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Jammu News: दो दिवसीय दुर्लभ सिक्कों की प्रदर्शनी शुरू
Fri, 25 Apr 2025 02:57 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Fri, 25 Apr 2025 02:57 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। जम्म-कश्मीर सरकार के संस्कृति विभाग की ओर से वीरवार को शहर के कला केंद्र में दो दिवसीय दुर्लभ सिक्कों की प्रदर्शनी का आगाज हुआ। इसका आयोजन प्रमुख सचिव संस्कृति बृज मोहन शर्मा की अध्यक्षता में हुआ। इसका उद्देश्य संग्रहकर्ताओं को बेशकीमती सिक्का संग्रह को प्रदर्शित करने के लिए एक मंच प्रदान करना था।
बृज मोहन शर्मा ने कहा कि प्रदर्शन पर रखा गया प्रत्येक सिक्का केवल धातु का एक टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह इतिहास, संस्कृति और परंपरा का साक्षी है। यह व्यापार, शासन, साम्राज्यों और हमारे पूर्वजों के रोजमर्रा के जीवन की मूक कहानीकार का रूप है। उन्होंने कहा कि अपने शिलालेखों, सामग्रियों, आकृतियों व प्रतीकों के माध्यम से सिक्के हमारी सामूहिक सांस्कृतिक स्मृति के महत्वपूर्ण वाहक के रूप में काम करते हैं।
उन्होंने घोषणा की कि संस्कृति विभाग ने संस्कृति, विरासत संरक्षण और संवर्धन के क्षेत्र में प्रतिबद्धता और उत्साह के साथ काम करने वाले गैर-सरकारी संगठनों को मान्यता देने और पुरस्कृत करने के लिए एक नई योजना तैयार की है। इस प्रदर्शनी में विभिन्न ऐतिहासिक काल के लगभग 1000 दुर्लभ सिक्के शामिल हैं। इनमें कनिष्क, इंडो-यूनानी शासक, इस्लामिक कश्मीर से पहले और बाद के समय, मुगल साम्राज्य, ब्रिटिश काल, सिख और डोगरा शासन के साथ-साथ स्वतंत्रता के बाद के भारत के सिक्के हैं।
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इस मौके पर डॉ.जावेद राही, त्रिशला कुंडल, मलिकजादा शीराज उल हक, विश्वजीत, रईज चौधरी, अमर सिंह, डॉ. सुरेश कुमार अबरोल संस्थापक शाश्वत आर्ट गैलरी, इंदर सिंह हिमालयन हेरिटेज म्यूजियम, सुधीर गुप्ता, अशोक कुमार कौल व रमेश कुमार रैना मौजूद रहे।
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जम्मू। जम्म-कश्मीर सरकार के संस्कृति विभाग की ओर से वीरवार को शहर के कला केंद्र में दो दिवसीय दुर्लभ सिक्कों की प्रदर्शनी का आगाज हुआ। इसका आयोजन प्रमुख सचिव संस्कृति बृज मोहन शर्मा की अध्यक्षता में हुआ। इसका उद्देश्य संग्रहकर्ताओं को बेशकीमती सिक्का संग्रह को प्रदर्शित करने के लिए एक मंच प्रदान करना था।
बृज मोहन शर्मा ने कहा कि प्रदर्शन पर रखा गया प्रत्येक सिक्का केवल धातु का एक टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह इतिहास, संस्कृति और परंपरा का साक्षी है। यह व्यापार, शासन, साम्राज्यों और हमारे पूर्वजों के रोजमर्रा के जीवन की मूक कहानीकार का रूप है। उन्होंने कहा कि अपने शिलालेखों, सामग्रियों, आकृतियों व प्रतीकों के माध्यम से सिक्के हमारी सामूहिक सांस्कृतिक स्मृति के महत्वपूर्ण वाहक के रूप में काम करते हैं।
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उन्होंने घोषणा की कि संस्कृति विभाग ने संस्कृति, विरासत संरक्षण और संवर्धन के क्षेत्र में प्रतिबद्धता और उत्साह के साथ काम करने वाले गैर-सरकारी संगठनों को मान्यता देने और पुरस्कृत करने के लिए एक नई योजना तैयार की है। इस प्रदर्शनी में विभिन्न ऐतिहासिक काल के लगभग 1000 दुर्लभ सिक्के शामिल हैं। इनमें कनिष्क, इंडो-यूनानी शासक, इस्लामिक कश्मीर से पहले और बाद के समय, मुगल साम्राज्य, ब्रिटिश काल, सिख और डोगरा शासन के साथ-साथ स्वतंत्रता के बाद के भारत के सिक्के हैं।
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इस मौके पर डॉ.जावेद राही, त्रिशला कुंडल, मलिकजादा शीराज उल हक, विश्वजीत, रईज चौधरी, अमर सिंह, डॉ. सुरेश कुमार अबरोल संस्थापक शाश्वत आर्ट गैलरी, इंदर सिंह हिमालयन हेरिटेज म्यूजियम, सुधीर गुप्ता, अशोक कुमार कौल व रमेश कुमार रैना मौजूद रहे।