जम्मू दरबार के लिए अड़ गई बार
वर्ष 1987 में नेकां और कांग्रेस सरकार के सीएम फारूक अब्दुल्ला ने एक आदेश दिया कि दरबार सिर्फ श्रीनगर में रहेगा। जम्मू में दरबार मूव नहीं होगा। इस फैसले के विरोध में बार एसोसिएशन जम्मू विरोध में आ गई। तब रही बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डी के खजूरिया कहते हैं कि हमनें इसका विरोध किया। हमारे पीछे जम्मू के चैंबर, ट्रांसपोर्ट संगठन और यहां तक कि राजनीतिक दल भी खड़े हो गए थे। 60 दिन लड़ाई लड़ी। केंद्रीय गृह मंत्री रहे बूटा सिंह ने हस्तक्षेप किया। अंत में हम लड़ाई जीत गए। लिहाजा आने वाली बार इसी तरह से लड़े।
हाईकोर्ट और वकीलों की लड़ाई में वकीलों की जीत
हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एच सी जलमेरिया का कहना है कि हम चाहते हैं कि आने वाली एसोसिएशन बार के इतिहास को बनाए रखे। जरूरत पड़े तो हाईकोर्ट के सामने भी अड़ जाएं। जैसा 1994 में हुआ था। दरअसल, तब मुबारक मंडी में हाईकोर्ट और जिला कोर्ट चलती थी। मुबारक मंडी से हाईकोर्ट को जानीपुर कोर्ट शिफ्ट कर दिया। वकील चाहते थे कि जिला कोर्ट भी जानीपुर कोर्ट शिफ्ट हो। इसे लेकर वकीलों ने लड़ाई लड़ी और जीते। ऐसे ही बार का रवैया होना चाहिए। रैका में किसी कीमत पर जानीपुर से हाईकोर्ट न शिफ्ट होने दिया जाए।