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मॉल की असुविधा से बड़ा जनहित, डीपीआर में बदलाव का अधिकार प्राधिकरण के पास: हाईकोर्ट
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पाम आइलैंड मॉल के मालिकों की याचिका खारिज, न्यायालय नहीं करेगा हस्तक्षेप
फ्लाईओवर की डिजाइन बदलने से मॉल के व्यापार पर असर पड़ने की जताई थी चिंता
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने पाम आइलैंड मॉल के मालिकों की एक याचिका खारिज कर दिया है। याचिका में उन्होंने शहर की एक अहम सड़क परियोजना के डिजाइन में बदलाव को चुनौती दी थी। इसमें कहा था कि बदलाव से न सिर्फ मॉल का प्रवेश और निकास द्वारा बंद हो जाएगा, बल्कि ट्रैफिक जाम और हादसों की आशंका भी बढ़ेगी।
अदालत ने साफ कहा कि ऐसी परियोजनाओं की तकनीकी जांच करना न्यायालय का काम नहीं है। मामला शहर के अखनूर रोड का है, जहां नेशनल हाईवे एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड एक फ्लाईओवर का निर्माण करवा रही है। यह फ्लाईओवर तवी के चौथे पुल के पास स्तिथ भगवती नगर चौक को कैनाल हेड से जोड़ेगा।
याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि जब मॉल बनकर तैयार हुआ, उसके कुछ ही समय बाद फ्लाईओवर बनाने का काम शुरू किया। पहले की योजना के मुताबिक फ्लाईओवर 1.3 किलोमीटर तक जाना था, लेकिन बाद में अचानक डिजाइन बदल दिया और अब फ्लाईओवर एक किलोमीटर पर ही खत्म हो रहा है। इससे मॉल के सामने सड़क की चौड़ाई घटकर महज 14 फुट रह जाएगी, जिससे मॉल में आने-जाने वालों को असुविधा होगी और व्यापार भी प्रभावित होगा। यह शहरी नियोजन मानकों का भी उल्लंघन है।
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परियोजनाओं की जांच और व्यावहारिकता का फैसला विशेषज्ञों का काम
कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि महज व्यापारिक नुकसान या व्यक्तिगत परेशानी की वजह से जनहित की परियोजनाओं को नहीं रोका जा सकता। मॉल को आने-जाने वाले रास्ते को अवरुद्ध नहीं किया गया है। इसी के साथ कोर्ट ने कहा कि हाईवे अथॉरिटी को डीपीआर में बदलाव का अधिकार है। सड़क और फ्लाईओवर जैसी परियोजनाओं की जांच और उनकी व्यावहारिकता को लेकर फैसला लेना विशेषज्ञों का काम है।
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फ्लाईओवर की डिजाइन बदलने से मॉल के व्यापार पर असर पड़ने की जताई थी चिंता
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने पाम आइलैंड मॉल के मालिकों की एक याचिका खारिज कर दिया है। याचिका में उन्होंने शहर की एक अहम सड़क परियोजना के डिजाइन में बदलाव को चुनौती दी थी। इसमें कहा था कि बदलाव से न सिर्फ मॉल का प्रवेश और निकास द्वारा बंद हो जाएगा, बल्कि ट्रैफिक जाम और हादसों की आशंका भी बढ़ेगी।
अदालत ने साफ कहा कि ऐसी परियोजनाओं की तकनीकी जांच करना न्यायालय का काम नहीं है। मामला शहर के अखनूर रोड का है, जहां नेशनल हाईवे एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड एक फ्लाईओवर का निर्माण करवा रही है। यह फ्लाईओवर तवी के चौथे पुल के पास स्तिथ भगवती नगर चौक को कैनाल हेड से जोड़ेगा।
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याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि जब मॉल बनकर तैयार हुआ, उसके कुछ ही समय बाद फ्लाईओवर बनाने का काम शुरू किया। पहले की योजना के मुताबिक फ्लाईओवर 1.3 किलोमीटर तक जाना था, लेकिन बाद में अचानक डिजाइन बदल दिया और अब फ्लाईओवर एक किलोमीटर पर ही खत्म हो रहा है। इससे मॉल के सामने सड़क की चौड़ाई घटकर महज 14 फुट रह जाएगी, जिससे मॉल में आने-जाने वालों को असुविधा होगी और व्यापार भी प्रभावित होगा। यह शहरी नियोजन मानकों का भी उल्लंघन है।
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परियोजनाओं की जांच और व्यावहारिकता का फैसला विशेषज्ञों का काम
कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि महज व्यापारिक नुकसान या व्यक्तिगत परेशानी की वजह से जनहित की परियोजनाओं को नहीं रोका जा सकता। मॉल को आने-जाने वाले रास्ते को अवरुद्ध नहीं किया गया है। इसी के साथ कोर्ट ने कहा कि हाईवे अथॉरिटी को डीपीआर में बदलाव का अधिकार है। सड़क और फ्लाईओवर जैसी परियोजनाओं की जांच और उनकी व्यावहारिकता को लेकर फैसला लेना विशेषज्ञों का काम है।