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Jammu: कब खत्म होगा 'वनवास'... आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों ने दिवाली पर भी किया प्रदर्शन, तबादले की मांग की
Tue, 25 Oct 2022 08:35 AM IST
kumar गुलशन कुमार
अमर उजाल नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाल नेटवर्क, जम्मू
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Tue, 25 Oct 2022 08:35 AM IST
सार
कर्मचारियों ने कहा कि 14 साल का वनवास काट कर भगवान श्री राम चंद्र तो अयोध्या वापस आ गए थे, लेकिन उनका कश्मीर में रहने का वनवास कब खत्म होगा, उन्हें इसका पता नहीं है। सिर्फ उन्हें ही नहीं उनके परिवार को भी उनके साथ परेशानियों झेलनी पड़ रही हैं।
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Jammu
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जम्मू संभाग में तबादले की मांग को लेकर कश्मीर घाटी में कार्यरत आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों ने दिवाली के दिन भी धरना-प्रदर्शन किया। जम्मू शहर के अंबेडकर चौक पर कर्मचारी इस साल जून से धरने पर बैठे हुए हैं। सोमवार को प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए उनके लिए उपयुक्त व्यापक स्थानांतरण नीति बनाने की मांग की।
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कर्मचारियों ने कहा कि आज दिवाली के दिन भी वे धरना-प्रदर्शन करने के लिए मजबूर हैं। 14 साल का वनवास काट कर भगवान श्री राम चंद्र तो अयोध्या वापस आ गए थे, लेकिन उनका कश्मीर में रहने का वनवास कब खत्म होगा, उन्हें इसका पता नहीं है। कर्मचारियों ने कहा कि सिर्फ उन्हें ही नहीं उनके परिवार को भी उनके साथ परेशानियों झेलनी पड़ रही हैं। उनका कहना है कि कई कर्मचारियों को तो वेतन भी नहीं मिल पाया है। ऐसे में उनकी दिवाली कैसे बितेगी।
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प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार की तरफ से हाल ही कमेटी का गठन किया गया है। कुछ दिनों पहले भी कमेटी के गठन की बात सामने आई थी, लेकिन कमेटी ने क्या रिपोर्ट सरकार को दी, इसकी कोई जानकारी उन्हें नहीं मिली। इसके विपरीत घाटी में नौकरी वालों के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य करने और कश्मीर में फिर से टारगेट किलिंग की घटनाएं देखने को मिली हैं। इन सब हालातों के बीच वे किस तरह अपनी और परिवार की जान जोखिम में डाल नौकरी करने के लिए वहां जाएं। उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि उनके घरों में रोशन किया जाए। उनके लिए उपयुक्त व्यापक स्थानांतरण नीति जल्द से जल्द बनाई जाए।
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जम्मू संभाग के रहने वाले करीब 3 हजार आरक्षित कर्मचारी कश्मीर संभाग के अलग-अलग जिलों में अलग-अलग विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से ज्यादातर कर्मी पंद्रह साल से अधिक समय से कश्मीर में तैनात हैं। इस साल मई-जून महीने में घाटी में एकाएक हुई टारगेट किलिंग की घटनाओं के बाद से इनमें से ज्यादातर कर्मी जम्मू लौट आए हैं और जम्मू संभाग में ट्रांसफर किए जाने की मांग को लेकर जम्मू बेस्ड रिजर्व्ड कैटेगरी इंप्लाइज एसोसिएशन कश्मीर के बैनर तले धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं, पीएम पैकेज के तहत कश्मीर संभाग में तैनात कश्मीरी पंडित भी कश्मीर से बाहर जम्मू में तैनाती की मांग को लेकर संघर्षरत हैं।