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Jammu News: मौसम का बदला मिजाज सेहत पर भारी... खांसी, जुकाम और बुखार की हो रही बीमारी
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पीड़ित मरीज बढ़े; बच्चे भी हो रहे निमोनिया के शिकार, सांस संबंधी दिक्कतों इजाफा, बाल ओपीडी में आने वालों में 30 फीसदी बच्चों को संक्रमण की शिकायत
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। लंबे समय से शुष्क मौसम के कारण लोगों की सेहत बिगड़ने लगी है। रेस्पिरेटरी इंफेक्शन के सक्रिय होने से लगभग हर घर में खांसी, जुकाम और बुखार से ग्रसित लोग मिलने लगे हैं। बच्चों में निमोनिया की शिकायत बढ़ रही है। सांस संबंधी दिक्कतों में इजाफा हुआ है।
बाल ओपीडी में आने वालों में 30 फीसदी बच्चों को संक्रमण की शिकायत है। हालांकि, शनिवार देर रात कुछ स्थानों पर हल्की बारिश हुई है, लेकिन विशेषज्ञों ने इसे नाकाफी बताया है।
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एसएमजीएस अस्पताल के बाल रोग विभाग के एचओडी डाॅ. जीएस सैनी के अनुसार मौजूदा मौसम में खासतौर पर दो साल से कम आयु वर्ग के बच्चों की सेहत पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। पारा गिरने से बच्चों में निमोनिया की शिकायत बढ़ी है।
अस्पताल की करीब 400 की ओपीडी में 30 प्रतिशत तक रेस्पिरेटरी ट्रैक इंफेक्शन और ब्रांकाइटिस के पीड़ित पहुंच रहे हैं, जिसमें निमोनिया के कई पीड़ितों को भर्ती करना पड़ रहा है। कोविड के बाद समाज के एक बड़े वर्ग में शारीरिक क्षमता में कमी देखी गई है, जिससे सीजनल रेस्पिरेटरी जैसी इंफेक्शन से समाज का एक बड़ा वर्ग प्रभावित हो रहा है।
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फ्लू पर कोविड प्रोटोकाल का पालन करें
खांसी-जुकाम जैसे फ्लू की समस्या के दौरान कोविड प्रोटोकाल का पालन करें। यह वायरल इंफेक्शन छींकने, खांसने से हवा के माध्यम से शारीरिक रूप से कमजोर लोगों में चली जाती है। ऐसे पीड़ित बच्चों को मास्क पहनाएं, स्कूल में न भेजें, ठंडे पदार्थों का सेवन न कराएं आदि। रेस्पिरेटरी इंफेक्शन में नाक बहना, सिर में दर्द रहना, खांसी, गला खराब, बुखार, सांस लेने में तकलीफ आदि समस्या होती है।
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एलर्जी और ड्राइनेस त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ीं
शुष्क मौसम से त्वचा संंबंधी समस्याएं भी बढ़ी हैं। इसमें चेहरे, गले, कान सहित शरीर के अन्य हिस्सों में एलर्जी की समस्या हो रही है। इससे बच्चों से लेकर हर आयु वर्ग के लोग प्रभावित हैं। एसएमजीएस अस्पताल के त्वचा रोग विभाग के एचओडी डॉ. देवराज डोगरा का कहना है कि शुष्क सर्दी में अधिकांश लोग गर्म पाने से नहाते हैं। इससे जिन लोगों के शरीर में पहले से ड्राइनेस की समस्या होती है, वह और अधिक बढ़ जाती है। कई बार अधिक खारिश करने पर शरीर के बाहरी हिस्सों में जख्म हो जाते हैं, जो बाद में फोड़े-फुंसियों में बदल जाते हैं। रात को सोते समय गर्म कपड़ों में यह दिक्कत अधिक होती है। इस मौसम में डेंड्रर्फ की समस्या भी अचानक बढ़ जाती है।
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बचाव
- अधिक गर्म पानी के बजाय गुनगुने पानी से नहाएं
- सरसों के तेल की मालिस करें
- गर्म कपड़ों के नीचे काॅटन वाले परिधान पहनें
- ड्राईनेस से बचाव के लिए माइस्चराइजर क्रीम का उपयोग करें
- खानपान का विशेष ध्यान रखें। ज्यादा देर तक खाली पेट न रहें
- जाड़े में प्यास कम लगती है, लेकिन पानी पीते रहें।
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आयुर्वेद नुस्खा कमाल का
