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श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से होता है कर्तव्यों का बोध : महाराज
Fri, 11 Apr 2025 02:24 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Fri, 11 Apr 2025 02:24 AM IST
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चंडी माता मंदिर तोप शेरखानिया में श्रीमद्भागवत कथा जारी
संवाद न्यूज एजेंसी
दोमाना। श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण करने से कर्तव्यों बोध होता है। यह ज्ञान चंडी माता मंदिर तोप शेरखानिया में श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन साहिल महाराज ने संगत को दिया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लेकर कथा का श्रवण किया।
महाराज ने बताया कि विडंबना है कि मृत्यु निश्चित होने के बाद भी कर्तव्यों को स्वीकार नहीं करते हैं। निस्काम भाव से प्रभु का स्मरण करने वाले अपना जन्म और मरण दोनों सुधार लेते हैं। प्रभु जब अवतार लेते हैं, तो माया के साथ आते हैं। साधारण मनुष्य माया को शाश्वत मान लेता है और अपने शरीर को प्रधान मान लेता है। जबकि शरीर नश्वर है।
उन्होंने कहा कि भागवत बताता है कि कर्म ऐसा करो जो निस्काम हो, वहीं सच्ची भक्ति है। कथा वाचक राधा दास वसंत महाराज ने भक्तों को ध्रुव चरित्र, भक्त प्रह्लाद चरित्र और नृसिंह अवतार की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि भगवान की भक्ति में ही शक्ति है।
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उन्होंने कहा कि सभी अपने बच्चों को संस्कार अवश्य दें, ताकि वह बुढ़ापे में उसकी सेवा कर सकें। गो सेवा, साधु की सेवा कर सकें। अंत में आरती कर प्रसाद वितरित किया गया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
दोमाना। श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण करने से कर्तव्यों बोध होता है। यह ज्ञान चंडी माता मंदिर तोप शेरखानिया में श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन साहिल महाराज ने संगत को दिया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लेकर कथा का श्रवण किया।
महाराज ने बताया कि विडंबना है कि मृत्यु निश्चित होने के बाद भी कर्तव्यों को स्वीकार नहीं करते हैं। निस्काम भाव से प्रभु का स्मरण करने वाले अपना जन्म और मरण दोनों सुधार लेते हैं। प्रभु जब अवतार लेते हैं, तो माया के साथ आते हैं। साधारण मनुष्य माया को शाश्वत मान लेता है और अपने शरीर को प्रधान मान लेता है। जबकि शरीर नश्वर है।
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उन्होंने कहा कि भागवत बताता है कि कर्म ऐसा करो जो निस्काम हो, वहीं सच्ची भक्ति है। कथा वाचक राधा दास वसंत महाराज ने भक्तों को ध्रुव चरित्र, भक्त प्रह्लाद चरित्र और नृसिंह अवतार की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि भगवान की भक्ति में ही शक्ति है।
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उन्होंने कहा कि सभी अपने बच्चों को संस्कार अवश्य दें, ताकि वह बुढ़ापे में उसकी सेवा कर सकें। गो सेवा, साधु की सेवा कर सकें। अंत में आरती कर प्रसाद वितरित किया गया।