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पेंशन कोई एहसान नहीं, हक है, बिना जांच के रोक नहीं सकते : कैट
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रिटायर्ड कर्मचारी को पेंशन और उससे संबंधित लाभ देने का आदेश
कहा, पदनाम बदलने भर से अधिकार नहीं छीने जा सकते
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने एक मामले में फैसला सुनाते हुए कहा है कि पेंशन किसी कर्मचारी पर उपकार नहीं है, बल्कि उसका वैधानिक अधिकार है। बिना किसी विभागीय जांच के इसे रोका नहीं जा सकता। न्यायाधिकरण ने यह आदेश जल शक्ति विभाग के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी के आवेदन पर सुनाया है।
शहर के न्यू प्लाट निवासी शाम लाल ने कैट में दायर आवेदन में कहा था कि उसने विभाग में लंबे समय तक सेवाएं दीं, लेकिन उसे नियमित कर्मचारी नहीं माना गया और सेवा समाप्ति के बाद पेंशन व अन्य लाभ नहीं दिए। विभाग का कहना था कि याचिकाकर्ता केवल एक दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी था और पेंशन का पात्र नहीं है।
पीठ ने विभागीय रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को न तो सेवा समाप्त करते समय कोई आरोप पत्र दिया गया और न ही कोई विभागीय जांच की गई। सेवा समाप्ति बिना किसी कारण या नोटिस के की गई। न्यायाधिकरण ने यह भी कहा कि महज पदनाम में ‘डेलीवेजर’ लिखा होने से सेवा के दौरान अर्जित अधिकार समाप्त नहीं हो सकते, जब तक कि विभाग यह सिद्ध न कर दे कि नियुक्ति केवल अस्थायी या सीमित अवधि के लिए थी।
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विभाग यह साबित करने में असमर्थ रहा कि याचिकाकर्ता को वैधानिक प्रक्रिया के तहत सेवा से हटाया गया। इसी के साथ कैट ने विभाग को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता को तीन माह के भीतर पेंशन तथा उससे संबंधित सभी लाभ प्रदान करे। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि सेवा लाभों से इनकार केवल तभी किया जा सकता है जब उसके लिए नियमपूर्वक विभागीय जांच हुई हो।
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कहा, पदनाम बदलने भर से अधिकार नहीं छीने जा सकते
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने एक मामले में फैसला सुनाते हुए कहा है कि पेंशन किसी कर्मचारी पर उपकार नहीं है, बल्कि उसका वैधानिक अधिकार है। बिना किसी विभागीय जांच के इसे रोका नहीं जा सकता। न्यायाधिकरण ने यह आदेश जल शक्ति विभाग के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी के आवेदन पर सुनाया है।
शहर के न्यू प्लाट निवासी शाम लाल ने कैट में दायर आवेदन में कहा था कि उसने विभाग में लंबे समय तक सेवाएं दीं, लेकिन उसे नियमित कर्मचारी नहीं माना गया और सेवा समाप्ति के बाद पेंशन व अन्य लाभ नहीं दिए। विभाग का कहना था कि याचिकाकर्ता केवल एक दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी था और पेंशन का पात्र नहीं है।
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पीठ ने विभागीय रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को न तो सेवा समाप्त करते समय कोई आरोप पत्र दिया गया और न ही कोई विभागीय जांच की गई। सेवा समाप्ति बिना किसी कारण या नोटिस के की गई। न्यायाधिकरण ने यह भी कहा कि महज पदनाम में ‘डेलीवेजर’ लिखा होने से सेवा के दौरान अर्जित अधिकार समाप्त नहीं हो सकते, जब तक कि विभाग यह सिद्ध न कर दे कि नियुक्ति केवल अस्थायी या सीमित अवधि के लिए थी।
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विभाग यह साबित करने में असमर्थ रहा कि याचिकाकर्ता को वैधानिक प्रक्रिया के तहत सेवा से हटाया गया। इसी के साथ कैट ने विभाग को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता को तीन माह के भीतर पेंशन तथा उससे संबंधित सभी लाभ प्रदान करे। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि सेवा लाभों से इनकार केवल तभी किया जा सकता है जब उसके लिए नियमपूर्वक विभागीय जांच हुई हो।