जम्मू: कौन देगा ध्यान... स्कूल परिसर में व्यापार बना ज्ञान, अपनी दुकानों में बेचा जा रही स्कूली सामान
शहर के करीब हर निजी स्कूल ने किताबें, जूते, वर्दी, स्वेटर, टाई, बेल्ट आदि सामान के लिए एक दुकान तय कर रखी है या फिर स्कूल परिसर में दुकानें खोली हैं। अभिभावकों के पास निर्धारित दुकान के अलावा अन्य किसी से सामान खरीदने का विकल्प नहीं है।
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जम्मू में निजी स्कूल शिक्षा के बजाय व्यापार का केंद्र बनते जा रहे हैं। शहर के करीब हर निजी स्कूल ने किताबें, जूते, वर्दी, स्वेटर, टाई, बेल्ट आदि सामान के लिए एक दुकान तय कर रखी है या फिर स्कूल परिसर में दुकानें खोली हैं। अभिभावकों के पास निर्धारित दुकान के अलावा अन्य किसी से सामान खरीदने का विकल्प नहीं है।
दरअसल, कुछ नामी स्कूलों ने परिसर में ही शिक्षा को धंधा बना लिया है जिसके जरिये अभिभावकों से सरेआम लूट की जा रही है। उन्हें यहीं से पाठ्य सामग्री खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इसके बावजूद संबंधित विभाग आंखें मूंदे है। यही नहीं, स्कूल शिक्षा निदेशालय के कार्यालय से एक किमी. की दूरी पर बड़ा निजी स्कूल है, जिसके परिसर में ही दुकान है। इसी तरह पुराने शहर का एक स्कूल बाजार से पुस्तकों को खरीद कर अभिभावकों को मुहैया करवा रहा है। अमीर बनने का ऐसा सिस्टम बनाया है कि अभिभावकों को किसी और दुकान से सामान नहीं मिल पा रहा।
अभिभावक संघ जम्मू के अध्यक्ष अमित कपूर ने कहा कि शहर के कई स्कूलों ने अपनी दुकानें परिसर में खोली हैं जहां पर व्यापार किया जा रहा है। उनका आरोप है कि सनिशया इंटरनेशनल स्कूल सहित अन्य स्कूलों में दुकानें हैं। इसी तरह जीडी गोयनका स्कूल के सामने, सरवाल में शांग्रिला पब्लिक स्कूल में भी दुकान है।
किसी स्कूल परिसर में दुकान है तो नगर निगम ने अनुमित दी होगी। अगर कोई स्कूल प्रबंधक अभिभावकों को एक ही दुकान से पुस्तकें खरीदने को कहता है तो वह शिकायत करें। उसके खिलाफ विभाग कार्रवाई करेगा।
- डॉ. रवि शंकर शर्मा, स्कूल शिक्षा निदेशक।
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