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परमात्मा ही परम सत्य है : राधा दास
Sat, 12 Apr 2025 02:56 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Sat, 12 Apr 2025 02:56 AM IST
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चंडी माता मंदिर तोप शेरखानिया में श्रीमद्भागवत कथा का चौथा दिन
कथावाचक ने संगत सुनाईं कृष्ण जन्म की लीलाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
दोमाना। परमात्मा ही परम सत्य है। संसार की कोई भी वस्तु भगवान से अलग नहीं है। यह ज्ञान राधा दास वसंत महाराज ने शुक्रवार को चंडी माता मंदिर तोप शेरखानिया में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन संगत को दिया।
इस कथा का आयोजन साहिल महाराज की ओर से किया जा रहा है। इस दौरान बड़ी संख्या में संगत ने हिस्सा लेकर कथा का श्रवण किया। कथा वाचक ने बताया कि जब हमारी वृत्ति परमात्मा में लगेगी तो संसार गायब हो जाएगा। प्रश्न यह है कि परमात्मा संसार में घुले-मिले हैं तो संसार का नाश होने पर भी परमात्मा का नाश क्यों नहीं होता। इसका उत्तर यही है कि भगवान संसार से जुड़े भी हैं और अलग भी हैं।
आकाश में बादल रहता है और बादल के अंदर भी आकाश तत्व है। बादल के गायब होने पर भी आकाश गायब नहीं होता। भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के घरों से माखन चोरी किया। इस घटना के पीछे भी आध्यात्मिक रहस्य है। दूध का सार तत्व माखन है। उन्होंने गोपियों के घर से केवल माखन चुराया अर्थात सार तत्व को ग्रहण किया और असार को छोड़ दिया।
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प्रभु हमें समझाना चाहते हैं कि सृष्टि का सार तत्व परमात्मा है। इसलिए, असार यानी संसार के नश्वर भोग पदार्थों की प्राप्ति में समय, साधन और सामर्थ्य को अपव्यय करने की जगह हमें अपने अंदर स्थित परमात्मा को प्राप्त करने का लक्ष्य रखना चाहिए।
इसी से जीवन का कल्याण संभव है। कथा व्यास ने बताया कि वास्तविकता में श्रीकृष्ण केवल ग्वाल-बालों के सखा भर नहीं थे, बल्कि उन्हें दीक्षित करने वाले जगद्गुरु भी थे। श्रीकृष्ण ने उनकी आत्मा का जागरण किया और फिर आत्मिक स्तर पर स्थित रहकर सुंदर जीवन जीने का अनूठा पाठ पढ़ाया।
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कथावाचक ने संगत सुनाईं कृष्ण जन्म की लीलाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
दोमाना। परमात्मा ही परम सत्य है। संसार की कोई भी वस्तु भगवान से अलग नहीं है। यह ज्ञान राधा दास वसंत महाराज ने शुक्रवार को चंडी माता मंदिर तोप शेरखानिया में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन संगत को दिया।
इस कथा का आयोजन साहिल महाराज की ओर से किया जा रहा है। इस दौरान बड़ी संख्या में संगत ने हिस्सा लेकर कथा का श्रवण किया। कथा वाचक ने बताया कि जब हमारी वृत्ति परमात्मा में लगेगी तो संसार गायब हो जाएगा। प्रश्न यह है कि परमात्मा संसार में घुले-मिले हैं तो संसार का नाश होने पर भी परमात्मा का नाश क्यों नहीं होता। इसका उत्तर यही है कि भगवान संसार से जुड़े भी हैं और अलग भी हैं।
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आकाश में बादल रहता है और बादल के अंदर भी आकाश तत्व है। बादल के गायब होने पर भी आकाश गायब नहीं होता। भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के घरों से माखन चोरी किया। इस घटना के पीछे भी आध्यात्मिक रहस्य है। दूध का सार तत्व माखन है। उन्होंने गोपियों के घर से केवल माखन चुराया अर्थात सार तत्व को ग्रहण किया और असार को छोड़ दिया।
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प्रभु हमें समझाना चाहते हैं कि सृष्टि का सार तत्व परमात्मा है। इसलिए, असार यानी संसार के नश्वर भोग पदार्थों की प्राप्ति में समय, साधन और सामर्थ्य को अपव्यय करने की जगह हमें अपने अंदर स्थित परमात्मा को प्राप्त करने का लक्ष्य रखना चाहिए।
इसी से जीवन का कल्याण संभव है। कथा व्यास ने बताया कि वास्तविकता में श्रीकृष्ण केवल ग्वाल-बालों के सखा भर नहीं थे, बल्कि उन्हें दीक्षित करने वाले जगद्गुरु भी थे। श्रीकृष्ण ने उनकी आत्मा का जागरण किया और फिर आत्मिक स्तर पर स्थित रहकर सुंदर जीवन जीने का अनूठा पाठ पढ़ाया।