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सरकारी परिवहन सुविधा न के बराबर: जम्मू में 4 हजार मेटाडोर और JKRTC की बसें हैं सिर्फ 20
Sun, 18 Sep 2022 01:41 PM IST
kumar गुलशन कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Sun, 18 Sep 2022 01:41 PM IST
सार
जम्मू शहर में कुल 75 रूट पर चार हजार के करीब मेटाडोर चल रही हैं। इसमें 47 प्रमुख रुट पर ही सात सौ से अधिक हैं। वहीं जेकेआरटीसी की शहर में सिर्फ 20 बसें हैं।
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Jammu City Bus
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जम्मू शहर में सरकारी यात्री वाहनों की संख्या कम हो रही है, जबकि निजी यात्री वाहनों की भरमार है। जिस रूट पर 40 मेटाडोर हैं, वहां जेकेआरटीसी की सिर्फ एक बस है। शहरवासियों के पास सार्वजनिक परिवहन का विकल्प न होने से मेटाडोर चालकों की मनमानी जारी है। यह ट्रैफिक नियमों की भी परवाह नहीं कर रहे हैं। नतीजा, हादसे बढ़ रहे हैं।
जम्मू शहर में कुल 75 रूट पर चार हजार के करीब मेटाडोर चल रही हैं। इसमें 47 प्रमुख रुट पर ही सात सौ से अधिक हैं। वहीं जम्मू-कश्मीर रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (जेकेआरटीसी) की शहर में सिर्फ 20 बसें हैं। इनमें से प्रतिदिन 15 ही चलती हैं। सरकारी बसों की कमी के बीच मेटाडोर चालकों की मनमानी चिंताजनक है। तीन विभागों की निगरानी के बावजूद मेटाडोर चालक नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। इनकी वजह से शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या भी बन रही है।
नियमों का पालन कराने में ट्रैफिक, परिवहन विभाग विफल
बीच सड़क पर मेटाडोर रोक कर सवारियां बैठाना। सर्विस रोड पर वाहन खड़े कर देना। बस स्टॉप के बजाय चौक-चौराहों पर वाहन खड़े करना और ओवरलोडिंग जैसी बात आम हो गई है। इस तस्वीर से साफ है कि ट्रैफिक और परिवहन विभाग मेटाडोर चालकों से नियमों का पालन कराने में विफल है।
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शहर में नहीं दिखाई देतीं सरकारी बसें
जम्मू को मेटाडोर का शहर कहा जाए, तो गलत नहीं होगा। हर रूट पर 40 से 50 मेटाडोर चल रही हैं। सरकारी बसें तो दिखती ही नहीं हैं। इसलिए मेटाडोर चालक करते हैं। सरकार को शहर में सिटी बस सेवा को मजबूत करना होगा। - दीपांशु।
... तो जोखिम उठाकर नहीं करते सफर
नियमों का उल्लंघन करना मेटाडोर चालकों के लिए आम बात है। अगर पर्याप्त संख्या में सरकारी बसें होती, तो लोग क्यों ओवरलोड मेटाडोर में जान जोखिम में डालकर सफर करते। मैं बाड़ी ब्राह्मणा से आता हूं। इस रूट पर कभी सरकारी बस नहीं देखी। - आयान।
22 सीटर मेटाडोर में होती हैं 35 सवारियां
मेटाडोर चालकों के लिए ट्रैफिक नियम मायने नहीं रखते हैं। ओवरलोडिंग आम है। 22 सीटर मेटाडोर में 35 सवारियां होती हैं। अगर सरकारी बसों की संख्या भी मेटाडोर जितनी या आसपास होती तो हम क्यों ओवरलोड मेटाडोर में सफर करते। - इमरान।
अन्य शहरों की तरह हो परिवहन सुविधा
दिल्ली, चंडीगढ़ सहित अन्य शहरों में सिटी बस सेवा की स्थिति बेहतर है। लेकिन, जम्मू में सिर्फ मेटाडोर है। सरकारी बस सेवा तो दिखती ही नहीं है। इस पर ध्यान देने की जरूरत है। लोगों को अन्य शहरों की तरह परिवहन सुविधा देनी चाहिए। - रिहान।
