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Jammu News: अब बीमा कंपनी नहीं, सरकार उठाएगी सेहत योजना का खर्च

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एक साल के लिए ट्रस्ट मोड पर डाला, नए मानकों में सरकारी स्तर पर ही गाल ब्लैडर, बवासीर, भगंदर और अपेंडिक्स की सर्जरी का प्रावधान
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निजी अस्पतालों की देनदारी के भुगतान पर असमंजस बरकरार
अमित कुमार
जम्मू। वित्तीय वर्ष 2025-26 में सेहत योजना के लिए कोई बीमा कंपनियां आगे नहीं आई हैं। अब आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना-सेहत के तहत सरकारी व निजी अस्पतालों में लोगों को दी जाने वाली चिकित्सा सेवाओं का खर्च सरकार उठाएगी। सरकार ने योजना को एक साल के लिए ट्रस्ट मोड पर डाल दिया है, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। इस योजना के तहत प्रत्येक परिवार को पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा दिया जा रहा है।
पुरानी योजना के साथ सूचीबद्ध निजी अस्पतालों की देनदारी के भुगतान पर अभी कोई फैसला नहीं हो पाया है। जिससे नई योजना में निजी संस्थानों में सेवाएं जारी रखने पर असमंजस बना हुआ है। योजना के नए मानकों के तहत अब गाल ब्लैडर, बवासीर, भगंदर और अपेंडिक्स की सर्जरी निजी अस्पतालों के बजाय सरकारी अस्पतालों में ही होगी।
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निजी अस्पतालों में ऐसी सर्जरी को योजना में शामिल नहीं किया जाएगा। ऐसे संस्थानों के सर्जरी क्षेत्र में 60 प्रतिशत तक यही सामान्य सर्जरी हो रही थीं। निजी संस्थानों के डायलिसिस शुल्क में भी कटौती हुई है। गत 14 मार्च से योजना के तहत समझौता खत्म हो गया था। जिसके बाद से अधिकांश निजी अस्पताल पैकेज के तहत चिकित्सा सेवाएं नहीं दे रहे हैं। हालांकि कुछ अस्पतालों में ऐसी सेवाओं को जारी रखा हुआ है। बताया जा रहा है कि जल्द मुख्य सचिव की अध्यक्ष में एक हेल्थ पैनल की बैठक होने वाली है, जिसमें निजी अस्पतालों की देनदारी पर फैसला लिया जाएगा।
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निजी अस्पतालों से औपचारिक समझौता करे सरकार
सरकार ने ट्रस्ट मोड पर सेहत योजना को जारी रखने के लिए नोटिस जारी किया है। लेकिन निजी अस्पताल प्रशासनों के साथ सरकार को एक औपचारिक समझौता करना चाहिए, जिससे वे सेवाएं दे सकें। इसके साथ देनदारी का जल्द भुगतान किया जाए। निजी अस्पतालों के लिए बजट आवंटन 589 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 800 करोड़ रुपये करने की मांग की गई है। निजी अस्पतालों में योजना के तहत डायलिसिस शुल्क को पहले की तरह रखा जाए। इसी तरह यूटी स्तर के 10 प्रतिशत प्रोत्साहन का भी प्रावधान किया जाए।

-संदीप मैंगी, अध्यक्ष, जम्मू कश्मीर प्राइवेट हास्पिटल्स और डायलिसिस सेंटर एसोसिएशन
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सेहत योजना को एक वर्ष के लिए ट्रस्ट मोड पर लाया गया है, जिसे राज्य द्वारा कार्यान्वित किया जाएगा। निजी अस्पतालों की देनदारी के भुगतान के लिए प्रक्रिया चल रही है।
-संजीव एम गाडकर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, राज्य स्वास्थ्य एजेंसी
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