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Jammu News: खानपान की बिगड़ी आदतों से बढ़ रहा पेट का कैंसर
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हालात : कैंसर के कुल मामलों में 18.8 प्रतिशत गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल के, मलाशय के मामले 16.6 फीसदी
समस्या खुद बढ़ा रहे : फल-सब्जियों का कम सेवन, कसरत भी नहीं करते
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। खानपान की बिगड़ी आदतों से पेट (गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल) के कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। चिंता की बात है कि कुल कैंसर के मामलों में 18.8 प्रतिशत गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल के देखे जा रहे हैं। वहीं, मलाशय (कोलोरेक्टल) का कैंसर दूसरे नंबर पर है। कुल मामलों 16.6 फीसदी कोलोरेक्टल कैंसर के पाए जा रहे हैं। श्रीमाता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी (एसएमवीडीयू) कटड़ा के स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के सहायक प्रोफेसर राकेश ठुसू, वैज्ञानिक डॉ. रुचि शाह, डॉ. भानु शर्मा और उनकी टीम के अध्ययन में ये चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं।
डॉ. राकेश कुमार और एसएमवीडीयू का कैंसर जेनेटिक्स रिसर्च ग्रुप उत्तरी जम्मू-कश्मीर में प्रचलित प्रमुख कैंसर के आनुवंशिक कारकों के अध्ययन से जुड़ी है। एसएमवीडीयू ने 2022 में पूरे साल प्रदेश में कैंसर के आंकड़ों का अध्ययन किया। इसमें पाया गया कि कुल कैंसर के मामलों में फेफड़ों का कैंसर तीसरे स्थान पर है। 9 फीसदी मामले फेफड़ों के कैंसर के पाए गए। सिर और गर्दन के कैंसर 7.9 प्रतिशत और स्तन कैंसर 6.9 प्रतिशत पाया गया।
अध्ययन टीम का अनुमान है कि कश्मीर घाटी अकेले में सितंबर 2024 में पेट व अन्य कैंसर के सात हजार से ज्यादा मामले सामने आए हैं। टीम वास्तविक आंकड़ों का विश्लेषण कर रही है। डॉ. राकेश का कहना है कि प्रदेश में कश्मीर के लोगों में सबसे ज्यादा गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर के मामले सामने आते हैं।
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इसलिए बढ़ रहा कश्मीर में पेट का कैंसर
पहला : चाय में नमक, दूध में नमक मिलाना
डॉ. राकेश के अनुसार कश्मीर में चाय में नमक मिलाकर पीने का चलन है। दूध में भी नमक मिला देते हैं। गरम चाय और ऊपर से सोडियम बाई कार्बोनेट दोनों का काॅम्बिनेशन अल्सर का कारण बनती हैं। जो बार-बार होने से कैंसर का कारण बनती है।
मीट का ज्यादा सेवन
हेलिको बैक्टर पाइलोरी एक ऐसा बैक्टीरिया है जो सभी में पाया जाता है। पर, मीट ज्यादा खाने से यह ज्यादा मात्रा में बढ़ता है और इसकी वजह से पेप्टिक अल्सर बढ़ता है, जो कैंसर का कारक बनती है।
सूखे खाने
कश्मीर में खाद्य पदार्थों को सुखाकर स्टोर किया जाता है। इससे उनमें कैंसरकारक तत्व नाइट्रोसेमाइन बढ़ जाता है।
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स्किम्स साैरा में छह साल में दर्ज मामले
स्किम्स सौरा में स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट (एससीआई) के अनुसार, 2019 से 2024 (छह वर्षों में) तक 28,457 से अधिक कैंसर के मामले दर्ज किए गए हैं। आंकड़ों के अनुसार, स्किम्स ने 2019 में 4,337, 2020 में 3,814, 2021 में 4,727, 2022 में 5,271, 2023 में 5,108 और 2024 में 5,200 से अधिक मामले कैंसर के दर्ज किए हैं।
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समस्या खुद बढ़ा रहे : फल-सब्जियों का कम सेवन, कसरत भी नहीं करते
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। खानपान की बिगड़ी आदतों से पेट (गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल) के कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। चिंता की बात है कि कुल कैंसर के मामलों में 18.8 प्रतिशत गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल के देखे जा रहे हैं। वहीं, मलाशय (कोलोरेक्टल) का कैंसर दूसरे नंबर पर है। कुल मामलों 16.6 फीसदी कोलोरेक्टल कैंसर के पाए जा रहे हैं। श्रीमाता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी (एसएमवीडीयू) कटड़ा के स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के सहायक प्रोफेसर राकेश ठुसू, वैज्ञानिक डॉ. रुचि शाह, डॉ. भानु शर्मा और उनकी टीम के अध्ययन में ये चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं।
डॉ. राकेश कुमार और एसएमवीडीयू का कैंसर जेनेटिक्स रिसर्च ग्रुप उत्तरी जम्मू-कश्मीर में प्रचलित प्रमुख कैंसर के आनुवंशिक कारकों के अध्ययन से जुड़ी है। एसएमवीडीयू ने 2022 में पूरे साल प्रदेश में कैंसर के आंकड़ों का अध्ययन किया। इसमें पाया गया कि कुल कैंसर के मामलों में फेफड़ों का कैंसर तीसरे स्थान पर है। 9 फीसदी मामले फेफड़ों के कैंसर के पाए गए। सिर और गर्दन के कैंसर 7.9 प्रतिशत और स्तन कैंसर 6.9 प्रतिशत पाया गया।
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अध्ययन टीम का अनुमान है कि कश्मीर घाटी अकेले में सितंबर 2024 में पेट व अन्य कैंसर के सात हजार से ज्यादा मामले सामने आए हैं। टीम वास्तविक आंकड़ों का विश्लेषण कर रही है। डॉ. राकेश का कहना है कि प्रदेश में कश्मीर के लोगों में सबसे ज्यादा गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर के मामले सामने आते हैं।
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इसलिए बढ़ रहा कश्मीर में पेट का कैंसर
पहला : चाय में नमक, दूध में नमक मिलाना
डॉ. राकेश के अनुसार कश्मीर में चाय में नमक मिलाकर पीने का चलन है। दूध में भी नमक मिला देते हैं। गरम चाय और ऊपर से सोडियम बाई कार्बोनेट दोनों का काॅम्बिनेशन अल्सर का कारण बनती हैं। जो बार-बार होने से कैंसर का कारण बनती है।
मीट का ज्यादा सेवन
हेलिको बैक्टर पाइलोरी एक ऐसा बैक्टीरिया है जो सभी में पाया जाता है। पर, मीट ज्यादा खाने से यह ज्यादा मात्रा में बढ़ता है और इसकी वजह से पेप्टिक अल्सर बढ़ता है, जो कैंसर का कारक बनती है।
सूखे खाने
कश्मीर में खाद्य पदार्थों को सुखाकर स्टोर किया जाता है। इससे उनमें कैंसरकारक तत्व नाइट्रोसेमाइन बढ़ जाता है।
स्किम्स साैरा में छह साल में दर्ज मामले
स्किम्स सौरा में स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट (एससीआई) के अनुसार, 2019 से 2024 (छह वर्षों में) तक 28,457 से अधिक कैंसर के मामले दर्ज किए गए हैं। आंकड़ों के अनुसार, स्किम्स ने 2019 में 4,337, 2020 में 3,814, 2021 में 4,727, 2022 में 5,271, 2023 में 5,108 और 2024 में 5,200 से अधिक मामले कैंसर के दर्ज किए हैं।