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Jammu News: यमराज के निमंत्रण पर राजा गए यमलोक
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संडे थियेटर में हिंदी नाटक यमराज का निमंत्रण का मंचन, कलाकारों ने लूटी वाहवाही
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। नटरंग की ओर से संडे थियेटर में नीरज कांत के निर्देशित हिंदी नाटक ''यमराज का निमंत्रण'' का मचन किया गया। इसके माध्यम से संदेश दिया गया कि व्यक्तित्व से व्यक्ति महान होता है, झूठ बोलने से नहीं। रानी ने ही राजमाता बनने ओर अपने बेटे को राजा बनाने के लिए राजा को मरने के लिए कहा। नाटक एक अहंकारी राजा की कहानी है जो झूठी प्रशंसा सुनने का अभ्यस्त है।
उसे लगता है कि अगर वह आसपास नहीं रहेगा तो उसकी प्रजा अनाथ हो जाएगी। उसे लगता है कि अगले सौ वर्षों तक राज्य पर शासन वह ही करेगा। एक रात को सो रहा राजा यमदूत के आने से चौंक जाता है और बिस्तर पर बैठ जाता है। यमदूत से पूछता है कि वह कौन है और इस तरह मृत्यु के चंगुल में क्यों फंस गया है। अंत में यमदूत और राजा इस बात पर सहमत हो जाते हैं कि यदि तीन लोग भी राजा से प्रेम करेंगे तो यमदूत उसे यहीं छोड़ देंगे।
यमदूत राजा को लेटने को कहते हैं और उनके ऊपर सफेद चादर डालते हैं। फिर रानी, मंत्री और राज पुरोहित को अलग-अलग बुलाया जाता है। लेकिन ये तीनों राजा की झूठी प्रशंसा करते हैं। इस पर रानी कहती है कि राजा की मृत्यु के बाद उसका बेटा राजा बनेगा और वह राजमाता बनेगी इसलिए राजा को मरना होगा।
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मंत्री और पंडित झूठी प्रशंसा करते-करते थक गए हैं। अब राजा अंततः यमदूत से उसे यमलोक ले जाने का अनुरोध करता है और नाटक समाप्त होता है। नाटक में कार्तिक कुमार, आर्यन शर्मा, महक चिब, अदक्ष बागल ने किरदार निभाया।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। नटरंग की ओर से संडे थियेटर में नीरज कांत के निर्देशित हिंदी नाटक ''यमराज का निमंत्रण'' का मचन किया गया। इसके माध्यम से संदेश दिया गया कि व्यक्तित्व से व्यक्ति महान होता है, झूठ बोलने से नहीं। रानी ने ही राजमाता बनने ओर अपने बेटे को राजा बनाने के लिए राजा को मरने के लिए कहा। नाटक एक अहंकारी राजा की कहानी है जो झूठी प्रशंसा सुनने का अभ्यस्त है।
उसे लगता है कि अगर वह आसपास नहीं रहेगा तो उसकी प्रजा अनाथ हो जाएगी। उसे लगता है कि अगले सौ वर्षों तक राज्य पर शासन वह ही करेगा। एक रात को सो रहा राजा यमदूत के आने से चौंक जाता है और बिस्तर पर बैठ जाता है। यमदूत से पूछता है कि वह कौन है और इस तरह मृत्यु के चंगुल में क्यों फंस गया है। अंत में यमदूत और राजा इस बात पर सहमत हो जाते हैं कि यदि तीन लोग भी राजा से प्रेम करेंगे तो यमदूत उसे यहीं छोड़ देंगे।
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यमदूत राजा को लेटने को कहते हैं और उनके ऊपर सफेद चादर डालते हैं। फिर रानी, मंत्री और राज पुरोहित को अलग-अलग बुलाया जाता है। लेकिन ये तीनों राजा की झूठी प्रशंसा करते हैं। इस पर रानी कहती है कि राजा की मृत्यु के बाद उसका बेटा राजा बनेगा और वह राजमाता बनेगी इसलिए राजा को मरना होगा।
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मंत्री और पंडित झूठी प्रशंसा करते-करते थक गए हैं। अब राजा अंततः यमदूत से उसे यमलोक ले जाने का अनुरोध करता है और नाटक समाप्त होता है। नाटक में कार्तिक कुमार, आर्यन शर्मा, महक चिब, अदक्ष बागल ने किरदार निभाया।