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Jammu News: मुश्किल नहीं है कुछ भी अगर ठान लीजिए
Thu, 06 Jul 2023 04:30 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Thu, 06 Jul 2023 04:30 AM IST
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पांच बार सीडीएस परीक्षा में असफल होने के बाद छठवें प्रयास में शगुन शर्मा बनी सैन्य अधिकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
पुंछ। ''मुश्किल नहीं है कुछ भी अगर ठान लीजिए'' इस कहावत को सच करके दिखाया है भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर स्थित गांव जलास की बेटी शगुन शर्मा ने। सैन्य अधिकारी का सपना आंखों में संजोए हुए बेटी ने तमाम मुश्किलों का सामना करते हुए छठे प्रयास में सीडीएस की परीक्षा उत्तीर्ण कर सैन्य अधिकारी बनने का सपना साकार किया। इस बेटी ने मुश्किलों में पढ़ाई कर रहे लोगों को निराश न होकर लक्ष्य को प्राप्त करने का हौसला दिया है। बेटी की सफलता से गांव ही नहीं पूरे जिले में खुशी का माहौल है।
बता दें कि जलास गांव हमेशा पाकिस्तानी की तरफ से की जाने वाली गोलाबारी के कारण सुर्खियों में बना रहता था। इसी गांव के रहने वाले सुभाष पलोत्रा और चारू शर्मा की पुत्री शगुन शर्मा ने मंगलवार को घोषित सीडीएस के परिणाम में देश भर में दसवां स्थान प्राप्त किया है। इससे उसके घर एवं गांव में खुशियों का माहौल है। घर में शगुन को बधाई देने वाले लोगों का तांता लगा हुआ है। इस सफलता के लिए शगुन ने अपनी माता पिता, शिक्षकों के साथ ही भगवान का आभार प्रकट किया। साथ ही कहा कि हमारा गांव पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र के एक दम सामने बसा है। जहां आए दिन पाकिस्तानी गोलाबारी हुआ करती थी। हमारे स्कूल में गोले और गोलियां आ कर गिरती थी। गोलाबारी के साथ हमें कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता था। दसवीं के बाद स्नातक हमें यहां से नौ किलो मीटर दूर पुंछ नगर जाना पड़ता था। आवागमन के पर्याप्त साधन नहीं थे। गांव में इंटरनेट की सुविधा न होने से हमें परीक्षा की तैयारी के लिए पुंछ नगर जाना पड़ता था। वहां पर ही नेट से जरूरी मैटेरियाल डाउनलोड करना पड़ता था। कई बार देर ही जाने पर पैदल ही घर तक आना पड़ता था। दूर दराज का क्षेत्र होने के कारण यहां सीडीएस जैसी परीक्षा की तैयारी के लिए मैटेरियल ही नहीं मिल पता था। इसके चलते मुझे छह बार इस परीक्षा में शामिल होने पड़ा। पांच बार असफल रहने के बाद भी मैंने अपना लक्ष्य नहीं छोड़ा और छटे प्रयास में दसवां स्थान प्राप्त किया है। इससे मुझे भारी खुशी है और मैं सभी युवाओं से आह्वान करती हूं कि वह अपने लक्ष्य को पाने के लिए कड़ी करते रहें, सफलता कदम चूमेगी। शगुन के माता पिता ने बताया कि शगुन रात-रात भर जाग कर पढ़ाई करती थी। शगुन के चाचा-चाची का शगुन की मेहनत रंग लाई है। शगुन का भाई जो सेना में क्लर्क है। शगुन की छोटी बहन भी सैन्य अधिकारी बनने का लक्ष्य लेकर पढ़ाई कर रही है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पुंछ। ''मुश्किल नहीं है कुछ भी अगर ठान लीजिए'' इस कहावत को सच करके दिखाया है भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर स्थित गांव जलास की बेटी शगुन शर्मा ने। सैन्य अधिकारी का सपना आंखों में संजोए हुए बेटी ने तमाम मुश्किलों का सामना करते हुए छठे प्रयास में सीडीएस की परीक्षा उत्तीर्ण कर सैन्य अधिकारी बनने का सपना साकार किया। इस बेटी ने मुश्किलों में पढ़ाई कर रहे लोगों को निराश न होकर लक्ष्य को प्राप्त करने का हौसला दिया है। बेटी की सफलता से गांव ही नहीं पूरे जिले में खुशी का माहौल है।
बता दें कि जलास गांव हमेशा पाकिस्तानी की तरफ से की जाने वाली गोलाबारी के कारण सुर्खियों में बना रहता था। इसी गांव के रहने वाले सुभाष पलोत्रा और चारू शर्मा की पुत्री शगुन शर्मा ने मंगलवार को घोषित सीडीएस के परिणाम में देश भर में दसवां स्थान प्राप्त किया है। इससे उसके घर एवं गांव में खुशियों का माहौल है। घर में शगुन को बधाई देने वाले लोगों का तांता लगा हुआ है। इस सफलता के लिए शगुन ने अपनी माता पिता, शिक्षकों के साथ ही भगवान का आभार प्रकट किया। साथ ही कहा कि हमारा गांव पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र के एक दम सामने बसा है। जहां आए दिन पाकिस्तानी गोलाबारी हुआ करती थी। हमारे स्कूल में गोले और गोलियां आ कर गिरती थी। गोलाबारी के साथ हमें कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता था। दसवीं के बाद स्नातक हमें यहां से नौ किलो मीटर दूर पुंछ नगर जाना पड़ता था। आवागमन के पर्याप्त साधन नहीं थे। गांव में इंटरनेट की सुविधा न होने से हमें परीक्षा की तैयारी के लिए पुंछ नगर जाना पड़ता था। वहां पर ही नेट से जरूरी मैटेरियाल डाउनलोड करना पड़ता था। कई बार देर ही जाने पर पैदल ही घर तक आना पड़ता था। दूर दराज का क्षेत्र होने के कारण यहां सीडीएस जैसी परीक्षा की तैयारी के लिए मैटेरियल ही नहीं मिल पता था। इसके चलते मुझे छह बार इस परीक्षा में शामिल होने पड़ा। पांच बार असफल रहने के बाद भी मैंने अपना लक्ष्य नहीं छोड़ा और छटे प्रयास में दसवां स्थान प्राप्त किया है। इससे मुझे भारी खुशी है और मैं सभी युवाओं से आह्वान करती हूं कि वह अपने लक्ष्य को पाने के लिए कड़ी करते रहें, सफलता कदम चूमेगी। शगुन के माता पिता ने बताया कि शगुन रात-रात भर जाग कर पढ़ाई करती थी। शगुन के चाचा-चाची का शगुन की मेहनत रंग लाई है। शगुन का भाई जो सेना में क्लर्क है। शगुन की छोटी बहन भी सैन्य अधिकारी बनने का लक्ष्य लेकर पढ़ाई कर रही है।
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