आयुर्वेद अस्पताल जम्मू के पूर्व चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. तरण सिंह ने बताया कि रेस्पिरेटरी इंफेक्शन में पीड़ित को शहद के एक चमच में तुलसी, अदरक के रस का मिश्रण और काली मिर्च मिलाकर दें।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। लंबे समय से शुष्क मौसम के कारण लोगों की सेहत बिगड़ने लगी है। रेस्पिरेटरी इंफेक्शन के सक्रिय होने से लगभग हर घर में खांसी, जुकाम और बुखार से ग्रसित लोग मिलने लगे हैं। बच्चों में निमोनिया की शिकायत बढ़ रही है। सांस संबंधी दिक्कतों में इजाफा हुआ है।
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बाल ओपीडी में आने वालों में 30 फीसदी बच्चों को संक्रमण की शिकायत है। हालांकि, शनिवार देर रात कुछ स्थानों पर हल्की बारिश हुई है, लेकिन विशेषज्ञों ने इसे नाकाफी बताया है।
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एसएमजीएस अस्पताल के बाल रोग विभाग के एचओडी डाॅ. जीएस सैनी के अनुसार मौजूदा मौसम में खासतौर पर दो साल से कम आयु वर्ग के बच्चों की सेहत पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। पारा गिरने से बच्चों में निमोनिया की शिकायत बढ़ी है।
अस्पताल की करीब 400 की ओपीडी में 30 प्रतिशत तक रेस्पिरेटरी ट्रैक इंफेक्शन और ब्रांकाइटिस के पीड़ित पहुंच रहे हैं, जिसमें निमोनिया के कई पीड़ितों को भर्ती करना पड़ रहा है। कोविड के बाद समाज के एक बड़े वर्ग में शारीरिक क्षमता में कमी देखी गई है, जिससे सीजनल रेस्पिरेटरी जैसी इंफेक्शन से समाज का एक बड़ा वर्ग प्रभावित हो रहा है।
फ्लू पर कोविड प्रोटोकाल का पालन करें
खांसी-जुकाम जैसे फ्लू की समस्या के दौरान कोविड प्रोटोकाल का पालन करें। यह वायरल इंफेक्शन छींकने, खांसने से हवा के माध्यम से शारीरिक रूप से कमजोर लोगों में चली जाती है। ऐसे पीड़ित बच्चों को मास्क पहनाएं, स्कूल में न भेजें, ठंडे पदार्थों का सेवन न कराएं आदि। रेस्पिरेटरी इंफेक्शन में नाक बहना, सिर में दर्द रहना, खांसी, गला खराब, बुखार, सांस लेने में तकलीफ आदि समस्या होती है।
एलर्जी और ड्राइनेस त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ीं
शुष्क मौसम से त्वचा संंबंधी समस्याएं भी बढ़ी हैं। इसमें चेहरे, गले, कान सहित शरीर के अन्य हिस्सों में एलर्जी की समस्या हो रही है। इससे बच्चों से लेकर हर आयु वर्ग के लोग प्रभावित हैं। एसएमजीएस अस्पताल के त्वचा रोग विभाग के एचओडी डॉ. देवराज डोगरा का कहना है कि शुष्क सर्दी में अधिकांश लोग गर्म पाने से नहाते हैं। इससे जिन लोगों के शरीर में पहले से ड्राइनेस की समस्या होती है, वह और अधिक बढ़ जाती है। कई बार अधिक खारिश करने पर शरीर के बाहरी हिस्सों में जख्म हो जाते हैं, जो बाद में फोड़े-फुंसियों में बदल जाते हैं। रात को सोते समय गर्म कपड़ों में यह दिक्कत अधिक होती है। इस मौसम में डेंड्रर्फ की समस्या भी अचानक बढ़ जाती है।
बचाव
- अधिक गर्म पानी के बजाय गुनगुने पानी से नहाएं
- सरसों के तेल की मालिस करें
- गर्म कपड़ों के नीचे काॅटन वाले परिधान पहनें
- ड्राईनेस से बचाव के लिए माइस्चराइजर क्रीम का उपयोग करें
- खानपान का विशेष ध्यान रखें। ज्यादा देर तक खाली पेट न रहें
- जाड़े में प्यास कम लगती है, लेकिन पानी पीते रहें।
आयुर्वेद नुस्खा कमाल का
आयुर्वेद अस्पताल जम्मू के पूर्व चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. तरण सिंह ने बताया कि रेस्पिरेटरी इंफेक्शन में पीड़ित को शहद के एक चमच में तुलसी, अदरक के रस का मिश्रण और काली मिर्च मिलाकर दें।