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प्रदेश के ऑफबीट पर्यटन स्थलों का विकास प्राथमिकता : उमर
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बजट सत्र में एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री बोले-मचैल, भद्रवाह, सुकराला माता और पंचैरी जैसे स्थलों को विस्तार पर फोकस
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। पर्यटन विभाग पारंपरिक स्थलों से परे पर्यटन का विस्तार करने के लिए ऑफबीट वाले स्थलों के विकास पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। गुरेज, केरन, बुंगस, तोसामैदान, अहरबल, दूधपथरी, मचैल, भद्रवाह, सुकराला माता और पंचैरी जैसे स्थलों को विकसित करने पर काम कर रहा है। यह जानकारी मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बजट सत्र में दी।
उन्होंने कहा, सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ ही अधिक पर्यटकों को आकर्षित करने पर काम कर रही है। हमारा फिलहाल पर्यटन बोर्ड बनाने को कोई प्रस्ताव नहीं है। विधायक अली मोहम्मद सागर के सवाल पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि श्रीनगर शहर में धार्मिक और पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देने को प्राथमिकता दी जा रही है।
डल, निशात, शालीमार, चश्माशाही, परी महल, तीर्थस्थल, मंदिर, गुरुद्वारे और अन्य स्थल श्रीनगर की विशिष्टता को परिभाषित करते हैं। हम इन स्थलों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि पर्यटन जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख स्तंभ है, जो सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण योगदान देता है। यह क्षेत्र होटल कर्मचारियों, टूर ऑपरेटरों, टैक्सी चालकों और स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से आजीविका के अवसर प्रदान करता है। हमारा ध्यान पर्यटन के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, पर्यटकों के अनुभव को बढ़ाने और इस क्षेत्र में निरंतर विकास सुनिश्चित करने पर है।
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1914 में से 1057 परियोजनाएं हुईं पूरी
मुख्यमंत्री ने पिछले तीन वर्षों में पर्यटन विभाग द्वारा शुरू की गई बुनियादी ढांचे से संबंधित परियोजनाओं पर भी अपडेट दिया। बताया कि 2022-23 में 984 परियोजनाएं शुरू की गईं, जिनमें से 549 पूरी हुईं। 2023-24 में 1191 परियोजनाएं शुरू की गईं, जिनमें से 516 पूरी हुईं। मौजूदा समय तक कुल 1914 परियोजनाएं शुरू की गई हैं, जिनमें से 1057 पूरी हो चुकी हैं। 2023 में जम्मू-कश्मीर में 2.11 करोड़ पर्यटक आए और 2024 में यह संख्या बढ़कर 2.35 करोड़ हो गई है।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। पर्यटन विभाग पारंपरिक स्थलों से परे पर्यटन का विस्तार करने के लिए ऑफबीट वाले स्थलों के विकास पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। गुरेज, केरन, बुंगस, तोसामैदान, अहरबल, दूधपथरी, मचैल, भद्रवाह, सुकराला माता और पंचैरी जैसे स्थलों को विकसित करने पर काम कर रहा है। यह जानकारी मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बजट सत्र में दी।
उन्होंने कहा, सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ ही अधिक पर्यटकों को आकर्षित करने पर काम कर रही है। हमारा फिलहाल पर्यटन बोर्ड बनाने को कोई प्रस्ताव नहीं है। विधायक अली मोहम्मद सागर के सवाल पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि श्रीनगर शहर में धार्मिक और पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देने को प्राथमिकता दी जा रही है।
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डल, निशात, शालीमार, चश्माशाही, परी महल, तीर्थस्थल, मंदिर, गुरुद्वारे और अन्य स्थल श्रीनगर की विशिष्टता को परिभाषित करते हैं। हम इन स्थलों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि पर्यटन जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख स्तंभ है, जो सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण योगदान देता है। यह क्षेत्र होटल कर्मचारियों, टूर ऑपरेटरों, टैक्सी चालकों और स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से आजीविका के अवसर प्रदान करता है। हमारा ध्यान पर्यटन के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, पर्यटकों के अनुभव को बढ़ाने और इस क्षेत्र में निरंतर विकास सुनिश्चित करने पर है।
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1914 में से 1057 परियोजनाएं हुईं पूरी
मुख्यमंत्री ने पिछले तीन वर्षों में पर्यटन विभाग द्वारा शुरू की गई बुनियादी ढांचे से संबंधित परियोजनाओं पर भी अपडेट दिया। बताया कि 2022-23 में 984 परियोजनाएं शुरू की गईं, जिनमें से 549 पूरी हुईं। 2023-24 में 1191 परियोजनाएं शुरू की गईं, जिनमें से 516 पूरी हुईं। मौजूदा समय तक कुल 1914 परियोजनाएं शुरू की गई हैं, जिनमें से 1057 पूरी हो चुकी हैं। 2023 में जम्मू-कश्मीर में 2.11 करोड़ पर्यटक आए और 2024 में यह संख्या बढ़कर 2.35 करोड़ हो गई है।