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Jammu News: 370 हटने के बाद पहली बार हुए चुनाव में इंडिया गठबंधन ने बिखेरा जलवा
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लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद कारगिल की 26 में से एक तिहाई से अधिक सीटों पर कब्जा, विपक्ष बोला-जनता ने भाजपा को नकारा
डॉ. बृजेश कुमार सिंह
जम्मू। अनुच्छेद 370 हटने के बाद पहली बार हुए लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद (कारगिल) के चुनाव में इंडिया गठबंधन ने जलवा बिखेरा। 26 सीटों के लिए हुए चुनाव में कांग्रेस व नेकां ने एक तिहाई से अधिक सीटों पर कब्जा जमा लिया। भाजपा को यहां करारी हार का सामना करना पड़ा। उसके 17 में से दो प्रत्याशी ही जीत सके यानी साढ़े आठ फीसदी प्रत्याशी जीते। विपक्ष ने कहा कि जनता ने भाजपा को नकार दिया है। यह अनुच्छेद 370 को हटाने तथा राज्य के विशेष दर्जे को समाप्त करने के फैसले के खिलाफ जनमत है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, 2019 के बाद हुए पहली चुनाव में भाजपा की हार ने विपक्षी दलों को भाजपा के खिलाफ मंच प्रदान कर दिया है। उन्हें अब भाजपा के खिलाफ अनुच्छेद 370 व 35ए हटाने के खिलाफ मुखर होने का मौका मिल गया है। साथ ही केंद्र सरकार की नीतियों पर भी हमला करने का अवसर मिल गया है। उनका कहना है कि कश्मीर आधारित पार्टियां नेकां व पीडीपी तथा कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी पार्टियों की ओर से जम्मू में 10 अक्तूबर को भाजपा के खिलाफ आयोजित धरना-प्रदर्शन को भी बल मिलेगा। इसमें यह पार्टियां जोर शोर से चनाव का मुद्दा उठाते हुए भाजपा को घेरने की कोशिश करेंगे। वह यह भी कहते हैं कि इसका देशभर की राजनीति पर भी भाजपा के खिलाफ आक्रामक रवैया अपनाने में मदद करेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कारगिल चुनाव में कांग्रेस की बंपर जीत ने लद्दाख के साथ साथ जम्मू कश्मीर में भी कांग्रेस को संजीवनी प्रदान की है। इसका असर लोकसभा चुनाव में भी देखने को मिल सकता है। उनका कहना है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी की पिछले महीने कारगिल यात्रा ने भी पार्टी में जान फूंका है। जगह जगह कार्यकर्ताओं से मिलने तथा कारगिल में सभा से भी कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाने में मदद मिली।
कारगिल व द्रास में भी नेकां-कांग्रेस
कारगिल के दो मुख्य शहरों में भी नेकां-कांग्रेस का कब्जा रहा। कारगिल में नेकां तो रणबीर सिंह पोरा द्रास में कांग्रेस ने जीत हासिल की। द्रास स कांग्रेस के अब्दुल समद तो कारगिल से नेकां के मोहम्मद अब्बास को जीत मिली।
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डॉ. बृजेश कुमार सिंह
जम्मू। अनुच्छेद 370 हटने के बाद पहली बार हुए लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद (कारगिल) के चुनाव में इंडिया गठबंधन ने जलवा बिखेरा। 26 सीटों के लिए हुए चुनाव में कांग्रेस व नेकां ने एक तिहाई से अधिक सीटों पर कब्जा जमा लिया। भाजपा को यहां करारी हार का सामना करना पड़ा। उसके 17 में से दो प्रत्याशी ही जीत सके यानी साढ़े आठ फीसदी प्रत्याशी जीते। विपक्ष ने कहा कि जनता ने भाजपा को नकार दिया है। यह अनुच्छेद 370 को हटाने तथा राज्य के विशेष दर्जे को समाप्त करने के फैसले के खिलाफ जनमत है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, 2019 के बाद हुए पहली चुनाव में भाजपा की हार ने विपक्षी दलों को भाजपा के खिलाफ मंच प्रदान कर दिया है। उन्हें अब भाजपा के खिलाफ अनुच्छेद 370 व 35ए हटाने के खिलाफ मुखर होने का मौका मिल गया है। साथ ही केंद्र सरकार की नीतियों पर भी हमला करने का अवसर मिल गया है। उनका कहना है कि कश्मीर आधारित पार्टियां नेकां व पीडीपी तथा कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी पार्टियों की ओर से जम्मू में 10 अक्तूबर को भाजपा के खिलाफ आयोजित धरना-प्रदर्शन को भी बल मिलेगा। इसमें यह पार्टियां जोर शोर से चनाव का मुद्दा उठाते हुए भाजपा को घेरने की कोशिश करेंगे। वह यह भी कहते हैं कि इसका देशभर की राजनीति पर भी भाजपा के खिलाफ आक्रामक रवैया अपनाने में मदद करेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कारगिल चुनाव में कांग्रेस की बंपर जीत ने लद्दाख के साथ साथ जम्मू कश्मीर में भी कांग्रेस को संजीवनी प्रदान की है। इसका असर लोकसभा चुनाव में भी देखने को मिल सकता है। उनका कहना है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी की पिछले महीने कारगिल यात्रा ने भी पार्टी में जान फूंका है। जगह जगह कार्यकर्ताओं से मिलने तथा कारगिल में सभा से भी कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाने में मदद मिली।
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कारगिल व द्रास में भी नेकां-कांग्रेस
कारगिल के दो मुख्य शहरों में भी नेकां-कांग्रेस का कब्जा रहा। कारगिल में नेकां तो रणबीर सिंह पोरा द्रास में कांग्रेस ने जीत हासिल की। द्रास स कांग्रेस के अब्दुल समद तो कारगिल से नेकां के मोहम्मद अब्बास को जीत मिली।
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