आने वाली हैं 100 नई इलेक्ट्रिक बसें
स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत जम्मू शहर के लिए 100 नई इलेक्ट्रिक बसें खरीदी जा रही हैं। इन्हें विभिन्न रूटों पर चलाया जाएगा। इससे यात्रियों को सुरक्षित और सुगम परिवहन सुविधा मिलेगी, जिससे मेटाडोर पर बढ़ती निर्भरता को भी कम किया जा सकेगा। - राकेश संग्राल, एमडी, जेकेएसआरटीसी।
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जम्मू शहर में कुल 75 रूट पर चार हजार के करीब मेटाडोर चल रही हैं। इसमें 47 प्रमुख रुट पर ही सात सौ से अधिक हैं। वहीं जम्मू-कश्मीर रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (जेकेआरटीसी) की शहर में सिर्फ 20 बसें हैं। इनमें से प्रतिदिन 15 ही चलती हैं। सरकारी बसों की कमी के बीच मेटाडोर चालकों की मनमानी चिंताजनक है। तीन विभागों की निगरानी के बावजूद मेटाडोर चालक नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। इनकी वजह से शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या भी बन रही है।
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नियमों का पालन कराने में ट्रैफिक, परिवहन विभाग विफल
बीच सड़क पर मेटाडोर रोक कर सवारियां बैठाना। सर्विस रोड पर वाहन खड़े कर देना। बस स्टॉप के बजाय चौक-चौराहों पर वाहन खड़े करना और ओवरलोडिंग जैसी बात आम हो गई है। इस तस्वीर से साफ है कि ट्रैफिक और परिवहन विभाग मेटाडोर चालकों से नियमों का पालन कराने में विफल है।
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शहर में नहीं दिखाई देतीं सरकारी बसें
जम्मू को मेटाडोर का शहर कहा जाए, तो गलत नहीं होगा। हर रूट पर 40 से 50 मेटाडोर चल रही हैं। सरकारी बसें तो दिखती ही नहीं हैं। इसलिए मेटाडोर चालक करते हैं। सरकार को शहर में सिटी बस सेवा को मजबूत करना होगा। - दीपांशु।
... तो जोखिम उठाकर नहीं करते सफर
नियमों का उल्लंघन करना मेटाडोर चालकों के लिए आम बात है। अगर पर्याप्त संख्या में सरकारी बसें होती, तो लोग क्यों ओवरलोड मेटाडोर में जान जोखिम में डालकर सफर करते। मैं बाड़ी ब्राह्मणा से आता हूं। इस रूट पर कभी सरकारी बस नहीं देखी। - आयान।
22 सीटर मेटाडोर में होती हैं 35 सवारियां
मेटाडोर चालकों के लिए ट्रैफिक नियम मायने नहीं रखते हैं। ओवरलोडिंग आम है। 22 सीटर मेटाडोर में 35 सवारियां होती हैं। अगर सरकारी बसों की संख्या भी मेटाडोर जितनी या आसपास होती तो हम क्यों ओवरलोड मेटाडोर में सफर करते। - इमरान।
अन्य शहरों की तरह हो परिवहन सुविधा
दिल्ली, चंडीगढ़ सहित अन्य शहरों में सिटी बस सेवा की स्थिति बेहतर है। लेकिन, जम्मू में सिर्फ मेटाडोर है। सरकारी बस सेवा तो दिखती ही नहीं है। इस पर ध्यान देने की जरूरत है। लोगों को अन्य शहरों की तरह परिवहन सुविधा देनी चाहिए। - रिहान।
आने वाली हैं 100 नई इलेक्ट्रिक बसें
स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत जम्मू शहर के लिए 100 नई इलेक्ट्रिक बसें खरीदी जा रही हैं। इन्हें विभिन्न रूटों पर चलाया जाएगा। इससे यात्रियों को सुरक्षित और सुगम परिवहन सुविधा मिलेगी, जिससे मेटाडोर पर बढ़ती निर्भरता को भी कम किया जा सकेगा। - राकेश संग्राल, एमडी, जेकेएसआरटीसी।