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संगीत में होती है आत्मा को जोड़ने की शक्ति : शर्मा
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डोगरी संस्था की तरफ से आयोजित संगीत संध्या कार्यक्रम में डोगरी गीतों का विमोचन करते आए हुए अति
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डोगरी संस्था की ओर से कुंवर वियोगी ऑडिटोरियम में हुई संगीत संध्या
अजय सिंह चिब और इंद्रजीत केसर ने कविताएं सुनाकर बांधा समा
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। डोगरी की मिठास सभी को खींच लाती है। संगीत में आत्मा को जोड़ने की शक्ति होती है। यह बातें जम्मू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. आरडी शर्मा ने शुक्रवार को डोगरी संस्था की तरफ से कुंवर वियोगी ऑडिटोरियम कर्ण नगर में डोगरी संगीत संध्या कार्यक्रम में कहीं।
मुख्य अतिथि ने कहा कि मातृभाषा को समर्पित इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन होते रहना चाहिए। इस दौरान उन्होंने डोगरी के दो गीतों का विमोचन किया। संगीत संध्या में डोगरी के प्रसिद्ध कवियों अजय सिंह चिब और इंद्रजीत केसर कविताएं और गीत सुनाकर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम में डोगरी संस्था के प्रधान प्रो. ललित मगोत्रा ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि संगीत कार्यक्रमों के माध्यम से डोगरी भाषा को आगे बढ़ाने का कार्य संस्था कर रही है। इस मौके पर अजय सिंह चिब ने भी एक गायक और संगीतकार के रूप में अपनी यात्रा को साझा किया।
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उन्होंने कहा कि डोगरी हमारी मातृभाषा है और हमारी सांस्कृतिक अस्तित्व के प्रति एक जिम्मेदारी है जिसे हम अपनी संस्कृति को बढ़ावा देकर ही पूरा कर सकते हैं।
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अजय सिंह चिब और इंद्रजीत केसर ने कविताएं सुनाकर बांधा समा
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। डोगरी की मिठास सभी को खींच लाती है। संगीत में आत्मा को जोड़ने की शक्ति होती है। यह बातें जम्मू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. आरडी शर्मा ने शुक्रवार को डोगरी संस्था की तरफ से कुंवर वियोगी ऑडिटोरियम कर्ण नगर में डोगरी संगीत संध्या कार्यक्रम में कहीं।
मुख्य अतिथि ने कहा कि मातृभाषा को समर्पित इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन होते रहना चाहिए। इस दौरान उन्होंने डोगरी के दो गीतों का विमोचन किया। संगीत संध्या में डोगरी के प्रसिद्ध कवियों अजय सिंह चिब और इंद्रजीत केसर कविताएं और गीत सुनाकर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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कार्यक्रम में डोगरी संस्था के प्रधान प्रो. ललित मगोत्रा ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि संगीत कार्यक्रमों के माध्यम से डोगरी भाषा को आगे बढ़ाने का कार्य संस्था कर रही है। इस मौके पर अजय सिंह चिब ने भी एक गायक और संगीतकार के रूप में अपनी यात्रा को साझा किया।
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उन्होंने कहा कि डोगरी हमारी मातृभाषा है और हमारी सांस्कृतिक अस्तित्व के प्रति एक जिम्मेदारी है जिसे हम अपनी संस्कृति को बढ़ावा देकर ही पूरा कर सकते हैं।