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मान्यता प्राप्त अस्पताल में इलाज करवाने पर बिना मंजूरी मिलेगा खर्च : कैट
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सेवानिवृत्त अधिकारी के आवेदन पर सुनाया फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने एक मामले में फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि अगर किसी कर्मचारी ने सरकारी मान्यता प्राप्त अस्पताल में इलाज कराया है, तो उसके मेडिकल खर्च को केवल इस आधार पर नहीं रोका जा सकता कि इलाज से पहले विभाग से अनुमति नहीं ली थी। एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ लेखा परीक्षा अधिकारी के आवेदन पर यह फैसला न्यायिक सदस्य राजिंदर सिंह डोगरा ने सुनाया है।
वरिष्ठ लेखा परीक्षा अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए जम्मू के भगवती नगर निवासी राज कुमार गुप्ता ने अपनी पत्नी का इलाज जम्मू के बत्रा अस्पताल से करवाया था। यह अस्पताल जम्मू-कश्मीर सरकार से मान्यता प्राप्त है और केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना में भी सूचीबद्ध है। बावजूद इसके, वित्त विभाग ने उनका 14,626 रुपये का मेडिकल बिल यह कहकर रोक दिया कि अधिकारी ने इलाज से पहले अनुमति नहीं ली थी। राज कुमार ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी। उन्होंने कोर्ट को बताया कि उन्होंने पहले भी इस अस्पताल से इलाज करवाकर 13 बार मेडिकल बिल जमा किए थे, जिन्हें विभाग ने बिना आपत्ति के मंजूर किया था।
कैट ने मामले में सेवानिवृत्त अधिकारी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए वित्त विभाग को 14,626 रुपये के बिल का केंद्रीय स्वास्थ्य योजना की दरों के अनुसार आठ हफ्तों के भीतर भुगतान करने को कहा है।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने एक मामले में फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि अगर किसी कर्मचारी ने सरकारी मान्यता प्राप्त अस्पताल में इलाज कराया है, तो उसके मेडिकल खर्च को केवल इस आधार पर नहीं रोका जा सकता कि इलाज से पहले विभाग से अनुमति नहीं ली थी। एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ लेखा परीक्षा अधिकारी के आवेदन पर यह फैसला न्यायिक सदस्य राजिंदर सिंह डोगरा ने सुनाया है।
वरिष्ठ लेखा परीक्षा अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए जम्मू के भगवती नगर निवासी राज कुमार गुप्ता ने अपनी पत्नी का इलाज जम्मू के बत्रा अस्पताल से करवाया था। यह अस्पताल जम्मू-कश्मीर सरकार से मान्यता प्राप्त है और केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना में भी सूचीबद्ध है। बावजूद इसके, वित्त विभाग ने उनका 14,626 रुपये का मेडिकल बिल यह कहकर रोक दिया कि अधिकारी ने इलाज से पहले अनुमति नहीं ली थी। राज कुमार ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी। उन्होंने कोर्ट को बताया कि उन्होंने पहले भी इस अस्पताल से इलाज करवाकर 13 बार मेडिकल बिल जमा किए थे, जिन्हें विभाग ने बिना आपत्ति के मंजूर किया था।
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कैट ने मामले में सेवानिवृत्त अधिकारी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए वित्त विभाग को 14,626 रुपये के बिल का केंद्रीय स्वास्थ्य योजना की दरों के अनुसार आठ हफ्तों के भीतर भुगतान करने को कहा है।
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